‘मिशन इंपॉसिबल’ की भारी कीमत, ईरान से पायलट निकालने में अमेरिका ने लुटाया खजाना
यह मिशन न सिर्फ सटीक ढंग से अंजाम तक पहुंचाने, बल्कि इस पर खर्च हुई रकम के लिए भी चर्चा में है। इस ‘मिशन इंपॉसिबल’ पर अमेरिका ने जमकर खजाना लुटाया है। जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने इस पर 500 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं।

अमेरिकी सेना ने ईरान से अपने पायलट और एक एयरमैन को निकाल लिया है। अमेरिका का एफ-15 फाइटर जेट ईरान में क्रैश होने के बाद यह दोनों वहां फंसे हुए थे। कई दिन तक चले बचाव अभियान में आखिर इन्हें ईरान के इसफाहान प्रांत से निकाला गया। अब यह मिशन न सिर्फ सटीक ढंग से अंजाम तक पहुंचाने, बल्कि इस पर खर्च हुई रकम के लिए भी चर्चा में है। इस ‘मिशन इंपॉसिबल’ पर अमेरिका ने जमकर खजाना लुटाया है। जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने इस पर 500 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं।
सबसे चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान
अमेरिकी अधिकारियों ने इस बचाव अभियान को सबसे चुनौतीपूर्ण कॉम्बैट और रेस्क्यू मिशन बताया। असल में जहां पर अमेरिकी पायलट फंसा था, वह इलाका पहाड़ियों में स्थित है। यहां पर ईरानी सेना का बड़ा खतरा होने के चलते बचाव अभियान चलाना बहुत मुश्किल था। पायलटों को बचाने के लिए अमेरिकी ने पूरी ताकत झोंक रखी थी। इस मिशन में ए-10 थंडरबोल्ट II जेट, एमसी-130जे कमांडो II विमान, ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर और एमक्यू-9 रीपर ड्रोन सहित कई एडवांस टेक्नोलॉजी वाले मिलिट्री साधन शामिल थे। इनमें से कई तो मिशन के दौरान ही नष्ट हो गए। इस तरह से अमेरिका को काफी नुकसान उठाना पड़ा।
दिन-रात चला बचाव अभियान
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना की सील कमांडो टीम-6 के कर्मियों ने संबंधित अधिकारी को बचा लिया। इसमें कहा गया कि इस अभियान में सैकड़ों विशेष अभियान सैनिक और अन्य सैन्यकर्मी शामिल थे, जो दुश्मन के इलाके के काफी अंदर काम कर रहे थे। बता दें कि ईरान ने अमेरिका के लड़ाकू विमान 'एफ-15ई स्ट्राइक ईगल' को शुक्रवार को देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में मार गिराया गया था। विमान के चालक दल के दो सदस्य बाहर निकलने में सफल रहे थे। इनमें से एक पायलट को तुरंत बचा लिया गया था। जबकि दूसरे पायलट की तलाश में अमेरिका ने ईरान में उतरकर दिन-रात एक कर दिया।
दरार में छुपा था पायलट
रिपोर्ट के मुताबिक एफ-15ई से बाहर निकलने के बाद, पायलट एक पहाड़ की दरार में छुप गया। वह 24 घंटे से ज्यादा समय तक ईरानी सेना से बचता रहा। इस दौरान एक बार तो वह पहाड़ की 7,000 फुट ऊंची चोटी पर भी चढ़ गया। शुरुआत में अमेरिका को उसकी जगह के बारे में पता नहीं था, लेकिन सीआईए ने उसके छिपने की जगह ढूंढ़ ली। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि अमेरिकी विमानों ने ईरानी सेना के काफिलों को उस जगह से दूर रखने के लिए बम गिराए और गोलीबारी की। अमेरिकी सेना के एक अधिकारी ने कहाकि अमेरिकी कमांडो ने भी ईरानी सेना को बचाव स्थल से दूर रखने के लिए गोलियां चलाईं, क्योंकि ईरानी सैनिक संबंधित अधिकारी की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन वे ईरानियों के साथ सीधी गोलीबारी में नहीं उलझे।
युद्ध का आर्थिक असर
एक तरफ अमेरिकी सेना युद्ध पर करोड़ों डॉलर खर्च कर रही है। वहीं, दूसरी तरफ अमेरिकी नागरिक युद्ध के आर्थिक असर को महसूस कर रहे हैं। अमेजन ने अपनी ई-कॉमर्स डिलीवरी पर फ्यूल सरचार्ज घोषित कर दिया है। वहीं, कुछ एयरलाइनों ने बढ़ती ईंधन लागत को संतुलित करने के लिए चेक-इन सामानों के शुल्क बढ़ा दिए हैं।
लेखक के बारे में
Deepak Mishraमूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।
आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।
यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।
जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।
अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।
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