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नेपाल में बीते हफ्ते आई विनाशकारी बाढ़ में एक हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। वहीं इस त्रासदी में दो हजार से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। वहीं नेपाल में आई इस त्रासदी के बीच त्रिशूली-3ए हाइड्रोपावर स्टेशन को लेकर एक मजूदर ने बड़ा दावा किया है। भयानक बाढ़ से बचने वाले एक मजदूर राज छेत्री का आरोप है कि जब बाढ़ का पानी बढ़ने लगा और टनल के अंदर कीचड़ भर गया, तब मजदूरों ने एक चीनी सुपरवाइजर से बाहर निकलने में मदद मांगी। लेकिन आरोप है कि सुपरवाइजर खुद ही वहां से निकल गया। राज छेत्री के मुताबिक, इस घटना के बाद सैकड़ों मजदूर टनल के अंदर फंस गए और उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
बता दें कि, त्रिशूली-3ए हाइड्रोपावर स्टेशन में इंजीनियरिंग से जुड़ा काम चीन की कंपनी पावर चाइना कॉर्पोरेशन कर रही है। कंपनी के कर्मचारी और अधिकारी वहां चल रहे काम की निगरानी कर रहे हैं। त्रिशूली-3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में अभी भी कम से कम 40 लोगों का कोई पता नहीं चल पाया है। वहीं, बाढ़ से प्रभावित दूसरे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले 900 से ज्यादा मजदूर भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल कीचड़ और मलबे से बंद टनल के अंदर फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस आपदा से बचने वाले मजदूर राज छेत्री ने बताया कि जब अचानक बाढ़ आई, उस समय वह और कई दूसरे मजदूर टनल नंबर 3 के अंदर काम कर रहे थे। राज ने आरोप लगाया कि अचानक तेज आवाज सुनाई दी और उन्हें खतरे का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद एक चीनी सुपरवाइजर से बाहर निकलने की अनुमति मांगी। राज के मुताबिक, सुपरवाइजर ने कहा कि वह पहले जाकर स्थिति देखेगा। राज ने आरोप लगाया, “मैंने चीनी सुपरवाइजर से कहा कि हमें बाहर जाने दें। उसने कहा, ‘मैं जाकर देखता हूं।’ इसके बाद वह वहां से भाग गया।”
खराब सड़क और दूसरी सुविधाओं की कमी, खराब मौसम और जमीन के नीचे बनी टनल तक पहुंचने में आ रही मुश्किलों की वजह से बचाव अभियान काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। त्रिशूली-3ए प्रोजेक्ट में बचाव दल कीचड़ और मलबे में दबी टनल तक पहुंचने के लिए भारी मशीनों और खास तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। बाढ़ से बचने वाले मजदूर राज छेत्री ने बताया कि अचानक पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव टनल के अंदर घुस गया। इसकी चपेट में कई मजदूर, गाड़ियां और उनका सामान आ गया।
राज ने बताया कि वह किसी तरह टनल के मुहाने की तरफ भागे और अपनी जान बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने कहा, “हममें से चार लोग किसी तरह भागकर बाहर निकल गए, लेकिन दो लोग अभी भी लापता हैं।” राज का दावा है कि बाढ़ आने के समय टनल नंबर 3 में करीब 265 मजदूर काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि टनल के अंदर कुछ लोगों के शव भी दिखाई दे रहे थे। वहीं, जिंदा बचे मजदूर मदद के लिए चीख-पुकार कर रहे थे।
राज छेत्री ने बताया कि टनल के अंदर का मंजर बेहद डरावना था। उन्होंने कहा, “टनल के अंदर कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले मजदूरों के शव पड़े थे। कई मजदूर अभी भी जिंदा थे। हमें अंदर से ‘बचाओ, बचाओ’ की आवाजें सुनाई दे रही थीं।” राज के मुताबिक, उस वक्त हालात इतने खराब थे कि मजदूरों के सामने एक बेहद मुश्किल स्थिति थी। एक तरफ दूसरे मजदूरों को बचाने की कोशिश करनी थी और दूसरी तरफ अपनी जान बचाना भी जरूरी था। ऐसे में हर पल जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष जैसा था।
बाढ़ से किसी तरह बच निकलने के बाद राज छेत्री और दूसरे मजदूरों के लिए मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। उन्होंने बताया कि बाढ़ से निकलने के बाद शुरुआती कुछ दिन उन्होंने जंगल में एक पेड़ के नीचे सोकर बिताए। राज के मुताबिक, उनके पास मोबाइल फोन नहीं था और इलाके में मोबाइल नेटवर्क भी बंद था। इसकी वजह से वे अपने परिवार वालों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे और उन्हें यह बताना भी संभव नहीं था कि वे सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि मोबाइल नेटवर्क दोबारा शुरू होने के बाद ही वह अपने परिवार से बात कर पाए और उन्हें अपनी सलामती की खबर दी। राज ने बाढ़ के खतरे को लेकर चीन पर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया, “चीनी सरकार ने सही काम नहीं किया। उन्हें पहले से बाढ़ और भूस्खलन के खतरे की जानकारी थी।”
रजत कुमार, बीते आठ सालों से पत्रकारिता कर रहा हूं। मैंने, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की है और भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। अपने आठ साल के पत्रकारिता करियर में मैंने, प्रभात खबर, इंडिया टुडे और मनीकंट्रोल के डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ काम किया है। फिलहाल, लाइव हिंदुस्तान के साथ अपने पत्रकारिता के सफर को आगे बढ़ा रहा हूं।
आम लोगों की कहानियां लिखना और उन्हें सुनाना बेहद पंसद है। बीते आठ सालों से ऐसी कई कहानियों को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश जारी है। पत्रकारिता के इस सफर में दो लोकसभा चुनाव और पांच से अधिक विधानसभा चुनाव को कवर करने का भी मौका मिला है। चुनावी रिपोर्टिंग के साथ-साथ जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की पत्रकाारिता भी जारी है। राजनीति, क्रिकेट, सिनेमा और इतिहास पसंदीदा विषय रहे हैं। इस विषयों पर लिखना- पढ़ना जारी है।
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