बच्चों के लिए खतरा बन रहे मोबाइल, आधे से ज्यादा देशों ने स्कूलों में उपयोग पर लगाया बैन

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UNESCO की ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग टीम के अनुसार मोबाइल फोन के उपयोग की वजह से बच्चों के अंदर ध्यान की कमी, साइबर बुलिंग जैसी घटनाएं सामने आ रही है। इसके अलावा सोशल मीडिया के उपयोग की वजह से भी बच्चों के अंदर खान-पान संबंधी विकारों में वृद्धि हुई है।

बच्चों के लिए खतरा बन रहे मोबाइल, आधे से ज्यादा देशों ने स्कूलों में उपयोग पर लगाया बैन

बच्चों के दिमाग पर मोबाइल फोन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए दुनिया के आधे से ज्यादा देशों ने स्कूलों में इनके उपयोग को बैन कर दिया गया है। यूनेस्को की ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग टीम के अनुसार मोबाइल फोन के उपयोग की वजह से बच्चों के अंदर ध्यान की कमी, साइबर बुलिंग जैसी घटनाएं सामने आ रही है। इसके अलावा सोशल मीडिया के उपयोग की वजह से भी बच्चों के अंदर खान-पान संबंधी विकारों में वृद्धि हुई है। इसकी वजह से इन देशों की सरकारों ने इस पर प्रतिबंध लगाया है।

बच्चों के अंदर मोबाइल फोन के उपयोग से बढ़ती परेशानी को लेकर यह नई रिपोर्ट नहीं है। इससे पहले फेसबुक ने भी एक शोध में बताया था कि 32 फीसदी से ज्यादा किशोर लड़कियों ने इंस्टाग्राम उपयोग करने के बाद अपने शरीर को लेकर असहज भाव महसूस किया था। ऐसी ही एक रिपोर्ट सोशल मीडिया एल्गोरिदम को लेकर भी सामने आई थी, जिसमें बताया गया था कि हर 39 सेकेंड में किशोरो के सामने बॉडी इमेज से संबंधी कंटेंट आता है, जो उन्हें असहज महसूस कराता है।

यूनेस्को की ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग टीम के एक अधिकारी ने इस रिपोर्ट पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 114 शिक्षा प्रणालियों में मोबाइलों के स्कूल में उपयोग पर प्रतिबंध है। उन्होंने बताया, "हालिया वैश्विक मॉनिटरिंग से पता चलता है कि अब 114 शिक्षा प्रणालियों में स्कूलों में मोबाइल फोन पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध है, जो दुनिया के 58 प्रतिशत देशों का प्रतिनिधित्व करता है। इसका विस्तार बहुत तेजी से हुआ है। हमारी 2023 की रिपोर्ट में यह स्तर बहुत कम था, 2023 में केवल 24 फीसदी देशों ने स्कूलों में मोबाइल के उपयोग को बैन किया था। 2025 की शुरुआत तक यह बढ़कर 40 प्रतिशत हो गया, और मार्च 2026 तक यह आंकड़ा लगभग 20 प्रतिशत अंक और बढ़ गया।"

किन देशों ने लगाए प्रतिबंध?

जेम के अधिकारियों के मुताबिक, 2025 के अंत से कई देशों ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लागू किए हैं, जिससे यह रुझान लगातार बढ़ रहा है। हाल के देशों में बोलीविया, कोस्टा रिका, क्रोएशिया, जॉर्जिया, मालदीव और माल्टा शामिल हैं। इसके अलावा फ्रांस उन देशों में से एक है जहां इस पर बहस लगातार विकसित हो रही है। उसने स्कूलों में मोबाइल फोन पर शुरुआती और व्यापक रूप से चर्चित प्रतिबंधों में से एक लागू किया था, जिसमें प्राथमिक और निम्न माध्यमिक शिक्षा में इनके उपयोग पर रोक लगाई गई। फ्रांस की संसद में एक विधायी प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य स्कूलों में स्मार्टफोन उपयोग के लिए और अधिक स्पष्ट नियम बनाना है।

इन देशों के अलावा कोमोरोस, कोलंबिया, एस्टोनिया, लिथुआनिया, आइसलैंड, पेरू, इंडोनेशिया, सर्बिया, पोलैंड और फिलीपींस ऐसे देशों में शामिल हैं। यह दृष्टिकोण स्कूलों और उनके प्रमुखों को जिम्मेदारी सौंपने की दिशा में बदलाव को दर्शाता है, साथ ही फोन उपयोग को नियंत्रित करने की आवश्यकता को भी स्वीकार करता है।

अभी तक भले ही 58 फीसदी देशों में स्कूलों में मोबाइल फोन के उपयोग को प्रतिबंधित किया गया हो, लेकिन बाकी जगहों पर भी इनके उपयोग को प्रतिबंधित करने की बहस चल रही है। सरकारें राष्ट्रीय दिशा और स्कूल स्तर की स्वायत्तता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं। जिन देशों में शिक्षा प्रणाली विकेंद्रीकृत है, वहां प्रतिबंध अक्सर पहले क्षेत्रीय या स्थानीय स्तर पर लागू किए जाते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका कोई देशव्यापी प्रतिबंध नहीं है, 39 राज्यों ने कक्षा में फोन उपयोग को सीमित करने के लिए प्रतिबंध या नियम लागू किए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, “अधिकांश अन्य राज्यों ने भी फोन उपयोग को नियंत्रित करने के लिए विधेयक पेश किए हैं। ये उदाहरण दिखाते हैं कि नीति में बदलाव अक्सर स्थानीय स्तर से शुरू होकर राष्ट्रीय स्तर तक फैलता है।”

Upendra Thapak

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