नासा बनाएगा इतिहास, चंद्रमा पर पहली बार आई फोन लेकर जाएंगे वैज्ञानिक; क्यों है खास

Feb 06, 2026 06:22 pm ISTDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, वॉशिंगटन
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चंद्रमा की सैर पर जाने वाले नासा वैज्ञानिकों की अगली खेप अपने साथ आई फोन लेकर जाएगी। वैज्ञानिकों की यह टीम इसी महीने आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत चंद्रमा की यात्रा पर जाएगी। इस फोन से वैज्ञानिक चंद्रमा की तस्वीरें खीचेंगे और वीडियो बनाएंगे।

नासा बनाएगा इतिहास, चंद्रमा पर पहली बार आई फोन लेकर जाएंगे वैज्ञानिक; क्यों है खास

चंद्रमा की सैर पर जाने वाले नासा वैज्ञानिकों की अगली खेप अपने साथ आई फोन लेकर जाएगी। वैज्ञानिकों की यह टीम इसी महीने आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत चंद्रमा की यात्रा पर जाएगी। इस फोन से वैज्ञानिक चंद्रमा की तस्वीरें खीचेंगे और वीडियो बनाएंगे। इस तरह चंद्रमा पर बिताए ऐतिहासिक पल, हमेशा के लिए इन वैज्ञानिकों की जिंदगी का अहम हिस्सा हो जाएंगे। वैज्ञानिकों को एप्पल फोन खुद नासा ही उपलब्ध कराएगा। इस बात की जानकारी, नासा के प्रशासक जेर्ड आईजैकमैन ने दी। एक सोशल मीडिया पोस्ट में इसाकमैन ने कहा कि हम क्रू मेंबर्स को एक खास टूल देने वाले हैं। इससे यह लोग खास लम्हों को अपने परिवार के साथ साझा कर सकेंगे। इसके अलावा तमाम प्रेरक तस्वीरों और वीडियो को दुनिया के साथ साझा कर सकेंगे।

अभी तक नहीं थी अनुमति
फिलहाल मिशन मून पर जा रहे वैज्ञानिकों को आई फोन मुहैया कराया जा रहा है। लेकिन नासा ने कहा कि आने वाले समय में अन्य डिवाइसेज को भी मान्यता दी जाएगी। बता दें कि अभी नासा के स्पेसक्राफ्ट में किसी तरह का फोन ले जाने की अनुमति नहीं थी। नासा के प्रवक्ता बेथनी स्टीवेन्स ने गुरुवार को कहा कि यह हमारे लिए पहली बार है। हालांकि कॉमर्शियल स्पेस फ्लाइट्स पर पिछले करीब एक दशक से सुरक्षित रूप से ऐसा हो रहा है। बता दें कि आईजैकमैन 2024 में कॉमर्शियल स्पेस फ्लाइट में स्मार्टफोन लेकर जा चुके हैं। उन्होंने कहाकि हमने लंबे समय से चले आ रहे प्रक्रियाओं को चुनौती दी और आधुनिक हार्डवेयर को त्वरित समयसीमा पर अंतरिक्ष उड़ान के लिए योग्य ठहराया।

बेहद दुर्लभ मामला
बता दें कि अंतरिक्ष मिशनों के दौरान कॉमर्शियल उत्पादों का इस्तेमाल होना एक दुर्लभ मामला है। यहां पर इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों के लिए परीक्षण के मानक काफी कठिन हैं। अभी तक ओमेगा की स्पीडमास्टर प्रोफेशनल घड़ी अपोलो मिशनों के दौरान इस्तेमाल की गई थी। इस तरह यह चंद्रमा पर पहनी गई पहली घड़ी बन गई। अब यह स्मिथसोनियन के नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम में प्रदर्शन के लिए रखी गई है। कोई भी इस घड़ी को करीब 7,500 डॉलर खर्च करके खरीद सकता है।

Deepak Mishra

लेखक के बारे में

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दीपक मिश्र मीडिया इंडस्ट्री में करीब 17 साल का अनुभव रखते हैं। खेल, सिनेमा और राजनीति पर प्रमुखता से काम किया है। खासतौर पर खेल की खबरों से जुनून की हद तक मोहब्बत है। 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप और 2014 में फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप प्रमुखता से कवर कर चुके हैं। फोटोग्राफी और मोबाइल वीडियो स्टोरी के साथ-साथ पॉडकास्ट में विशेष रुचि रखते हैं। दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट के साथ काम करते हुए कई वीडियो स्टोरीज पर काम किया। इसी दौरान आईपीएल पर पॉडकास्ट के साथ एक अन्य पॉडकास्ट ‘शहर का किस्सा’ भी कर चुके हैं। पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद आज अखबार के साथ पत्रकारिता की शुरुआत हुई। इसके बाद दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट और पत्रिका अखबार में काम किया है। आई नेक्स्ट की डिजिटल विंग में काम करते हुए कई नए और रोचक प्रयोग किए। लाइव हिन्दुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रहे हैं। और पढ़ें

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