'बटर चिकन सुनामी आ जाएगी', भारत पर न्यूजीलैंड के मंत्री के बिगड़े बोल; ट्रेड डील का भी विरोध
न्यूजीलैंड के मंत्री शेन जोन्स ने भारत के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को 'बटर चिकन सुनामी' बताकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। जानिए इस नस्लभेदी बयान पर क्यों मचा है बवाल और क्या है इस डील की सच्चाई।

न्यूजीलैंड के एक वरिष्ठ मंत्री ने भारत के साथ होने वाले प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर एक बेहद विवादित टिप्पणी की है। उन्होंने इस समझौते की तुलना 'बटर चिकन सुनामी' से की है, जिसके बाद न्यूजीलैंड की राजनीति और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय में भारी आक्रोश है।
क्या है प्रस्तावित समझौता?
न्यूजीलैंड की सरकार अगले सप्ताह नई दिल्ली में भारत के साथ एक महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर करने की तैयारी में है। न्यूजीलैंड सरकार इस समझौते को 'पीढ़ी में एक बार होने वाला' अवसर मान रही है। इसका मुख्य उद्देश्य न्यूजीलैंड के व्यवसायों को दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश (भारत) के विशाल घरेलू बाजार तक पहुंच दिलाना है।
'बटर चिकन सुनामी' वाला विवादित बयान
इस पूरे विवाद की जड़ न्यूजीलैंड की सत्ताधारी गठबंधन में शामिल सहयोगी पार्टी NZ First (न्यूजीलैंड फर्स्ट) के उपनेता और क्षेत्रीय विकास मंत्री शेन जोन्स का एक बयान है। सोमवार को 'रियालिटी चेक रेडियो' पर बोलते हुए शेन जोन्स ने कहा कि उनकी पार्टी इस समझौते को 'कभी स्वीकार नहीं करेगी।' उन्होंने बेहद भड़काऊ लहजे में कहा- मुझे परवाह नहीं है कि हमारी कितनी आलोचना होती है, लेकिन मैं न्यूजीलैंड में आने वाली 'बटर चिकन सुनामी' से कभी सहमत नहीं होने वाला।
सहयोगी पार्टी ने क्यों वापस लिया समर्थन?
दक्षिणपंथी और लोकलुभावन नीतियों वाली पार्टी 'NZ First' ने इस समझौते से अपना समर्थन वापस ले लिया है। इसके पीछे उन्होंने दो मुख्य कारण बताए हैं। पार्टी को डर है कि इस डील के बाद न्यूजीलैंड की सीमाएं हजारों भारतीय नागरिकों के लिए खुल जाएंगी। अधिकारियों के मुताबिक, इस समझौते के तहत 20,000 से अधिक भारतीय प्रवासी न्यूजीलैंड में प्रवेश कर सकते हैं।
समझौते के तहत न्यूजीलैंड को अगले 15 वर्षों में भारत में 34 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर (लगभग 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का भारी-भरकम निवेश करना होगा, जिसे लेकर पार्टी चिंतित है।
बयान पर तीखी प्रतिक्रिया और विरोध
मंत्री के इस बयान को सीधे तौर पर नस्लभेदी माना जा रहा है और इसकी चौतरफा निंदा हो रही है। ऑकलैंड इंडियन एसोसिएशन की अध्यक्ष शांति पटेल ने इसे हर किसी के लिए बेहद चिंताजनक बताया। न्यूजीलैंड की विपक्षी लेबर पार्टी की सांसद प्रियंका राधाकृष्णन ने इसे सरासर नस्लवाद करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं और राजनेताओं को इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
प्रधानमंत्री का रुख
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने अपनी ही सरकार के मंत्री के इस बयान से किनारा करते हुए इसे गैर-मददगार बताया है। फिलहाल सहयोगी पार्टी (NZ First) के समर्थन वापस लेने के कारण सरकार के सामने एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। आने वाले महीनों में जब इस समझौते से जुड़ा कानून संसद में पेश किया जाएगा, तो सरकार को इसे पास कराने के लिए मुख्य विपक्षी दल लेबर पार्टी के समर्थन की आवश्यकता होगी। फिलहाल लेबर पार्टी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे इस बिल के पक्ष में वोट करेंगे या नहीं, क्योंकि वे भी भारत में किए जाने वाले भारी-भरकम निवेश की शर्तों को लेकर समान चिंताएं जता रहे हैं।
'बटर चिकन सुनामी' से क्या मतलब?
इस विवाद में 'बटर चिकन सुनामी' एक प्रतीकात्मक और नस्लभेदी टिप्पणी है। बटर चिकन दुनिया भर में भारत की सबसे मशहूर डिश में से एक है। मंत्री ने यहां 'बटर चिकन' शब्द का इस्तेमाल एक स्टीरियोटाइप के रूप में किया है, जो सीधे तौर पर 'भारतीय लोगों' या 'भारतीय संस्कृति' की ओर इशारा करता है। जब मंत्री शेन जोन्स ने कहा कि वह न्यूजीलैंड में आने वाली बटर चिकन सुनामी से कभी सहमत नहीं होंगे, तो उनका सीधा मतलब यह था कि वह न्यूजीलैंड में आने वाले हजारों भारतीय प्रवासियों की भीड़ का विरोध कर रहे हैं।
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