एक हाथ में 'ब्रह्मोस', दूसरे में 'पाकिस्तानी' जेट! आखिर क्या खिचड़ी पका रहा है सबसे बड़ा मुस्लिम देश?
ब्रह्मोस मिसाइल भारत की सैन्य रणनीति के केंद्र में उस समय रही, जब पिछले वर्ष मई में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा था। ऑपरेशन सिंदूर के तहत, 9-10 मई की रात भारतीय वायुसेना ने Su-30MKI लड़ाकू विमानों से लगभग 15 ब्रह्मोस मिसाइलें दागीं।
भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग के महत्वपूर्ण दौर में एक नया विवाद उभर आया है। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री साफरी समसुद्दीन की पाकिस्तान यात्रा और वहां पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू से मुलाकात के बाद खुलासा हुआ कि इंडोनेशिया पाकिस्तान से फाइटर जेट्स की खरीद पर विचार कर रहा है। यह खबर ऐसे समय आई है जब भारत और इंडोनेशिया ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की करीब 450 मिलियन डॉलर की डील को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच चुके हैं। खबरों की मानें तो इंडोनेशिया पाकिस्तान से JF-17 ‘थंडर’ मल्टी-रोल फाइटर जेट्स की खरीद पर विचार कर रहा है।
40 तक JF-17 लड़ाकू विमान देने का प्रस्ताव
बैठक के दौरान पाकिस्तान ने कथित तौर पर इंडोनेशिया को 40 तक JF-17 लड़ाकू विमान देने का प्रस्ताव रखा। JF-17 जेट पाकिस्तान और चीन के संयुक्त सहयोग से विकसित किया गया विमान है। भारत के लिए यह चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि वह इंडोनेशिया को दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता के खिलाफ एक अहम रणनीतिक साझेदार मानता है। ऐसे में जकार्ता का इस्लामाबाद और चीन से जुड़े रक्षा प्लेटफॉर्म्स के साथ बढ़ता सैन्य सहयोग नई दिल्ली में असहजता पैदा कर रहा है। इंडोनेशिया जनसंख्या के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ मुस्लिम देश है।
भारत की चिंता तब और बढ़ गई, जब यह भी सामने आया कि इंडोनेशिया पाकिस्तानी निर्मित कॉम्बैट ड्रोन खरीदने पर भी विचार कर रहा है। इसी क्रम में बांग्लादेश वायुसेना द्वारा भी पाकिस्तान के साथ गहराते रक्षा संबंधों के तहत JF-17 विमानों की खरीद पर बातचीत की खबरें हैं। रणनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह पाकिस्तान द्वारा चीन समर्थित हथियार प्रणालियों को क्षेत्र में आक्रामक रूप से बेचने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
भारत ने पाक पर दागीं 15 ब्रह्मोस मिसाइलें
ब्रह्मोस मिसाइल भारत की सैन्य रणनीति के केंद्र में उस समय रही, जब पिछले वर्ष मई में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा था। ऑपरेशन सिंदूर के तहत, 9-10 मई की रात भारतीय वायुसेना ने Su-30MKI लड़ाकू विमानों से लगभग 15 ब्रह्मोस मिसाइलें दागीं। इन हमलों में पाकिस्तान के 12 प्रमुख एयरबेस में से 11 को गंभीर नुकसान पहुंचा, जिनमें चकलाला (नूर खान), रफीकी, सरगोधा, जैकोबाबाद, भोलारी और स्कार्दू शामिल थे।
300 किलोमीटर रेंज और मैक-3 से अधिक गति वाली ये रामजेट संचालित ‘फायर एंड फॉरगेट’ मिसाइलें पाकिस्तानी, खासकर चीनी मूल की वायु रक्षा प्रणालियों को चकमा देने में सफल रहीं। हमलों में रडार स्टेशन, कमांड सेंटर, गोला-बारूद भंडार और रनवे नष्ट हो गए, जिससे पाकिस्तान की जवाबी हवाई कार्रवाई की योजनाएं निष्प्रभावी हो गईं। बाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी स्वीकार किया था कि हमले उनकी नियोजित जवाबी कार्रवाई से ठीक पहले हुए और उनकी सेना को पूरी तरह चौंका दिया।
अब पाकिस्तान के JF-17 विमानों पर विचार
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इंडोनेशिया द्वारा पाकिस्तान के JF-17 विमानों पर विचार करना, भारत-इंडोनेशिया के बीच विश्वास को कमजोर कर सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को जटिल बना सकता है। खास तौर पर तब, जब दोनों देश एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भरोसे पर आधारित ब्रह्मोस जैसी रणनीतिक रक्षा डील को अंतिम रूप देने के करीब हों। गौरतलब है कि पिछले नवंबर में हुई तीसरी भारत-इंडोनेशिया रक्षा मंत्रियों की वार्ता में, भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री के बीच ब्रह्मोस डील को लेकर अहम प्रगति हुई थी। इस समझौते के तहत इंडोनेशिया, फिलीपींस के बाद ब्रह्मोस मिसाइल हासिल करने वाला दूसरा दक्षिण-पूर्व एशियाई देश बन सकता है। भारत और इंडोनेशिया के बीच बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है और अब केवल रूस की औपचारिक मंजूरी बाकी है, क्योंकि ब्रह्मोस एयरोस्पेस में रूस की 49.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह संयुक्त उद्यम भारत की DRDO और रूस की एनपीओ माशिनोस्ट्रोएनिया के बीच है, जिसमें भारत की नियंत्रक हिस्सेदारी 50.5 प्रतिशत है।
इस डील पर चर्चा उस समय भी हुई थी, जब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो वर्ष 2025 के गणतंत्र दिवस पर भारत के मुख्य अतिथि के रूप में नई दिल्ली आए थे। इंडोनेशिया की ब्रह्मोस में रुचि उसकी समुद्री सुरक्षा जरूरतों से जुड़ी है, खासकर नातुना सागर क्षेत्र में बढ़ते दबाव को देखते हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस की तैनाती से इंडोनेशिया की समुद्री प्रतिरोधक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और उसकी सैन्य आधुनिकीकरण योजनाओं को मजबूती मिलेगी। इससे पहले 2022 में फिलीपींस ने 375 मिलियन डॉलर की डील के तहत ब्रह्मोस मिसाइलें खरीदी थीं, जिनकी तैनाती ने उसे दक्षिण चीन सागर में, विशेष रूप से स्कारबोरो शोल के आसपास, महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त दिलाई है।

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