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भारी तनाव के बीच दफनाए गए उस्मान हादी, इंकलाब मंच ने यूनुस सरकार को दे दिया 24 घंटे का अल्टिमेटम

भारी तनाव के बीच दफनाए गए उस्मान हादी, इंकलाब मंच ने यूनुस सरकार को दे दिया 24 घंटे का अल्टिमेटम

संक्षेप:

बांग्लादेश में इंकलाब मंच के प्रवक्ता उस्मान हादी को राजकीय सम्मान के साथ दफना दिया गया है। वहीं इंकलाब मंच ने यूनुस सरकार को 24 घंटे का अल्टिमेटम दिया है और कहा है कि हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो प्रदर्शन तेज हो जाएंगे।

Dec 21, 2025 10:54 am ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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बांग्लादेश की राजधानी ढाका में प्रमुख युवा नेता और 'इंकलाब मंच' के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी को शनिवार को राष्ट्रीय कवि काजी नजरूल इस्लाम की कब्र के बगल में दफनाया गया। हादी की पार्टी ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम जारी कर उनकी (हादी की) हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी की दिशा में "स्पष्ट प्रगति" की मांग की। इससे पहले, ढाका में कड़ी सुरक्षा के बीच हादी के जनाजे की नमाज अदा की गई, जिसके लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे।

अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस अपनी सलाहकार परिषद के सदस्यों और सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमां के साथ माणिक मिया एवेन्यू स्थित संसद भवन परिसर के ‘साउथ प्लाजा’ में 'इंकलाब मंच' के प्रवक्ता हादी (32) के जनाजे की नमाज में शामिल हुए। यूनुस ने जनाजे की नमाज से पहले संक्षिप्त बयान दिया। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), जमात-ए-इस्लामी और छात्रों के नेतृत्व वाली नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के नेताओं ने भी जनाजे की नमाज में हिस्सा लिया।

हादी पिछले साल छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध-प्रदर्शनों में शामिल प्रमुख नेताओं में से एक थे। इन विरोध-प्रदर्शनों की वजह से तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। वह 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव में उम्मीदवार थे। नकाबपोश बंदूकधारियों ने 12 दिसंबर को मध्य ढाका के विजयनगर इलाके में हादी के सिर में उस समय गोली मार दी थी, जब वह अपना चुनाव प्रचार शुरू कर रहे थे। बाद में सिंगापुर में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

हादी की मौत के बाद देश में अशांति फैल गई है। उनकी मौत के बाद बांग्लादेश में एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया था। हादी की पार्टी के सदस्य सचिव अब्दुल्ला अल जबीर ने शाहबाग में आयोजित एक विरोध रैली के मंच से कहा, "अगर सरकार कल शाम 5:15 बजे तक शरीफ उस्मान हादी के हत्यारों की गिरफ्तारी के संबंध में जवाब नहीं देती है, तो हम अपना विरोध-प्रदर्शन फिर से शुरू कर देंगे।"

लगभग तीन घंटे के प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों ने शाहबाग खाली कर दिया, जिसके बाद आसपास के इलाकों में यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो गया टेलीविजन चैनल पर प्रसारित दृश्यों में देखा जा सकता है कि हादी के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद सरकारी सुह्रावर्दी अस्पताल से लाए जाने के बाद जनाजे की नमाज अदा की गई।

हादी के बड़े भाई अबू बकर ने जनाजे की नमाज अदा करवाई और फिर शव की अंत्येष्टि के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ढाका विश्वविद्यालय परिसर लाया गया एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "केवल चुनिंदा लोगों को ही अंतिम संस्कार में शामिल की अनुमति दी गई।" पुलिस ने हजारों लोगों को जनाजे की नमाज में हिस्सा लेने की इजाजत दी थी। नमाज से पहले लोगों ने "दिल्ली या ढाका-ढाका, ढाका" और "भाई हादी का खून जाया नहीं जाने दिया जाएगा" जैसे भारत-विरोधी नारे लगाए।

गुरुवार को यूनुस द्वारा हादी की मौत की पुष्टि करने के बाद ढाका और कई अन्य प्रमुख शहरों में हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए। देश के विभिन्न हिस्सों में हमले और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं, जिनमें चटगांव में सहायक भारतीय उच्चायुक्त के आवास पर पथराव, प्रमुख समाचार पत्रों डेली स्टार और प्रोथोम आलो के कार्यालयों पर हमले तथा बंगबंधु मेमोरियल म्यूजियम में तोड़फोड़ शामिल है।

मयमनसिंह शहर में ईशनिंदा के आरोप में एक हिंदू व्यक्ति की पीटकर हत्या कर दी गई और उसके शव को जला दिया गया। मृतक की पहचान 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास के रूप में हुई है, जो शहर में एक कारखाने में काम करता था। राजधानी में नये सिरे से अशांति फैलने के बीच, जब हादी का शव सिंगापुर से ढाका लाया गया, तो अंतरिम सरकार ने शुक्रवार को नागरिकों से "अराजक तत्वों" द्वारा की जा रही हिंसा का विरोध करने की अपील की। पुलिस ने बताया कि हादी का शव ढाका लाए जाने के कुछ ही समय बाद कथित दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने राजधानी में वामपंथी झुकाव वाले उदिची शिल्पीगोष्ठी के मुख्य कार्यालय में आग लगा दी।

Ankit Ojha

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Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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