नेपाल त्रासदी: 265 लोगों को सुरंग में ही छोड़ भाग निकला था चीनी अधिकारी; अब भारत कर रहा मदद

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नेपाल की बाढ़ के बाद अब भी 4 हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। शव ना मिलने पर या पहचान ना होने पर परिजन प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर रहे हैं। वहीं पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि चीनी अधिकारी  265 लोगों को सुरंग में ही छोड़कर भाग निकला था।

नेपाल त्रासदी: 265 लोगों को सुरंग में ही छोड़ भाग निकला था चीनी अधिकारी; अब भारत कर रहा मदद
Residents pull a newly installed zipline to help people commute across the Trishuli river in the aftermath of flash floods at Bidur in Nepal's Nuwakot district, Nepal, Wednesday, Sept. 2, 2026. (AP Photo/Rajesh Kumar Singh)

नेपाल में भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाकों में लगातार हो रही बारिश से फिर से बाढ़ आने का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से शव मिल किए जा रहे हैं, जिससे मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर गुरुवार को 1252 हो गई। लापता लोगों की अनुमानित संख्या अभी भी 5,083 है। त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले बहुत सारे लोग अब भी लापता हैं।

265 लोगों को सुरंग में छोड़कर भाग निकला चीनी अधिकारी

चीन की कंपनी के एक अधिकारी ने 265 लोगों को सुरंग के अंदर छोड़ दिया और नेपाल में बाढ़ आने से पहले भाग गया। एक कर्मी ने आरोप लगाया कि त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना में उनके चीनी सुपरवाइजर ने 265 कर्मचारियों को सुरंग के अंदर छोड़ दिया और खुद वहां से भाग गया। कर्मचारी राज छेत्री ने कहा, सुरंग में मौजूद मजदूरों ने एक तेज आवाज सुनी। इसके बाद उन्होंने सुपरवाइजर से सुरंग से बाहर निकलने की अनुमति मांगी।

भारत का सुरंग बचाव दल चिलिमे पावर हाउस में बचाव अभियान चलाने के लिए नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रहा है। भारतीय दूत ने बृहस्पतिवार को भारतीय टनल बचाव दल के आधार शिविर स्याब्रूबेसी का दौरा किया और कहा कि स्थितियां कठिन होने के बावजूद भारतीय और नेपाली दल 'बिना डरे' अपना काम जारी रखेंगे। दूत ने बताया कि भारतीय और नेपाली दलों ने विशेष उपकरणों का उपयोग करके सुरंग के अंदर 100 मीटर तक का जायजा ले लिया है और वे सुरंग में और आगे बढ़ने के लिए भारी उपकरण लाने की योजना बना रहे हैं।

चीन की और हिमनद टूटने की चेतावनी

चीन के एक वरिष्ठ जलवायु अधिकारी ने चेतावनी दी कि तिब्बती पठार पर मौजूद हिमनद के और अस्थिर होने की आशंका है। इससे तिब्बत-नेपाल सीमा पर हाल में आई अचानक बाढ़ जैसी और आपदाएं आ सकती है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन होने के कारण आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई, जिससे सैकड़ों लोगों की मौत हो गई। चीन सरकार की आधिकारिक संस्था राष्ट्रीय जलवायु केंद्र के उप निदेशक गाओ रोंग ने कहा कि पिछले 60 साल में तिब्बती पठार पर हिमनद क्षेत्र लगभग 24 प्रतिशत सिकुड़ गया और करीब 7,000 छोटे हिमनद पूरी तरह खत्म हो गए।

नदियों का बढ़ रहा जलस्तर

जल एवं मौसम विज्ञान विभाग के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग की तकनीशियन सरस्वती बिष्ट ने बताया कि भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश हो रही है। इसके कारण भोटेकोशी व त्रिशूली नदियों के साथ रसुवा-नुवाकोट जिलों से होकर बहने वाली छोटी नदियों व जलधाराओं का जलस्तर बढ़ने की आशंका है।

इधर, राहत सामग्री वितरण में पारदर्शिता व व्यवस्था बनाए रखने के लिए नेपाल सरकार ने सिंगल विंडो पॉलिसी लागू की है। अब कोई भी निजी संस्था, सामाजिक संगठन बिना अग्रिम अनुमति नेपाल में सीधे राहत सामग्री न तो ले जा सकता है, न भेज सकता है। अब कस्टम शुल्क चुकाने के बाद ही राहत सामग्री सीमा पर ले जाने की मंजूरी मिलेगी।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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