
ट्रंप को गिफ्ट में मिला नोबेल तो कमेटी ने दिखाया आईना, कहा- मालिक बदल सकता है, लेकिन...
मचाडो ने डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल दे दिया। इस पर कमेटी ने आईना दिखाते हुए कहा कि इसे रद्द नहीं किया जा सकता, न ही बांटा जा सकता है, और न ही दूसरों को ट्रांसफर किया जा सकता है। मेडल के मालिक बदल सकते हैं, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का खिताब नहीं बदल सकता।
नोबेल शांति पुरस्कार (2025) से सम्मानित मारिया कोरिना मचाडो ने अपना प्रतिष्ठित पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गिफ्ट कर दिया। इस पर नोबेल पीस सेंटर ने ट्रंप को आईना दिखाया और कहा कि एक मेडल के मालिक बदल सकते हैं, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का खिताब नहीं बदल सकता। कमेटी ने कहा है कि इसे दूसरे को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है।
मचाडो द्वारा अपना नोबेल पुरस्कार ट्रंप को भेंट किए जाने के बाद नोबेल पीस सेंटर ने एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें कहा, ''नोबेल शांति पुरस्कार मेडल- इसका डायमीटर 6.6 सेंटिमीटर है, वजन 196 ग्राम है और यह सोने का बना है। इसके एक तरफ अल्फ्रेड नोबेल की तस्वीर है और दूसरी तरफ, भाईचारे के प्रतीक के तौर पर तीन आदमी एक-दूसरे के कंधों पर हाथ रखे हुए हैं। यह डिजाइन 120 सालों से नहीं बदला है।''
नोबेल सेंटर ने आगे कहा, ''क्या आप जानते हैं कि कुछ नोबेल शांति पुरस्कार मेडल अवॉर्ड मिलने के बाद आगे दिए गए हैं? एक मशहूर मामला दिमित्री मुराटोव के मेडल का है, जिसे यूक्रेन युद्ध के शरणार्थियों की मदद के लिए 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा में नीलाम किया गया था। और नोबेल शांति केंद्र में जो मेडल दिखाया गया है, वह असल में उधार लिया गया है और मूल रूप से यह नॉर्वे के पहले शांति पुरस्कार विजेता क्रिश्चियन लुस लांगे का था।''
सेंटर ने अपने पोस्ट में आगे कहा, ''लेकिन एक सच वैसा ही रहता है। जैसा कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी कहती है- एक बार जब नोबेल पुरस्कार की घोषणा हो जाती है, तो इसे रद्द नहीं किया जा सकता, न ही बांटा जा सकता है, और न ही दूसरों को ट्रांसफर किया जा सकता है। यह फैसला आखिरी होता है और हमेशा के लिए मान्य होता है। एक मेडल के मालिक बदल सकते हैं, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का खिताब नहीं बदल सकता।''
ट्रंप से मुलाकात में मचाडो ने भेंट किया पुरस्कार
राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को मचाडो से मुलाकात के बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आज वेनेजुएला की मारिया कोरिना मचाडो से मिलना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात थी। वह एक अद्भुत महिला हैं जो बहुत कुछ झेल चुकी हैं। मारिया ने मेरे द्वारा किए गए कार्यों के लिए मुझे अपना नोबेल शांति पुरस्कार भेंट किया। आपसी सम्मान का कितना अद्भुत भाव है। धन्यवाद मारिया। नोबेल संस्थान के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि हालांकि एक व्यक्तिगत उपहार के रूप में पदक किसी और को दिया जा सकता है, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का आधिकारिक खिताब स्थायी रूप से मूल प्राप्तकर्ता के पास ही रहता है। यह पुरस्कार स्वयं में अपरिवर्तनीय है।

लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी को मीडिया में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।
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