शव तो मिले, लेकिन अब पहचान मुश्किल! नेपाल में मुर्दाघर भी हुए फुल
Nepal Floods Bodies Identification: दांग के तुलसीपुर से अपने लापता बेटे की तलाश में आए दामोदर अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों के पास सैकड़ों शव पहुंचे हैं, लेकिन उनकी तस्वीरें डिजिटल स्क्रीन पर दिखाने प्रक्रिया बेहद धीमी है।

त्रिशूली, मर्स्यांगदी और नारायणी नदियों में आई भयंकर बाढ़ के बाद मध्य नेपाल में मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। पानी के प्रचंड बहाव में बहकर दर्जनों किलोमीटर दूर पहुंचे शवों की बरामदगी के बाद अब प्रशासन के सामने एक नया और बड़ा संकट खड़ा हो गया है- शवों की पहचान, उनका सुरक्षित रखरखाव और अंतिम संस्कार।
अस्थायी शवगृहों में उमड़ रहे परिजन
चितवन जिले के भरतपुर में बिजली कार्यालय रोड के पास एक अस्थायी बॉडी-मैनेजमेंट सेंटर बनाया गया है। यहां शुक्रवार सुबह से ही लापता लोगों के परिजन तस्वीरों और मोबाइल फोनों में तस्वीरें लिए अपनों की तलाश में भटक रहे हैं।
दांग के तुलसीपुर से अपने लापता बेटे की तलाश में आए दामोदर अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों के पास सैकड़ों शव पहुंचे हैं, लेकिन उनकी तस्वीरें डिजिटल स्क्रीन पर दिखाने प्रक्रिया बेहद धीमी है।
चितवन में अकेले 233 शव बरामद किए गए थे, लेकिन शुक्रवार दोपहर तक केवल 82 शवों के ही रिकॉर्ड और तस्वीरें परिजनों को दिखाने के लिए तैयार की जा सकी थीं।
सड़ते शव और महामारी का संकट
शवों की संख्या इतनी ज्यादा है कि अस्पतालों के कोल्ड स्टोरेज पूरी तरह भर चुके हैं। कम्युनिटी हॉल, पुलिस परिसरों और अस्थायी भवनों को शवगृह में बदला गया है, लेकिन उचित रेफ्रिजरेशन की कमी और गर्मी के कारण शव तेजी से सड़ रहे हैं।
चितवन के मुख्य जिला अधिकारी (CDO) गणेश अर्याल के अनुसार, ड्राय आइस और एयर कंडीशनर लगाकर तापमान नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सप्लाई कम पड़ रही है।
भरतपुर सेंटर पर तैनात वॉलंटियर्स का कहना है कि बदबू के कारण आसपास रुकना मुश्किल हो गया है। अगर 48 घंटे के भीतर स्थिति नहीं सुधरी, तो महामारी या गंभीर जनस्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है।
मलबे और पत्थरों से टकराकर आने के कारण कई शव इस हालत में नहीं हैं कि चेहरे से पहचान हो सके। प्रशासन अब टैटू, गहनों, कपड़ों, फिंगरप्रिंट और DNA के जरिए पहचान करने में जुटा है।
पोखरा और नवलपरासी में क्षमता से ज्यादा शव
पोखरा स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान और आसपास के अस्पतालों में कुल कोल्ड स्टोरेज क्षमता केवल 88 शवों की है, जबकि वहां अलग-अलग जिलों से लाकर 102 से ज्यादा शव रखे गए हैं।
मजबूरी में पुलिस और अस्पताल प्रशासन एक-एक फ्रीजर चैंबर में दो-दो बच्चों के शव या आंशिक अवशेष रखने को मजबूर हैं।
नवलपरासी पूर्व में 154 शव पहुंचे हैं, लेकिन वहां बुनियादी पोस्टमार्टम करने के लिए केवल 6 मेडिकल कर्मी हैं और कोई भी सर्टिफाइट फॉरेंसिक पैथोलॉजिस्ट नहीं है। काठमांडू से आपातकालीन टीमें बुलाई गई हैं।
DNA कलेक्शन के बाद सामूहिक दफनाने की तैयारी
अधिकारियों के अनुसार, पोखरा और आसपास के साधारण कोल्ड स्टोरेज (2°C से 6°C) में शवों को केवल 10 से 14 दिनों तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है। सब-जीरो फ्रीजिंग तकनीक पूरे गंडकी प्रांत में उपलब्ध नहीं है।
पहचान न हो पाने वाले सभी शवों का फिंगरप्रिंट, फोटो और DNA सैंपल लिया जा रहा है। DNA सैंपल को जेनेटिक सीक्वेंसिंग के लिए काठमांडू स्थित प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा, जिसकी रिपोर्ट आने में 5 से 6 महीने लग सकते हैं।
समय सीमा बीतने के बाद शवों को एक यूनिक कोड नंबर (ID) देकर सुरक्षित रूप से दफना दिया जाएगा, ताकि भविष्य में DNA मैच होने पर परिजन अपने रिश्तेदार की कब्र का पता लगा सकें।


