के पी ओली को गिरफ्तार करके फंस गए पीएम बालेन? नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस

Upendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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PM Balendra Shah: नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार करने के मामले में बालेन सरकार को नोटिस भेजा है। कोर्ट ने सरकार को तीन दिन का समय देते हुए पूर्व पीएम की गिरफ्तारी पर स्पष्टीकरण की मांग की है।

के पी ओली को गिरफ्तार करके फंस गए पीएम बालेन? नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस

Nepal: नेपाल में नई सरकार बनने के बाद भी लगातार अशांति की स्थिति बनी हुई है। पर्वतीय देश में पूर्व पीएम ओली की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थक जगह-जगह पर प्रदर्शन कर रहे हैं और उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं। इसी बीच नेपाल के सुप्रीम कोर्ट बालेन सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया और ओली की गिरफ्तारी पर स्पष्टीकरण मांगा। इस जवाब के लिए कोर्ट ने बालेन सरकार को तीन दिन का समय दिया है।

नेपाली सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश ओली की पत्नी राधिका शाक्य द्वारा दायर याचिका के जवाब में दिया। शाक्य ने अपनी याचिका में सरकार की कार्रवाई को अवैध बताते हुए ओली की तुरंत रिहाई की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने जस्टिस मेघराज पोखरेल की एकल पीठ ने इस पूर्व पीएम को तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया। इससे पहले, स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे केपी सरमा ओली ने काठमांडू जिला न्यायलय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी दी। यहां पर कोर्ट ने उनकी हिरासत को पांच दिन और बढ़ा दिया।

गौरतलब है कि जेनजी आंदोलन के दौरान हुई 76 लोगों की मौत के मामले में नेपाल में गौरी बहादुर कार्की जांच आयोग का गठन किया गया था। इस आयोग ने दोनों नेताओं की भूमिका को लेकर सवाल उठाए थे। नवगठित बालेन शाह सरकार ने अपनी पहली मंत्रिमंडल बैठक के दौरान ही इस आयोग को लागू कर दिया। इसके बाद दोनों नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इस रिपोर्ट में ओली और लेखक ने दावा किया है कि उन्हें आंदोलन के दौरान हो रही हिंसा की जानकारी नहीं थी। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि ओली और लेखक के बयान, जिसमें उन्होंने हिंसा की जानकारी न होने का दावा किया, जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है और यह “आपराधिक लापरवाही” के अंतर्गत आता है। ऐसे में उन पर लापरवाही बरतने के आरोप में केस चलाया जाना चाहिए।

बता दें, नेपाल में सितंबर 2025 में सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर बैन लगाए जाने के बाद आंदोलन शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया और देश की बाकी परेशानियों को भी अपने साथ समाहित कर दिया। इस आंदोलन के दौरान युवाओं ने सरकारी कार्यालयों में आग लगा दी और नेपाली संसद को भी फूंक दिया। इसके बाद ओली सरकार गिर गई। बाद में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज सुशीला कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर देश की बागड़ोर संभाली और हाल ही में संपन्न हुए चुनावों तक अपनी भूमिका अदा की।

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लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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