न्यूजीलैंड में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया होगा बैन, संसद में बिल पेश
न्यूजीलैंड की सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को ऑनलाइन उत्पीड़न, लत लगाने वाले एल्गोरिदम और मेंटल हेल्थ पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से बचाना है।

न्यूजीलैंड सरकार ने देश में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के मकसद से 'ऑनलाइन सेफ्टी बिल' (Online Safety Bill) पेश किया है। न्यूजीलैंड की सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को ऑनलाइन उत्पीड़न, लत लगाने वाले एल्गोरिदम और मेंटल हेल्थ पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से बचाना है।
क्या हैं विधेयक के मुख्य प्रावधान?
तकनीकी कंपनियों पर भारी जुर्माना: नियम न मानने वाली मेटा (Meta), टिकटॉक (TikTok), स्नैपचैट (Snapchat) जैसी बड़ी कंपनियों पर उनके ग्लोबल रिवेन्यू का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
एज वेरिफिकेशन के तरीके: प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स की उम्र 16 साल से ज्यादा होने की जांच के लिए डिजिटल आईडी, फेशियल एज एस्टीमेशन, मौजूदा अकाउंट डेटा और आधिकारिक दस्तावेजों का उपयोग करना होगा।
बच्चों या अभिभावकों पर कोई पेनल्टी नहीं: शिक्षा मंत्री एरिका स्टैनफोर्ड ने स्पष्ट किया कि कानून का पालन कराने की पूरी कानूनी जिम्मेदारी कंपनियों की होगी, बच्चों या उनके माता-पिता पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।
प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा, "हम न्यूजीलैंड के बच्चों की एक पूरी पीढ़ी को हो रहे नुकसान को स्वीकार नहीं कर सकते। 13 से 17 साल के हर तीन में से एक बच्चा रोजाना कम से कम 5 घंटे सोशल मीडिया पर बिता रहा है, जिससे उनका पारिवारिक जीवन, पढ़ाई और नींद प्रभावित हो रही है।"
संसद में पारित होना चुनौतीपूर्ण
इस विधेयक को कानून बनने के लिए राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री लक्सन की गठबंधन सरकार के दो प्रमुख साझेदार- 'एक्ट' (ACT) पार्टी और 'न्यूजीलैंड फर्स्ट' (NZ First)- इस बिल के विरोध में हैं। न्यूजीलैंड फर्स्ट का तर्क है कि बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने की जिम्मेदारी अभिभावकों की है।
मुख्य विपक्षी दल लेबर पार्टी ने सत्यापन और गोपनीयता से जुड़े कई सवाल उठाए हैं और अभी तक अपना अंतिम समर्थन तय नहीं किया है।
किन-किन देशों में लागू है ऐसा कानून?
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बना जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया पर पाबंदी का कानून लागू हुआ, और अब फ्रांस, यूके, इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्राजील, UAE सहित कई देशों ने या तो ऐसे कानून पारित कर दिए हैं या गंभीर प्रस्ताव आगे बढ़ाए हैं।
इंडोनेशिया: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए 8 हाई-रिस्क प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट डीएक्टिवेशन; एज वैरिफिकेशन और पैरेंटल कंट्रोल अनिवार्य किया गया है। यह कानून 28 मार्च 2026 से लागू है।
ब्राजील: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नाबालिग अकाउंट को कानूनी अभिभावक से लिंक करना अनिवार्य है। अकाउंट ब्लॉक नहीं किया जाएगा, लेकिन गार्जियन-लिंकिंग जरूरी है। यह कानून 17 मार्च 2026 से लागू है।
मलेशिया: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए लाइसेंस्ड प्लेटफॉर्म्स पर 16 से कम उम्र के लिए अकाउंट बनाना बैन; MyKad/पासपोर्ट/डिजिटल ID से वेरिफिकेशन जरूरी; नियम तोड़ने पर 2.5 मिलियन डॉलर तक का भारी जुर्माना भी लगेगा। यह नियमज 1 जून 2026 से लागू है।
फ्रांस: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नए अकाउंट बनाने पर रोक (1 सितंबर 2026 से); मौजूदा अकाउंट्स को 1 जनवरी 2027 तक एज वैरिफिकेशन या डीएक्टिवेट करना होगा; पैरेंटल सहमति की कोई छूट नहीं। कानून 21 जुलाई 2026 को पारित हुआ, लेकिन पर संवैधानिक परिषद ने 14 अगस्त 2026 को इसे अभिव्यक्ति की आजादी के हवाले से ब्लॉक कर दिया। सरकार अब नया ड्राफ्ट तैयार कर रही है।


