Explainer: एक लाख गुरिल्ला फाइटर्स... कौन है बलूच आर्मी और क्यों डर रहा पाकिस्तान?

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बलूचिस्तान में अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। संगठन ने महज आठ दिनों में 22 हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का दावा किया है…

Baloch Army
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी

पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाली खबर सामने आई है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तान के सबसे अशांत प्रांतों में से एक बलूचिस्तान में अपने अभियान को एक बार फिर तेज कर दिया है। पिछले कुछ समय में संगठन की गतिविधियों का दायरा केवल दूरदराज के इलाकों में हमलों तक सीमित नहीं रहा, लेकिन अब सैन्य प्रतिष्ठानों, पुलिस ठिकानों, सुरक्षा काफिलों, रेलवे और संचार ढांचे तक फैलता दिखाई दे रहा है। संगठन की ओर से दावा किया गया है कि आठ दिनों के भीतर 22 हमले किए गए हैं। दावे के अनुसार, इन हमलों में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई।

बीएलए का कहना है कि उसका संघर्ष पाकिस्तान से बलूचिस्तान की 'आजादी' हासिल करने तक जारी रहेगा। दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बल BLA को एक प्रतिबंधित अलगाववादी आतंकवादी संगठन मानते हैं और उसके खिलाफ लगातार सैन्य अभियान चला रहे हैं। दावे और प्रतिदावे के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर BLA की ताकत कितनी है, उसके पास किस तरह की सैन्य क्षमता है और पिछले कुछ वर्षों में बलूचिस्तान में हिंसा इतनी तेजी से क्यों बढ़ी है?

बलूचिस्तान में ऐक्शन में बीएलए

हाल के दिनों में बीएलएल पाकिस्तानी सेना के खिलाफ ताबड़तोड़ ऐक्शन ले रही है। बीएलए ने हालिया अभियान के तहत बलूचिस्तान के कई जिलों में हमले किए जाने का दावा किया गया है। संगठन के मुताबिक, कलात और सोराब में IED के जरिए किए गए हमलों में 20 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए। इसके अलावा चगाई, खारन और पंजगुर में पुलिस तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया। संगठन ने नुश्की, तुर्बत और क्वेटा में हुई हिंसक घटनाओं की भी जिम्मेदारी ली।

बीएलए के दावों में केवल सुरक्षा बल ही निशाने पर नहीं रहे। संगठन ने चगाई में वाणिज्यिक वाहनों पर हमले और रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने का भी दावा किया है। अगर इन दावों को व्यापक संदर्भ में देखा जाए तो BLA की रणनीति में सुरक्षा ढांचे के साथ-साथ परिवहन और संचार व्यवस्था को बाधित करना भी महत्वपूर्ण हिस्सा नजर आता है। हालांकि, इन हमलों में मारे गए लोगों और नुकसान से जुड़े BLA के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

क्या है बीएलए?

अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि बीएलएल है क्या? दरअसल, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी BLA एक बलूच अलगाववादी सशस्त्र संगठन है। इसका मुख्य लक्ष्य पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र को स्वतंत्र कराना है। संगठन लंबे समय से पाकिस्तानी सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठानों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष करता रहा है। यहां आपको बता दें कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा लेकिन आबादी के लिहाज से सबसे कम घना वाला प्रांत है। यहां प्राकृतिक गैस, खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की बड़ी मात्रा है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर लंबे समय से आर्थिक असमानता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संसाधनों पर नियंत्रण और सुरक्षा अभियानों को लेकर असंतोष की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन्हीं मुद्दों को बलूच राष्ट्रवादी और अलगाववादी संगठन अपने आंदोलन के आधार के रूप में पेश करते हैं।

एक लाख फाइटर्स का दावा

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, बलूच नेता मीर यार बलूच ने दावा किया कि BLA और उससे जुड़े बलूच सशस्त्र ढांचे में करीब एक लाख सक्रिय सदस्य हैं। उन्होंने संगठन को गुरिल्ला युद्ध के साथ-साथ सड़क और शहरी इलाकों में लड़ने की क्षमता रखने वाला युद्ध-प्रशिक्षित बल बताया है। उनका दावा है कि संगठन को जमीन पर व्यापक समर्थन हासिल है और वह बलूचिस्तान के कई इलाकों में प्रभाव रखता है। हालांकि एक लाख सक्रिय लड़ाकों या सदस्यों का दावा स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

गुरिल्ला युद्ध से लेकर शहरी हमलों तक

बता दें कि बीएलए की रणनीति में गुरिल्ला युद्ध महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पहाड़ी और दुर्गम इलाकों का फायदा उठाकर छोटे हथियारबंद समूह सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हैं और इसके बाद इलाके से निकल जाते हैं। इस तरह की रणनीति में कम संख्या में लड़ाके भी बड़ी सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती पैदा कर सकते हैं। आईईडी का इस्तेमाल, सड़क किनारे विस्फोट, सुरक्षा काफिलों पर हमले और दूरदराज की चौकियों को निशाना बनाना इसी रणनीति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में बीएलए की गतिविधियों में एक और बदलाव देखने को मिला है। संगठन ने बड़े और समन्वित हमलों की क्षमता दिखाने की कोशिश की है। इनमें एक साथ कई इलाकों में हमले करना, पुलिस और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला करना शामिल है।

कहां से आते हैं हथियार?

मीर यार बलूच के मुताबिक, बीएलए के पास मौजूद कई हथियार पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ के दौरान हासिल किए गए हैं। उनका दावा है कि संगठन सुरक्षा चौकियों पर हमले कर हथियार और सैन्य उपकरण कब्जे में लेता है। हालांकि, बीएलए के हथियारों के पूरे नेटवर्क और आपूर्ति सोर्स को लेकर अधिक जानकारी नहीं मिल सकी है।

बलूचिस्तान में क्यों बढ़ी हिंसा?

बलूचिस्तान में हिंसा कोई नई घटना नहीं है। पाकिस्तान के इस प्रांत में अलगाववादी आंदोलनों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष कई वर्षों से चला आ रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में हमलों की संख्या और उनकी प्रकृति में उल्लेखनीय बदलाव आया है। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में बलूचिस्तान में कम से कम 254 आतंकवादी हमले दर्ज किए गए। इन घटनाओं में 1026 लोगों की मौत हुई। यह संख्या 2024 की तुलना में करीब 26 फीसदी अधिक बताई गई। वहीं, BLA ने 2025 के दौरान 521 हमले करने का दावा किया। संगठन के अनुसार, इन हमलों में 1060 से अधिक पाकिस्तानी सैन्यकर्मी मारे गए और 556 से अधिक घायल हुए।

BLA के हमलों का बदलता पैटर्न

  • सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमले
  • IED और सड़क किनारे विस्फोट
  • सैन्य और पुलिस चौकियों पर हमले
  • सुरक्षा काफिलों को निशाना बनाना
  • रेलवे ट्रैक और परिवहन ढांचे को नुकसान पहुंचाना
  • संचार टावरों पर हमले
  • महत्वपूर्ण सरकारी और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले
  • बड़े पैमाने पर समन्वित हमले
  • कुछ मामलों में आत्मघाती हमले

नहीं थम रहा हिंसा का सिलसिला

30 और 31 जनवरी को BLA ने बलूचिस्तान के कई जिलों में एक साथ 12 समन्वित हमले किए। इन हमलों में क्वेटा समेत कई इलाकों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई। बताया गया कि सैन्य चौकियों, पुलिस स्टेशनों, बैंकों, हाई-सिक्योरिटी जेल, स्कूल और बाजार जैसे स्थानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती हमलों में करीब 50 लोगों की मौत हुई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने लगभग 40 घंटे तक जवाबी अभियान चलाया। पाकिस्तान ने दावा किया कि इस कार्रवाई में 145 BLA लड़ाके मारे गए। साल 2026 में भी बलूचिस्तान में हिंसा की कई घटनाएं दर्ज की गईं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, BLA और अन्य सशस्त्र समूहों से जुड़ी घटनाओं में सुरक्षा बलों, लड़ाकों और आम नागरिकों की बड़ी संख्या में मौतें हुईं।

निशाने पर चीन-पाकिस्तान परियोजनाएं

बलूचिस्तान पाकिस्तान के लिए केवल राजनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है। यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC का भी अहम हिस्सा है। ग्वादर बंदरगाह और इससे जुड़ी परियोजनाएं चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल हैं। बलूच अलगाववादी संगठन लंबे समय से इन परियोजनाओं का विरोध करते रहे हैं। बीएलए का आरोप है कि इन परियोजनाओं से बलूचिस्तान के संसाधनों का फायदा स्थानीय लोगों की बजाय बाहरी शक्तियों को मिलता है। इसी वजह से चीन से जुड़े नागरिकों और परियोजनाओं पर भी हमले हुए हैं।

85 फीसदी इलाके पर कब्जे का दावा

अगर बीएलए के हाल के बयानों गौर किया जाए तो उसका दावा है कि बलूचिस्तान के करीब 85 फीसदी क्षेत्र पर 'नियंत्रण' यानी कब्जा होने का दावा किया है। संगठन ने यहां तक कहा है कि उसने स्वतंत्र बलूचिस्तान के लिए राष्ट्रीय प्रतीक विकसित किए हैं। बीएलए के मुताबिक, एक राष्ट्रीय गान 'मा चुकेन बलूचानी', राष्ट्रीय ध्वज और कथित मुद्रा 'बलूची फालुस' पेश की गई है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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