गिलगित-बाल्टिस्तान चुनाव में पाक सेना का ‘डर्टी गेम’, आतंकियों को खुली छूट

Krishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले विधानसभा चुनावों में पाकिस्तानी सेना अपना शासन बनाए रखने के लिए हर हथकंडा अपना रही है। रिपोर्ट पाकिस्तानी सेना की नापाक करतूतों की एक बानगी है।

गिलगित-बाल्टिस्तान चुनाव में पाक सेना का ‘डर्टी गेम’, आतंकियों को खुली छूट

पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में जब गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों में सरकार और सेना को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है, सेना किसी भी सूरत में गिलगित-बाल्टिस्तान पर अपना शासन बनाए रखना चाहती है। 7 जून को होने वाले इन विधानसभा चुनावों में अपने मनमाफिक नतीजों के लिए जनरल आसिम मुनीर के नेतृत्व वाली सेना विपक्षी नेताओं को कुचलने में लगी हुई है। सेना मुख्यधारा के विपक्षी नेताओं पर लगातार ऐक्शन ले रही है। इतना ही नहीं सूबे पर कब्जे को बनाए रखने के लिए प्रतिबंधित आतंकी संगठनों को भी मुख्यधारा में शामिल किया जा रहा है।

ताल ठोंक रहा तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान

न्यूज-18 की रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष भारतीय खुफिया सूत्रों की मानें तो एक सोची समझी रणनीति के तहत चुनावी नतीजों को अपने मनमाफिक बनाए रखने के लिए प्रतिबंधित आतंकी संगठनों को मुख्यधारा में लाने की नापाक कोशिश की जा रही है। आलम यह है कि तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान यानी टीएलपी इस चुनाव में ताल ठोंक रहा है। सनद रहे तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान यानी टीएलपी को पाकिस्तान के अपने 'आतंकवाद विरोधी अधिनियम, 1997' के तहत आधिकारिक तौर पर प्रतिबंधित किया गया है।

लोगों की आवाजों को कुचलने का प्रयास

विश्लेषकों की मानें तो यह कोई पहली बार नहीं है तब पाकिस्तान में चोर दरवाजे से किसी आतंकी समूह को चुनाव में उतरने की खुली छूट दी गई है। पूर्व में लश्कर-ए-तैयबा को भी मिल्ली मुस्लिम लीग नाम की राजनीतिक पार्टी के रूप में ऐसी छूट दी गई थी। अब सेना टीएलपी के जरिए गिलगित-बाल्टिस्तान के स्थानीय लोगों की आवाजों को कुचलना चाहती है।

निशाने पर पीटीआई

सेना के निशाने पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी पीटीआई है। सुरक्षा बलों ने गिलगित-बाल्टिस्तान के हुंजा में पीटीआई के वरिष्ठ नेताओं को चुनाव प्रचार के दौरान गिरफ्तार कर लिया। इनमें खैबर-पख्तूनख्वा अध्यक्ष जुनैद अकबर खान, नेशनल असेंबली (MNA) के सदस्य सलीमुर रहमान और सैयद महबूब शाह शामिल थे। बताया जाता है कि इन नेताओं को NOC नहीं होने के आरोप में पकड़ा गया। इनको तुरंत इलाके को छोड़ने का फरमान सुनाया गया।

क्यों डरी हुई है मुनीर की फौज?

इन तरह विपक्ष को कुचल देने के पीछे सरकार और सेना के डर को बताया जा रहा है। भारी आक्रोश के कारण सेना डरी हुई है कि कहीं उसके हाथ से यह क्षेत्र निकल ना जाए। विपक्षी नेताओं को कुचलने के साथ ही सेना ने एक और चाल चली है। सेना ने अपने पसंदीदा चेहरों को मैदान में उतारा है। कुल 403 उम्मीदवारों में से 272 कंडिडेट निर्दलीय हैं। गौर करने वाली बात यह कि इनमें से कई सरकार मोहरे हैं जिनको प्रशासन और सरकारी तंत्र का पूरा समर्थन है। इन मुखौटा उम्मीदवारों के पक्ष में तगड़ा माहौल बना दिया गया है।

चित भी मेरी और पट भी मेरी, फॉमूले पर सेना

बाकी कंडिडेट में देखें तो पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के 22 और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के 23 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनको पर्दे के पीछे से सेना का साथ मिल रहा है। कुल मिलाकर गिलगित-बाल्टिस्तान के विधानसभा चुनावों में सेना 'चित भी मेरी और पट भी मेरी' फॉर्मूले पर आगे बढ़ रही है।

तिकड़मों के जरिए शासन बनाए रखने की कवायद

इस क्षेत्र पर नजर रखने वाले शीर्ष खुफिया अधिकारियों और विश्लेषकों की मानें तो सेना और शहबाज सरकार की पूरी कवायद साफ संकेत देती है कि दोनों ही गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों को बुनियादी सुविधाएं और स्वतंत्रता देने में विफल रहे हैं। बदहाल अर्थव्यवस्था में विकास की बात तो सिरे से बेमानी साबित हो जाती है। कुल मिलाकर सेना ने लोगों की समस्याओं को दूर करने के बजाय तमात तिकड़मों के जरिए अपना शासन बरकरार का फैसला कर लिया है। सेना की यह कारगुजारी उसके नापाक और दमनात्मक चरित्र को उजागर करती है।

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Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


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कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


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परिचय और अनुभव: कृष्ण बिहारी सिंह लोकमत, आज समाज, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। कृष्ण बिहारी सिंह मौजूदा वक्त में भारत के प्रसिद्ध समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) की स्टेट टीम में डिप्टी चीफ एडिटर (कंटेंट क्रिएटर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।

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