छह मुस्लिम देशों पर इतना क्यों मेहरबान हुए डोनाल्ड ट्रंप, उनके जहाजों पर लागू नहीं होगी नाकेबंदी
अमेरिका ने छह मुस्लिम देशों पर दरियादिली दिखाई है और कहा है कि नाकाबंदी के दौरान इन देशों के जहाजों की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा और वे बेरोक-टोक होर्मुज समुद्री मार्ग से आ-जा सकेंगे।

भारतीय समयानुसार सोमवार शाम साढ़े सात बजे होर्मुज समुद्री मार्ग पर अमेरिका की सैन्य नाकाबंदी शुरू होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सख्त रुख अपनाते हुए सोमवार को चेतावनी दी है कि अगर कोई भी जहाज अमेरिकी घेराबंदी के करीब आने की कोशिश करेगा, तो उसे तुरंत क्रूरता के साथ नष्ट कर दिया जाएगा। सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में राष्ट्रपति ने कहा कि नाकाबंदी का उल्लंघन करने वाले जहाजों के खिलाफ उसी मारक प्रणाली का उपयोग किया जाएगा, जो समुद्र में ड्रग तस्करों के खिलाफ इस्तेमाल की जाती है। उन्होंने दावा किया कि उनकी कड़ी नीतियों के कारण समुद्र के रास्ते अमेरिका में आने वाली 98.2 प्रतिशत नशीली दवाओं की सप्लाई पहले ही रुक चुकी है।
ईरानी नौसेना की वर्तमान स्थिति पर टिप्पणी करते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की मुख्य नौसेना अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा, "ईरान की नौसेना समुद्र की गहराई में सो रही है, उसके 158 जहाज पूरी तरह से तबाह कर दिए गए हैं।" उन्होंने आगे बताया कि केवल कुछ छोटे 'फास्ट अटैक जहाजों' को ही छोड़ा गया है क्योंकि उन्हें अमेरिकी सेना के लिए बड़ा खतरा नहीं माना गया था।
रोजाना 130 से 150 जहाज गुजरते थे
पहले से ही होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की घेरेबंदी से पूरी दुनिया की तेल और गैस सप्लाई बाधित हुई है और अब ट्रंप के इस कदम से इस इलाके में जहाजों की आवाजाही एकदम थम जा सकती है। बता दें कि ईरान जंग शुरू होने से पहले इस समुद्री मार्ग से रोजाना 130 से 150 जहाज गुजरते थे जो अब 45 दिनों के युद्ध और उसके बाद की समयावधि में मात्र 245 जहाज गुजरे हैं। बीबीसी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी भी होर्मुज स्ट्रेट में करीब 800 जहाज फंसे हुए हैं।
छह मुस्लिम देशों पर दरियादिली क्यों?
इस बीच, अमेरिका ने छह मुस्लिम देशों पर दरियादिली दिखाई है और कहा है कि नाकाबंदी के दौरान इन देशों के जहाजों की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा और वे बेरोक-टोक होर्मुज समुद्री मार्ग से आ-जा सकेंगे। जिन देशों को ये छूट दी गई है, उनमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इराक, कुवैत, करत और बहरीन हैं। दरअसल, खाड़ी देशों के ये देश अमेरिका के मित्र देश हैं और इनके यहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं। 40 दिनों के ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान ईरानी सेना ने इन देशों को कई बार निशाना बनाया है।
लड़ाई होर्मुज के वर्चस्व पर आ टिकी
लिहाजा, अब ईरान-अमेरिका की लड़ाई होर्मुज के वर्चस्व पर आ टिकी है। अमेरिका ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा बिछा गए समुद्री माइन्स को हटाएगा और उस पर अपना कब्जा जमाएगा। इस बीच इज़रायल ने भी अपनी सैन्य तैयारी तेज कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेन गुरियन एयरपोर्ट पर अमेरिकी KC-135 रिफ्यूलिंग विमान तैनात किए गए हैं। अमेरिकी सैन्य बेड़े USS अब्राहम लिंकन को ईरान की तरफ बढ़ते देखा गया है। हालांकि, ईरानी सैन्य बलों ने दावा किया है कि उसकी चेतावनी के बाद अमेरिकी जंगी बेड़ा पीछे हट गया है।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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