
चीन में छपेगी नेपाल की करेंसी, पड़ोसी देश का भारत से किनारा, क्या वजह?
नेपाल ने अपनी नई करेंसी छापने का टेंडर चीन की एक कंपनी को दिया है। अब नेपाल की पूरी करेंसी की छपाई चीन में होगी। नेपाल इससे पहले तक भारतीय कंपनियों से अपनी करेंसी की छपाई करवाता था।
भारत का पड़ोसी देश नेपाल अब अपनी करेंसी नोटों को चीन की कंपनी से छपवाने जा रहा है। इससे पहले तक काठमांडू का यह काम भारत में किया जाता था। भारत के अधिकांश पड़ोसी देशों की तरह ही नेपाल भी अब अपनी करेंसी प्रिंटिंग के लिए चीन पर निर्भर होगा। आपको बता दें नेपाल राष्ट्रीय बैंक ने 1000 रुपए के 43 करोड़ नोटों की प्रिंटिंग के लिए एक टेंडर जारी किया था। इस टेंडर को चीन की एक कंपनी ने जीत लिया है। इसके बाद नेपाली बैंक ने पिछले हफ्ते चाइना बैंकनोट प्रिटिंग एंड मीटिंग कॉर्पोरेशन को आधिकारिक रूप से टेंडर दे दिया।
नेपाल सरकार द्वारा नोटों की प्रिटिंग के लिए भारत की जगह प्राथमिकता देने के पीछे कई कारण हैं। इसमें सबसे प्रमुख यह की चीनी कंपनी ने टेंडर के लिए जो बोली लगाई है, वह सबसे कम की थी। इसके अलावा उसने एडवांस टेक्नोलॉजी की भी पेशकश की थी। वहीं, दूसरी और नेपाल की ओली सरकार की तरफ से भारत के कुछ हिस्सों को नेपाल के नक्शे में दिखाया जा रहा था, नए छपने वाले नोटों पर यह विवादित नक्शा भी दर्शाया जाना था। ऐसे में यह नोट छापना भारत के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया था।
नेपाल ने भारत में क्यों रोका नोट छपाई का काम
नेपाल की पूर्ववर्ती ओली सरकार के नेतृत्व में नए नोटों पर विवादित नक्शों को जगह दी गई थी। इन नोटों पर लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी जैसे विवादित क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। इन राजनीतिक तनावों के कारण, भारत नोट छापने को तैयार नहीं था, जिससे नेपाल को विकल्प तलाशने पड़े। चीनी कंपनी ने न केवल अधिक किफायती और सुरक्षित मुद्रण विकल्प की पेशकश की, बल्कि आधुनिक सुरक्षा सुविधाएँ भी शामिल कीं, जिसके कारण नेपाल ने अपनी मुद्रा मुद्रण आवश्यकताओं के लिए चीन को चुना।
गौरतलब है कि नेपाली नोट 1945 से 1955 तक नासिक की प्रेस में छपती थी। बाद में दशकों बाद नेपाल ने अन्य विकल्पों को तलाशना शुरू किया। इसके बाद भी 2015 तक नेपाल की कुछ मुद्रा भारत में ही छपती रही है। 1000 के नए नोट छापने का टेंडर चीनी कंपनी के पास जाने के साथ ही अब नेपाल के सभी बैंक नोट चीन में ही छपने लगेंगे।
आपको बता दें, चीन में अपनी करेंसी छपवाने वाला नेपाल एक अकेला देश नहीं है। पिछले कुछ सालों में चीन करेंसी छापने का एक मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। दक्षिण एशिया के कई देश, जिनमें बांग्लादेश, थाईलैंड, श्रीलंका, मलेशिया, अफगानिस्तान भी अपनी करेंसी यहीं छपवाते हैं।

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Upendra Thapakलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




