मुस्लिम शहर जैसे लगते हैं लंदन के कुछ हिस्से, मेयर कैंडिडेट बोलीं- बुर्का पहनने वालों की...
एक पॉडकास्ट में लैला ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि एक खुले समाज में आपको अपना चेहरा ढकने की जरूरत है। अगर कोई अपना चेहरा छिपा रहा है तो यह मान लेना चाहिए कि वह ऐसा किसी आपराधिक कारण से कर रहा है।

लंदन के लिए मेयर पद की उम्मीदवार लैला कनिंघम ने बुर्के पर सुझाव देकर नए विवाद को जन्म दे दिया है। रिफॉर्म यूके की ओर से कैंडिडेट लैला ने कहा कि बुर्का पहनने वाली महिलाओं की पुलिस द्वारा रोक कर तलाशी ली जानी चाहिए। साल 2018 में होने वाले लंदन मेयर चुनाव के लिए लैला को उम्मीदवार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि खुले समाज में चेहरा ढकने की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि लंदन के कुछ हिस्से मुस्लिम शहर जैसे लगते हैं।
एक पॉडकास्ट में बात करते हुए लैला ने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि एक खुले समाज में आपको अपना चेहरा ढकने की जरूरत है। मैंने एक बुर्का पहनी हुई महिला पर केस चलाया है। अगर कोई अपना चेहरा छिपा रहा है तो यह मान लेना चाहिए कि वह ऐसा किसी आपराधिक कारण से कर रहा है।'' उन्होंने बताया कि लंदन के कुछ हिस्से मुस्लिम शहर जैसे लगते हैं और वह चेहरे को ढकने पर बैन लगाना चाहती हैं। द स्टैंडर्ड पॉडकास्ट के लिए एक इंटरव्यू में, लैला ने कहा, "अगर मैं कर पाती, तो मैं चेहरा ढकने पर बैन लगा देती, लेकिन मैं इसे स्टॉप एंड सर्च का एक कारण बनाना चाहूंगी।''
'मुस्लिम शहर नहीं है लंदन'
लैला कनिंघम ने पिछले जून में सीपीएस प्रॉसिक्यूटर के पद से इस्तीफा दे दिया था, जब उन्होंने टोरीज पार्टी छोड़कर नाइजल फराज की रिफॉर्म यूके पार्टी में शामिल होने के बाद भड़काऊ राजनीतिक बयान दिए थे। पिछले हफ्ते उन्हें 2028 के चुनावों के लिए पार्टी की लंदन मेयर उम्मीदवार के तौर पर पेश किया गया। वह इस मई में शहर भर में होने वाले चुनावों में रिफॉर्म पार्टी को पहली लंदन काउंसिल का कंट्रोल दिलाने की कोशिश का नेतृत्व भी करेंगी। इस हफ़्ते की शुरुआत में द स्टैंडर्ड को दिए एक इंटरव्यू में, कनिंघम ने कहा कि लंदन को ब्रिटिश ही रहना चाहिए और यह मुस्लिम शहर नहीं है।
'कई मुस्लिम देशों में बुर्का बैन है'
उन्होंने कहा कि वह लंदन में यहूदी-ईसाई संस्कृति और ब्रिटिश संस्कृति को और ज्यादा मनाते हुए देखना चाहेंगी, खासकर ईस्टर पर, जिसे उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे शहर में ईस्टर एग हंट के साथ मनाया जा सकता है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि बुर्का पहनने से पुलिस को रोकने और तलाशी लेने का सही कारण मिलता है, तो उन्होंने कहा, ''हां, कई मुस्लिम देशों में बुर्का बैन है। वे धार्मिक नहीं हैं। वे एक थोपी गई परंपरा का हिस्सा हैं और उनका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।''

लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी को मीडिया में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।
यूपी-बिहार की पॉलिटिक्स से लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक खबरों को कवर करने का लंबा अनुभव है। पॉलिटिकल न्यूज में ज्यादा रुचि है और पिछले एक दशक में देशभर में हुए विभिन्न विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों को भी कवर किया है। लाइव हिन्दुस्तान के लिए मदन देश-विदेश में रोजाना घटित होने वाली खबरों के साथ-साथ पॉलिटिकल खबरों का एनालिसिस, विभिन्न अहम विषयों पर एक्सप्लेनर, ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज आदि कवर करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से लेकर मिडिल ईस्ट में असली वॉर तक की इंटरनेशनल खबरों पर लिखते-पढ़ते रहते हैं। पिछले एक दशक में पत्रकारिता क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं। मदन ने लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर, मंथली अवॉर्ड्स, पॉपुलर च्वॉइस, एचटी स्टार अवॉर्ड्स समेत कई पुरस्कार जीते हैं।
और पढ़ेंलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




