Hindi Newsविदेश न्यूज़Nepal currency will be printed in China neighboring country is distancing itself from India what is the reason?
चीन में छपेगी नेपाल की करेंसी, पड़ोसी देश का भारत से किनारा, क्या वजह?

चीन में छपेगी नेपाल की करेंसी, पड़ोसी देश का भारत से किनारा, क्या वजह?

संक्षेप:

नेपाल ने अपनी नई करेंसी छापने का टेंडर चीन की एक कंपनी को दिया है। अब नेपाल की पूरी करेंसी की छपाई चीन में होगी। नेपाल इससे पहले तक भारतीय कंपनियों से अपनी करेंसी की छपाई करवाता था।

Nov 13, 2025 06:27 pm ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

भारत का पड़ोसी देश नेपाल अब अपनी करेंसी नोटों को चीन की कंपनी से छपवाने जा रहा है। इससे पहले तक काठमांडू का यह काम भारत में किया जाता था। भारत के अधिकांश पड़ोसी देशों की तरह ही नेपाल भी अब अपनी करेंसी प्रिंटिंग के लिए चीन पर निर्भर होगा। आपको बता दें नेपाल राष्ट्रीय बैंक ने 1000 रुपए के 43 करोड़ नोटों की प्रिंटिंग के लिए एक टेंडर जारी किया था। इस टेंडर को चीन की एक कंपनी ने जीत लिया है। इसके बाद नेपाली बैंक ने पिछले हफ्ते चाइना बैंकनोट प्रिटिंग एंड मीटिंग कॉर्पोरेशन को आधिकारिक रूप से टेंडर दे दिया।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

नेपाल सरकार द्वारा नोटों की प्रिटिंग के लिए भारत की जगह प्राथमिकता देने के पीछे कई कारण हैं। इसमें सबसे प्रमुख यह की चीनी कंपनी ने टेंडर के लिए जो बोली लगाई है, वह सबसे कम की थी। इसके अलावा उसने एडवांस टेक्नोलॉजी की भी पेशकश की थी। वहीं, दूसरी और नेपाल की ओली सरकार की तरफ से भारत के कुछ हिस्सों को नेपाल के नक्शे में दिखाया जा रहा था, नए छपने वाले नोटों पर यह विवादित नक्शा भी दर्शाया जाना था। ऐसे में यह नोट छापना भारत के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया था।

नेपाल ने भारत में क्यों रोका नोट छपाई का काम

नेपाल की पूर्ववर्ती ओली सरकार के नेतृत्व में नए नोटों पर विवादित नक्शों को जगह दी गई थी। इन नोटों पर लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी जैसे विवादित क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। इन राजनीतिक तनावों के कारण, भारत नोट छापने को तैयार नहीं था, जिससे नेपाल को विकल्प तलाशने पड़े। चीनी कंपनी ने न केवल अधिक किफायती और सुरक्षित मुद्रण विकल्प की पेशकश की, बल्कि आधुनिक सुरक्षा सुविधाएँ भी शामिल कीं, जिसके कारण नेपाल ने अपनी मुद्रा मुद्रण आवश्यकताओं के लिए चीन को चुना।

गौरतलब है कि नेपाली नोट 1945 से 1955 तक नासिक की प्रेस में छपती थी। बाद में दशकों बाद नेपाल ने अन्य विकल्पों को तलाशना शुरू किया। इसके बाद भी 2015 तक नेपाल की कुछ मुद्रा भारत में ही छपती रही है। 1000 के नए नोट छापने का टेंडर चीनी कंपनी के पास जाने के साथ ही अब नेपाल के सभी बैंक नोट चीन में ही छपने लगेंगे।

आपको बता दें, चीन में अपनी करेंसी छपवाने वाला नेपाल एक अकेला देश नहीं है। पिछले कुछ सालों में चीन करेंसी छापने का एक मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। दक्षिण एशिया के कई देश, जिनमें बांग्लादेश, थाईलैंड, श्रीलंका, मलेशिया, अफगानिस्तान भी अपनी करेंसी यहीं छपवाते हैं।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak
उपेन्द्र पिछले कुछ समय से लाइव हिन्दुस्तान के साथ बतौर ट्रेनी कंटेंट प्रोड्यूसर जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली (2023-24 बैच) से पूरी की है। इससे पहले भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया। मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले हैं। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों, राजनीति के साथ-साथ खेलों में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।