घर बह गया, आंगन मिट गया… फिर भी वहीं बैठा है कुत्ता; मालिकों के लौटने का इंतजार

By Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, त्रिशूली

नेपाल बाढ़ में चार घर बह गए, लेकिन एक काला-सफेद कुत्ता अब भी अपने पुराने घर की जगह पर बैठा है। JCB और राहतकर्मियों के बावजूद वह वहां से नहीं हट रहा। मालिकों का पता नहीं है और लोग उसके पास खाना-पानी रख रहे हैं।

मालिकों के बिना उजड़े घर में अकेला रह गया कुत्ता, बाढ़ के बाद भी नहीं छोड़ा अपना ठिकाना
मालिकों के बिना उजड़े घर में अकेला रह गया कुत्ता, बाढ़ के बाद भी नहीं छोड़ा अपना ठिकाना

नेपाल के त्रिशूली बाजार में बाढ़ की तबाही के बाद एक कुत्ते की तस्वीर लोगों को भावुक कर रही है। चार घरों की कतार पूरी तरह बह गई, लेकिन काले-सफेद रंग का यह कुत्ता अब भी उसी जगह बैठा है। राहतकर्मी उसे हटाने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन वह अपनी जगह छोड़ने को तैयार नहीं है।

नेपाल के त्रिशूली बाजार में पिछले सप्ताह आई बाढ़ अपने पीछे तबाही के निशान छोड़ गई। चार घरों की पूरी कतार बह गई। जहां कभी घर और आंगन हुआ करते थे, वहां अब कीचड़, मलबा और ढांचों के बिखरे अवशेष दिखाई दे रहे हैं। इसी मलबे के बीच एक काला-सफेद कुत्ता अब भी उसी जगह बैठा है।

उसके गले में कॉलर अभी भी लगा हुआ है। आसपास आधा दर्जन जेसीबी मशीनें और राहतकर्मी लकड़ी, गाद और मलबा हटाने में जुटे हैं, लेकिन भारी मशीनों के शोर का भी इस कुत्ते पर कोई असर नहीं पड़ रहा।

जिस दरवाजे पर घर था, वहीं लौट आता है

राहतकर्मी बिक्रम थापा के मुताबिक, शुरुआत में लोगों ने उसे बिस्किट देकर और अलग-अलग नामों से बुलाकर वहां से हटाने की कोशिश की। लेकिन कुत्ता उनकी तरफ देखता तक नहीं। वह बार-बार उस जगह लौट आता है, जहां चार घरों में से एक का मुख्य दरवाजा हुआ करता था। थापा ने बताया कि कुत्ता इस जगह को छोड़ना ही नहीं चाहता।

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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मलबा हटाने के काम में लगे सुनील तमांग ने बताया कि जेसीबी की तेज आवाज और खुदाई करने वाली मशीनों के बेहद करीब पहुंचने के बावजूद कुत्ता अपनी जगह से नहीं हटा। वह कीचड़ भरे गड्ढे में चुपचाप बैठा रहता है और उस सीमा को पार नहीं करता, जहां कभी उसका आंगन हुआ करता था।

कभी-कभार किसी वाहन के आने या मलबे के बीच से लोगों के गुजरने की आवाज पर वह सिर उठाता है। लेकिन उनके वहां से गुजरते ही दोबारा उसी जगह जाकर बैठ जाता है।

किसका था कुत्ता, किसी को नहीं पता

बाढ़ में कुत्ते का घर भी बाकी पूरे इलाके के साथ बह गया। घटनास्थल पर मौजूद कोई भी व्यक्ति यह नहीं बता सका कि उसका मालिक कौन था या वह चार घरों में से किस घर में रहता था।

हालांकि, वह बार-बार उसी पुराने दरवाजे की जगह पर लौटता है और उस जगह से आगे नहीं जाता, जहां कभी घर का आंगन हुआ करता था। इससे लोगों को लगता है कि वह जगह उसका इलाका रही होगी।

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अब लोग पास में रख रहे खाना-पानी

कम्युनिटी एनिमल रेस्क्यू वॉलंटियर रीता गुरंग ने बताया कि काफी कोशिशों के बाद राहतकर्मियों ने उसे वहां से हटाने की कोशिश बंद कर दी। अब उसके पास सूखा खाना और पानी रखा जा रहा है। गुरंग के मुताबिक, वे हर कुछ घंटे में उसके पास खाना रखते हैं। हालांकि, कुत्ता सड़क पर शोर कम होने के बाद ही उसमें से थोड़ा खाता है।

बाढ़ से विस्थापित हुईं माया अधिकारी ने बताया कि इलाके के ज्यादातर कुत्ते बाढ़ आने के बाद ऊंची जगहों की ओर चले गए थे, लेकिन यह कुत्ता उजड़े हुए घरों के आसपास ही रुका रहा।

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घर खोने वाले लोग भी रख रहे हैं उसका ख्याल

स्थानीय दुकानदार दिनेश बस्याल ने बताया कि जिन लोगों ने खुद अपने घर खो दिए हैं, वे भी अब इस कुत्ते का ध्यान रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग समझते हैं कि उसके साथ क्या हुआ है। कुत्ते को यह समझ नहीं आ रहा कि सभी लोग अचानक कहां चले गए। वह बस इतना जानता है कि जब तक वे लौटकर नहीं आते, उसे अपनी जगह नहीं छोड़नी है।

लेखक के बारे में

Amit Kumar

डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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