रमजान पर बड़ी कूटनीतिक सफलता; सऊदी की मध्यस्थता में तालिबान ने छोड़े 3 पाकिस्तानी सैनिक
रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत पर अफगानिस्तान ने एक सकारात्मक कदम उठाते हुए तीन पाकिस्तानी सैनिकों को रिहा कर दिया है। ये सैनिक अक्टूबर 2025 में अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर हुई झड़पों के दौरान पकड़े गए थे।

रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत पर अफगानिस्तान ने एक सकारात्मक कदम उठाते हुए तीन पाकिस्तानी सैनिकों को रिहा कर दिया है। ये सैनिक अक्टूबर 2025 में अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर हुई झड़पों के दौरान पकड़े गए थे। सऊदी अरब की मध्यस्थता और अनुरोध पर यह रिहाई हुई, जिसे तालिबान सरकार ने अच्छे संबंधों को बढ़ावा देने और रमजान की दया-क्षमा की भावना के रूप में वर्णित किया है। अफगानिस्तान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद और उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने इसकी पुष्टि की, तथा सैनिकों को काबुल में आए सऊदी प्रतिनिधिमंडल को सौंप दिया गया।
सोशल मीडिया एक्स पोस्ट में हमदुल्लाह फितरत कहा कि अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात की नीति के अनुसार, जो सभी देशों के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखने पर जोर देती है, और पवित्र रमजान महीने के आगमन के सम्मान में, जो ईश्वरीय दया और क्षमा का महीना है, तथा मित्रवत देश सऊदी अरब के अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए, साथ ही सोमवार को काबुल पहुंचे वार्ता दल की मेजबानी के अवसर पर 12 अक्टूबर 2025 को पाकिस्तानी पक्ष के साथ झड़पों में पकड़े गए तीन पाकिस्तानी सैनिकों को रिहा कर दिया गया और सऊदी अरब से आए सम्मानित प्रतिनिधिमंडल को सौंप दिया गया।
रमजान का पहला दिन आज
बता दें कि बुधवार को रमजान का पहला दिन मनाया जा रहा है, जिसमें मुसलमान सुबह से शाम तक रोजा रखते हैं और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। खामा प्रेस के अनुसार, तालिबान द्वारा भी रमजान की शुरुआत मनाने की उम्मीद है, जो क्षेत्रीय स्तर पर चंद्रमा दिखने की घोषणाओं और समुदायों में पहले से चल रही तैयारियों के अनुरूप है।
12 अक्तूबर क्या हुआ था?
पाकिस्तान की सेना ने 12 अक्टूबर 2025 को दावा किया था कि उसने 200 से अधिक अफगान लड़ाकों को मार गिराया, जबकि अफगानिस्तान का दावा है कि सीमा पर हुई झड़पों में उसने 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। अल जजीरा के अनुसार, अफगानिस्तान के तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने रविवार को कहा था कि 30 अन्य पाकिस्तानी सैनिक घायल हुए और उनके पास बड़ी मात्रा में पाकिस्तानी हथियार बरामद हुए।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कभी सौहार्दपूर्ण रहे संबंध अब बिगड़ चुके हैं, क्योंकि इस्लामाबाद ने काबुल पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य सशस्त्र समूहों के सदस्यों को पनाह देने का आरोप लगाया है, जो उसके खिलाफ हमले करते हैं। अल जजीरा के अनुसार, टीटीपी या पाकिस्तानी तालिबान का गठन 2007 में अफगानिस्तान पर अमेरिकी आक्रमण का समर्थन करने वाले पाकिस्तान के सीमावर्ती कबायली क्षेत्रों में सैन्य अभियानों के जवाब में किया गया था, और तब से दोनों देश आमने-सामने हैं।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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