स्कूली सबक और खुद का पेशाब… म्यांमार भूकंप के 5 दिन बाद मलबे से बचाया गया शख्स; कैसे रहा जिंदा?

एएफपी
Follow us on Google News
share

  • म्यांमार में बीते सप्ताह आए भूकंप ने भारी तबाही मचाई। इस आपदा के बाद मलबे को हटाने का कार्य जारी है। हादसे के 5 दिन बाद एक शख्स को चमत्कारिक तरीके से मलबे से बाहर निकाला गया है।

Earthquake survivor Tin Maung Htwe, who was rescued after five days of being trapped under the rubble of a collapsed building, is treated by medical personnel on an outdoor bed in the compound of a hospital in Sagaing on April 2, 2025, five days after a major earthquake struck central Myanmar. The shallow 7.7-magnitude earthquake on March 28 flattened buildings across Myanmar, killing more than 2,700 people and making thousands more homeless. (Photo by Sai Aung MAIN / AFP)

बीते शुक्रवार म्यांमार में आए भीषण भूकंप में अब तक 3000 से ज्यादा लोगों की मौत होने की पुष्टि हो चुकी है। राहत और बचाव दल लगातार मलबे को साफ करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं जहां जैसे-जैसे समय बीत रहा है लोगों के जिंदा बचे रहने की उम्मीदें कम होती जा रही हैं। अब इस मलबे से एक शख्स को पांच दिन बाद जिंदा बाहर निकाला गया है। पांच दिनों तक मलबे में अपने होटल के बिस्तर के नीचे दबे रहने वाले टिन माउंग ह्टवे ने इस हादसे के भयावह अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने बताया है कि इस दौरान जिंदा रहने के लिए उन्हें अपना पेशाब पीना पड़ा।

जानकारी के मुताबिक जब देश में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया तब पेशे से शिक्षक टिन, भूकंप के केंद्र के सबसे नजदीकी इलाकों में से एक सागाइंग में एक ट्रेनिंग कार्यक्रम में मौजूद थे। 47 वर्षीय टिन ने बताया है कि जिंदा रहने के लिए उनका सबसे बड़ा सहारा स्कूल के दिनों में पढ़ाया गया सबक बना। उन्होंने बताया कि उन्हें यह बात बताई गई थी कि अगर धरती हिलने लगे तो बिस्तर के नीचे छुप जाना चाहिए।

'मैं लगातार चिल्लाता रहा'

अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा, "जैसे ही मैं बिस्तर के नीचे गया पूरा होटल ढह गया और चारों तरफ मलबा फैल गया। मुझे सोचने का मौका ही नहीं मिला। मैं बस इतना ही कह सका कि मुझे बचा लो।" उन्होंने आगे कहा, “मैं लगातार चिल्लाता रहा- मुझे बचाओ, मुझे बचाओ।”

निकल कर क्या बोलें?

टिन माउंग गेस्टहाऊस के सबसे निचली मंजिल के कमरे में थे। उन्होंने आगे बताया, "मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं नरक में हूं। मेरा शरीर बहुत गर्म हो रहा था और मुझे बस पानी की जरूरत थी। मुझे कहीं से पानी नहीं मिल रहा था। इसलिए मुझे अपने शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों से अपने शरीर की पानी की जरूरत को पूरा करना पड़ा।” टिन ने कहा, "मुझे खुशी है कि मैं अब आजाद हूं।”

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।