
नेपाल के मधेश में बवाल, जनकपुरधाम के CM ऑफिस में तोड़फोड़; जानें क्यों
संक्षेप: नेपाल के मधेश प्रांत में सोमवार सुबह बड़ा राजनीतिक विवाद भड़क उठा। सीपीएन-यूएमएल के संसदीय दल नेता सरोज कुमार यादव को मुख्यमंत्री बनाए जाने के तुरंत बाद जनकपुरधाम के मुख्यमंत्री कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना हो गई।
नेपाल के मधेश प्रांत में सोमवार सुबह बड़ा राजनीतिक विवाद भड़क उठा। सीपीएन-यूएमएल के संसदीय दल नेता सरोज कुमार यादव को मुख्यमंत्री बनाए जाने के तुरंत बाद जनकपुरधाम के मुख्यमंत्री कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना हो गई। मधेश प्रांत की राजनीति में भूचाल तब आया जब प्रांत प्रमुख सुमित्रा देवी भंडारी ने सोमवार को बर्दीबास के एक होटल से सीपीएन-यूएमएल नेता सरोज कुमार यादव को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई। केपी शर्मा ओली के प्रधानमंत्री काल में नियुक्त भंडारी ने नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को नजरअंदाज कर यह कदम उठाया। सभी राजनीतिक दलों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। भारत की सीमा से सटे इस संवेदनशील क्षेत्र में मधेशी समुदाय की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक मांगों के बीच यह घटना तनाव को और बढ़ा रही है।

जानकारी के मुताबिक, प्रांतीय विधानसभा के कुछ सदस्यों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर मुख्यमंत्री के कक्ष में घुसपैठ की और फर्नीचर व संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कार्यालय में लगे राष्ट्रीय ध्वज को भी फेंक दिया। यह घटना प्रांत प्रमुख सुमित्रा सुबेदी भंडारी द्वारा संविधान के अनुच्छेद 168 (3) के तहत महोत्तरी जिले के बर्दीबास में एक होटल से यादव को मुख्यमंत्री नियुक्त करने के कुछ ही मिनटों बाद हुआ। इस फैसले ने पूरे प्रांत में व्यापक असंतोष पैदा कर दिया है। घटना के बाद सरकारी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
पूर्व मुख्यमंत्री जितेंद्र सोनल ( रविवार को ही इस्तीफा दिया था) ने भंडारी पर मधेश के लोगों के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यादव को गुप्त तरीके से नियुक्त किया गया, जबकि वे काठमांडू में इलाज के बहाने थे। नेपाली कांग्रेस, जो यूएमएल गठबंधन से अलग होकर माओवादी केंद्र और मधेशी पार्टियों के साथ नई सरकार गठन की दिशा में बढ़ रही थी, ने भी गहरी नाराजगी जताई। कांग्रेस महासचिव विश्व प्रकाश शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे संघीय राजनीति के लिए 'त्रासदी' करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह राजनीति-विरोधी रवैया संघवाद के प्रति जनता की निराशा को बढ़ाएगा। अनुच्छेद 168 (2) के तहत सरकार बनाई जा सकती थी, फिर भी यह तमाशा रचा गया। हम न्यायपालिका से उम्मीद करते हैं कि वह इसे ठीक करेगी।
वहीं, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) ने भी प्रांत प्रमुख के इस विवादास्पद फैसले का पुरजोर विरोध किया। पार्टी अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद लिंगडेन ने इसे पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन बताया। सोशल मीडिया पर जारी बयान में लिंगडेन ने मधेश सरकार में शामिल सभी आरपीपी सदस्यों को तत्काल पद छोड़ने का आदेश दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर कार्रवाई की जाएगी। पार्टी का फोकस अब नई प्रांतीय सरकार में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने पर है।

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