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रोहिंग्याओं को UN से मिलेगी राहत? 'सबसे बड़ी अदालत' में शुरू हो रहा नरसंहार का ऐतिहासिक मामला

रोहिंग्याओं को UN से मिलेगी राहत? 'सबसे बड़ी अदालत' में शुरू हो रहा नरसंहार का ऐतिहासिक मामला

संक्षेप:

यह केस 2019 में द गैंबिया ने दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया है कि म्यांमार ने 1948 के जेनोसाइड कन्वेंशन (नरसंहार रोकथाम और दंड संधि) का उल्लंघन करते हुए रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ नरसंहार किया है।

Jan 12, 2026 07:44 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, हेग
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हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में म्यांमार के खिलाफ रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों के कथित नरसंहार से जुड़ी ऐतिहासिक सुनवाई शुरू हो रही है। इस कोर्ट को संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी अदालत या विश्व न्यायालय भी कहा जाता है। यह सुनवाई द गैंबिया बनाम म्यांमार के तहत हो रही है, जिसमें 11 देशों ने हस्तक्षेप किया है।

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यह एक दशक से अधिक समय में पहला ऐसा मामला होगा, जिसकी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पूरी सुनवाई होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के नतीजे न सिर्फ म्यांमार बल्कि अन्य अंतरराष्ट्रीय मामलों- खासतौर पर दक्षिण अफ्रीका द्वारा इजरायल के खिलाफ दायर गाजा युद्ध से जुड़े नरसंहार केस पर भी असर डाल सकते हैं।

म्यांमार सरकार ने नरसंहार के सभी आरोपों से इनकार किया है। संयुक्त राष्ट्र की म्यांमार के लिए स्वतंत्र जांच तंत्र के प्रमुख निकोलस कूंजियन ने रॉयटर्स से कहा- यह मामला तय करेगा कि नरसंहार की परिभाषा क्या है, उसे साबित करने के मानक क्या होंगे और उल्लंघनों के निवारण कैसे किए जाएंगे। ये सब भविष्य के मामलों के लिए अहम मिसाल बनेंगे।

2019 में दर्ज हुआ मामला

यह केस 2019 में द गैंबिया ने दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया है कि म्यांमार ने 1948 के जेनोसाइड कन्वेंशन (नरसंहार रोकथाम और दंड संधि) का उल्लंघन करते हुए रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ नरसंहार किया है। यह पिछले एक दशक से अधिक समय में ICJ में नरसंहार के किसी मामले की पहली पूरी मेरिट्स सुनवाई है।

2017 की सैन्य कार्रवाई और पलायन

2017 में म्यांमार की सेना द्वारा चलाए गए अभियान के बाद कम से कम 7.30 लाख रोहिंग्या अपने घर छोड़कर पड़ोसी बांग्लादेश चले गए थे। शरणार्थियों ने हत्या, सामूहिक बलात्कार और गांवों को जलाने जैसे आरोप लगाए। संयुक्त राष्ट्र की एक तथ्य-जांच मिशन ने निष्कर्ष निकाला था कि उस सैन्य अभियान में नरसंहारात्मक कृत्य शामिल थे। हालांकि, म्यांमार के अधिकारियों ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि सेना का अभियान मुस्लिम उग्रवादियों के हमलों के जवाब में एक वैध आतंकवाद-रोधी कार्रवाई था।

सू की का बचाव, अब बंद कमरे में सुनवाई

2019 की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान म्यांमार की तत्कालीन नेता आंग सान सू की ने गाम्बिया के आरोपों को अधूरे और भ्रामक करार दिया था। मौजूदा सुनवाई का एक अहम पहलू यह है कि पहली बार कथित अत्याचारों को लेकर रोहिंग्या पीड़ितों की बातें किसी अंतरराष्ट्रीय अदालत में सुनी जाएंगी। संवेदनशीलता और निजता के कारण ये सत्र बंद कमरे में होंगे और मीडिया के लिए खुले नहीं होंगे। आईसीजे में सुनवाई सोमवार सुबह 10 बजे (0900 GMT) से शुरू होकर तीन सप्ताह तक चलेगी।

पहले सप्ताह गैंबिया और उसके समर्थक अपनी दलीलें पेश करेंगे। फिर म्यांमार अपनी सफाई पेश करेगा। गवाहों और विशेषज्ञों की गवाही भी होगी (कुछ बंद कमरों में, जहां रोहिंग्या पीड़ित अपनी कहानियां सुनाएंगे)। 11 देशों ने हस्तक्षेप किया है जिनमें- कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, मालदीव, स्लोवेनिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, बेल्जियम और आयरलैंड। ये देश द गैंबिया के पक्ष में हैं।

क्या राहत मिल सकती है?

अगर ICJ द गैंबिया के पक्ष में फैसला देता है, तो म्यांमार को:

  • नरसंहार के कृत्यों को तुरंत रोकना होगा।
  • पीड़ितों को मुआवजा (रेपरेशन) देना होगा।
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं की गारंटी देनी होगी।
  • फैसला 2026 के अंत तक आने की उम्मीद है।

हालांकि, ICJ के फैसले बाध्यकारी होते हैं, लेकिन लागू करने की कोई सीधी ताकत नहीं। म्यांमार की मौजूदा जंटा सरकार पहले ही अंतरिम आदेशों की अनदेखी कर चुकी है। इसलिए असल राहत के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव जरूरी होगा।

म्यांमार का मौजूदा संकट

गौरतलब है कि 2021 में म्यांमार की सेना ने निर्वाचित असैन्य सरकार को सत्ता से हटा दिया था। इसके बाद लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाया गया, जिससे देशव्यापी सशस्त्र विद्रोह भड़क उठा। इस बीच, म्यांमार में चरणबद्ध चुनाव कराए जा रहे हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र, कई पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संगठनों ने न निःशुल्क और न निष्पक्ष बताया है।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें

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