रूस से तेल खरीद के लाइसेंस छूट को समाप्त करना चाहता है US, क्या भारत के लिए चिंता की बात?
भारत के लिए यह खबर अहम है क्योंकि रूसी तेल उसके कुल आयात का बड़ा हिस्सा है। 2022 के बाद से भारत ने सस्ते रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाकर अरबों डॉलर की बचत की। इससे घरेलू ईंधन कीमतें स्थिर रहीं और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रहा।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि वे रूसी तेल से संबंधित लाइसेंस वेवर को जल्द से जल्द समाप्त करना चाहते हैं। यह वेवर उन देशों को अस्थायी राहत देता है जो रूस से तेल खरीदते हैं, खासकर यूक्रेन युद्ध के कारण लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद। भारत इस वेवर पर काफी निर्भर है क्योंकि वह रूसी कच्चे तेल का प्रमुख खरीदार है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा विशेष रूप से भारत के खिलाफ नहीं है, बल्कि रूस पर यूक्रेन युद्ध के लिए लागत थोपने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिका से बातचीत में अतिरिक्त रूसी तेल खरीद न करने की प्रतिबद्धता जताई है, हालांकि मौजूदा करार पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा।
भारत के लिए यह खबर अहम है क्योंकि रूसी तेल उसके कुल आयात का बड़ा हिस्सा है। 2022 के बाद से भारत ने सस्ते रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाकर अरबों डॉलर की बचत की। इससे घरेलू ईंधन कीमतें स्थिर रहीं और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रहा। पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने से भारत ने वेवर का फायदा उठाया। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कई बार 30 दिन का अस्थायी वेवर बढ़ाया, ताकि समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदा जा सके। लेकिन अब रुबियो और ट्रंप प्रशासन इसे समाप्त करने की दिशा में बढ़ रहे हैं, जो भारत के ऊर्जा सुरक्षा को चुनौती दे सकता है।
भारत-अमेरिका संबंधों में संतुलन की कोशिश
मार्को रुबियो की टिप्पणियों से भारत-अमेरिका संबंधों में संतुलन की कोशिश दिखती है। उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही अपनी ऊर्जा स्रोतों को विविधता देने की योजना पर काम कर रहा है, जिसमें अमेरिका और वेनेजुएला जैसे देश शामिल हैं। भारत सरकार ने हमेशा जोर दिया है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित पर आधारित है, न कि किसी बाहरी दबाव पर। अगर वेवर पूरी तरह समाप्त हो जाता है तो भारतीय रिफाइनरी कंपनियां जैसे रिलायंस नई चुनौतियों का सामना करेंगी। इससे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच राजनयिक वार्ता जारी है, जिसमें रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी को वाइट हाउस आमंत्रित भी किया है।
फिलहाल रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक ऊर्जा संकट और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। भारत को अब अन्य स्रोतों जैसे मध्य पूर्व, अमेरिका और घरेलू उत्पादन पर अधिक ध्यान देना होगा। रुबियो की यह इच्छा रूस पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी नीति का हिस्सा है, लेकिन भारत जैसे विकासशील देशों की ऊर्जा जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। भविष्य में दोनों देशों के बीच और मजबूत समझौते हो सकते हैं।
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Niteesh Kumarपत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।
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