
गाजा में शांति के लिए बनाए जा रहे ट्रंप के 'पीस बोर्ड' से नेतन्याहू नाराज, क्या बताई वजह?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा पीस बोर्ड की घोषणा के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस पर नाराजगी जाहिर की है। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से कहा गया कि इसे घोषित करने से पहले उनसे कोई सलाह नहीं ली गई है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा और इजरायल के बीच शांति के लिए शांति समझौते के दूसरे चरण में जाने के लिए पीस बोर्ड की स्थापना का ऐलान किया है। हालांकि, इस बोर्ड के सदस्यों को लेकर अब इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने आपत्ति जताई है। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से कहा गया है कि बोर्ड की यह संरचना उसकी नीति के विपरीत है और इसे गठित करने से पहले इजरायल से किसी प्रकार की राय नहीं ली गई है।
नेतन्याहू के कार्यालय ने फेसबुक पर किए एक पोस्ट में कहा, "पीस बोर्ड के अधीन गाजा के कार्यकारी बोर्ड की संरचना के संबंध में जो घोषणा की गई है, वह इजरायल की नीति के विपरीत है। इस मामले में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने विदेश मंत्री से अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क करने के लिए कहा है।"
गौरतलब है कि शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ने गाजा पीस बोर्ड में शामिल सदस्यों के नामों की घोषणा की गई थी। इस बोर्ड की अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। उनके अलावा इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, राष्ट्रपति ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के साथ-साथ राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर और सलाहकार रॉबर्ट गैब्रियल शामिल हैं। जमीनी प्रतिनिधित्व के लिए, बोर्ड में संयुक्त राष्ट्र के पूर्व मध्य पूर्व दूत निकोले म्लादेनोव शामिल हैं, जो गाजा के उच्च प्रतिनिधि के रूप में कार्य करेंगे। इसके अतिरिक्त, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा को भी शांति बोर्ड में नियुक्त किया गया है।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प ने विभिन्न विश्व नेताओं को शांति बोर्ड के "संस्थापक सदस्य" बनने के लिए आमंत्रित करते हुए पत्र भेजे, जिसमें उन्होंने कहा कि यह "वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए एक साहसिक नए दृष्टिकोण" को अपनाएगा। यह घोषणा गाजा में अमेरिका की मध्यस्थता से शुरू हुई शांति योजना के दूसरे चरण के शुभारंभ के बाद की गई।
ट्रंप भले ही शांति बोर्ड को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हों, लेकिन जमीनी हालात अभी भी ज्यादा बदले नहीं है। इजरायल और हमास दोनों ने ही एक-दूसरे के ऊपर संघर्ष विराम को तोड़ने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका द्वारा लागू करवाए गए संघर्ष विराम से लेकर अब तक इस क्षेत्र में करीब 450 फिलिस्तीनी नागरिक और तीन इजरायली सैनिक मारे गए हैं।

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Upendra Thapakलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




