Explainer: मुस्लिम तिकड़ी में फंस गया पाकिस्तान, आसिम मुनीर ने कर ली गुपचुप डील?
Pakistan News: रिपोर्ट में कहा गया है कि कि मुनीर ने IRGC चीफ के साथ मिलकर पाकिस्तान-ईरान जॉइंट वेंचर बनाया है। इसका मकसद ईरान के तेल को पाकिस्तान के रास्ते चुपचाप निर्यात करने में मदद करना था, ताकि ईरान सऊदी अरब पर हमले बंद कर दे।

पश्चिम एशिया में तेजी से हालात बिगड़ रहे हैं। अमेरिकी सेना ने बृहस्पतिवार की रात ईरान पर लगातार 13वीं रात हवाई हमले किए हैं। ये हमले ऐसे समय में हुए हैं, जब यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया है। इस घटनाक्रम से ईरान से जुड़ा संघर्ष और व्यापक होने की आशंका बढ़ गई है। उधर, बृहस्पतिवार को ही पाकिस्तान ने चेतावनी दी कि लाल सागर में उसके ध्वज वाले जहाजों या समुद्री हितों के खिलाफ अगर कोई भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई की गई तो वह उसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए 'गंभीर खतरा' मानेगा और जवाबी कार्रवाई करेगा।
इस बीच, पाकिस्तान और उसके सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जनरल मुनीर ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के चीफ अहमद वाहिदी के साथ मिलकर एक 'गुप्त तेल सौदा' किया है। यह कोई साधारण समझौता नहीं है, बल्कि एक ऐसा प्राइवेट ऑयल वेंचर है, जिसके जरिए सऊदी अरब की सुरक्षा को ईरान की फिरौती के बदले किया गया है। दरअसल, पाकिस्तान ईरान और सऊदी अरब के बीच बढ़ती दुश्मनी की तिकड़ी में फंस गया है। वह एक तरफ ईरान संग अपना ईमान और मध्यस्थ धर्म को बनाए रखना चाहता है, दूसरी तरफ सऊदी से मिलने वाले धन स्रोत की भी रक्षा करना चाहता है।
यह समझौता मार्च के आखिर में हुआ था
टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट में इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि आसिम मुनीर ने IRGC चीफ वाहिदी के साथ तेल ट्रांसपोर्ट के एक जॉइंट वेंचर का इस्तेमाल करके ईरान और सऊदी अरब के बीच एक समझौता कराया है। इस समझौते के तहत ईरान सऊदी अरब पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुनीर की मध्यस्थता में यह समझौता मार्च के आखिर में हुआ था, जब ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़राइल युद्ध शुरुआती हफ़्तों में ही था। इन तीन अधिकारियों के अनुसार, युद्ध के पहले महीने में क्षेत्र के अन्य देशों के साथ-साथ सऊदी अरब पर भी ईरान ने कई बार हमले किए, लेकिन समझौता होने के बाद सऊदी अरब पर हमले लगभग बंद हो गए।
जनरलों का निजी धंधा और सऊदी की सुरक्षा
रिपोर्ट के मुताबिक, मुनीर और वाहिदी ने एक ज्वाइंट वेंचर बनाया है जो पाकिस्तान के रास्ते ईरानी तेल का 'ऑफ-द-बुक्स' (अघोषित) निर्यात कर रहा है। इस काले धंधे के बदले में ईरान ने सऊदी अरब पर अपने हमले रोकने का वादा किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सौदे से मुनीर और वाहिदी, दोनों ही व्यक्तिगत रूप से भारी मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या पाकिस्तान के सेना प्रमुख देश की रक्षा के नाम पर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं?
सऊदी अरब को 'कर्जदार' बनाने की साजिश?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सौदे के पीछे मुनीर की गहरी चाल है। वह सऊदी अरब को पाकिस्तान पर इतना निर्भर और कर्जदार बना देना चाहते हैं कि रियाद पूरी तरह से इस्लामाबाद के इशारों पर चलने को मजबूर हो जाए। पाकिस्तान पहले ही सऊदी अरब के साथ एक रक्षा समझौता कर चुका है, जिसके तहत उसके हजारों सैनिक वहां तैनात हैं और अरबों डॉलर कमा रहे हैं। अब इस गुप्त समझौते के जरिए मुनीर ने सऊदी की सुरक्षा को अपने 'प्राइवेट बिजनेस' की ढाल बना दिया है।
दोनों सैन्य जनरलों को भारी मुनाफा
ईरान और सऊदी अरब के बीच समझौता कराने के लिए, मुनीर ने वाहिदी के साथ उस जॉइंट वेंचर को जारी रखने का लालच दिया जो पिछले साल के आखिर से ईरान से पाकिस्तान तक चुपचाप तेल पहुंचा रहा था। दोनों सैन्य जनरलों से जुड़ी इस कंपनी ने दोनों को भारी मुनाफा पहुंचाया है, खासकर तब जब अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरानी बंदरगाहों पर रोक लगी हुई है। सऊदी अरब पर ईरान की ओर से तीन महीने से ज़्यादा समय तक कोई हमला न होने के बाद, तेहरान ने सप्ताहांत में खाड़ी देश पर एक मिसाइल दागी। मध्य पूर्व के राजनयिक ने बताया कि हमले के बाद मुनीर ने वाहिदी को चेतावनी दी कि इस तरह के व्यवहार से उनके जॉइंट वेंचर के कामकाज पर खतरा पैदा हो सकता है। इसके बाद से सऊदी अरब पर कोई मिसाइल नहीं दागी गई है।
संयुक्त अरब अमीरात पर भी ऐसे ही आरोप
समझौता कराने के पीछे मुनीर के मकसद के बारे में बताते हुए, मध्य पूर्व के खुफिया अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ अपने संबंध मजबूत करने में दिलचस्पी रखता है, खासकर ऐसे तरीके से जिससे रियाद, इस्लामाबाद पर ज़्यादा निर्भर हो जाए। हालांकि, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय और वॉशिंगटन में सऊदी दूतावास ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोधों का कोई जवाब नहीं दिया। संयुक्त अरब अमीरात पर भी ईरान के साथ इसी तरह का समझौता करने का आरोप लगा है, हालांकि अबू धाबी ने उन अपुष्ट खबरों का पुरजोर खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि उसने ईरानी हमले से बचने के बदले में रोके गए अरबों डॉलर जारी किए थे। कतर पर भी ईरान को पैसे देकर शांत करने की कोशिश करने के ऐसे ही आरोप लगे हैं, लेकिन दोहा ने भी इनका कड़ा खंडन किया है।


