ईरान जंग पर मध्यस्थता टांय-टांय फिस्स, पर चाहिए नोबेल शांति पुरस्कार; पाक PM और सेना प्रमुख के लिए प्रस्ताव पेश

Apr 21, 2026 03:58 pm ISTPramod Praveen पीटीआई, इस्लामाबाद
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Nobel Peace Prize for Pak PM: यह प्रस्ताव ऐसे समय में पाकिस्तान की ज़िम्मेदार, समझदारी भरी और सक्रिय कूटनीतिक भागीदारी की सराहना करता है, जब दुनिया भर में और इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है।

ईरान जंग पर मध्यस्थता टांय-टांय फिस्स, पर चाहिए नोबेल शांति पुरस्कार; पाक PM और सेना प्रमुख के लिए प्रस्ताव पेश

Nobel Peace Prize for Pak PM : ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी और 40 दिनों के हालिया युद्ध के दौरान दोनों पक्षों के बीच अब तक नाकाम रहे मध्यस्थता कराने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाक सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को शांति का नोबेल पुरस्कार देने की मांग उठी है। मंगलवार को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की विधानसभा में इसी से जुड़ा एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को कूटनीति के ज़रिए क्षेत्रीय तनाव कम करने में उनकी भूमिका के लिए नोबेल शांति पुरस्कार देने की सिफ़ारिश की गई है।

पाकिस्तान मुस्लिम लीग-N (PML-N) की विधायक फ़राह खान द्वारा पेश किया गया यह प्रस्ताव असेंबली सचिवालय में जमा किया गया है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में पाकिस्तान की "ज़िम्मेदार, समझदारी भरी और सक्रिय कूटनीतिक भागीदारी" की सराहना करता है, जब दुनिया भर में और इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। इस प्रस्ताव के जरिए सदन में क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर शांति को बढ़ावा देने और उसे बनाए रखने में उन पाकिस्तान के योगदान की सराहना की गई है।

शरीफ और मुनीर के नेतृत्व की सराहना

प्रस्ताव में पीएम शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के नेतृत्व की भी सराहना की गई है, और उनके "दूरदर्शी नेतृत्व, रणनीतिक सूझबूझ और अथक कूटनीतिक प्रयासों" को रेखांकित किया गया है। प्रस्ताव में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने अपनी वैश्विक स्थिति को मज़बूत किया है और एक ज़िम्मेदार, शांति चाहने वाले और सुलह कराने वाले राष्ट्र के रूप में उभरा है, जिससे उसे अपनी कूटनीतिक भूमिका के लिए अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली है।

प्रस्ताव पर सदन में चर्चा होने की संभावना कम

इसमें आगे कहा गया है कि देश के प्रयासों ने एक संभावित वैश्विक संकट को टालने और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में योगदान दिया है। प्रस्ताव का समापन शरीफ़ और मुनीर के योगदान को मान्यता देते हुए, उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए औपचारिक रूप से नामित करने की सिफ़ारिश के साथ होता है। इस बीच, राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने कहा कि इस प्रस्ताव पर सदन में चर्चा होने की संभावना कम है, क्योंकि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (PTI) के पास बहुमत है, जो इसका विरोध कर सकती है। उन्होंने कहा कि अगर इसे पेश भी किया जाता है, तो भी इसके पारित होने की संभावना कम है।

पंजाब प्रांत की विधानसभा से ऐसा प्रस्ताव पारित हो चुका

बता दें कि इससे पहले पंजाब प्रांत की विधानसभा ने पिछले हफ्ते 16 अप्रैल यानी गुरुवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच शांति के लिए किए गए प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने की मांग की गई है। यह प्रस्ताव में भी पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की सराहना की गई है और उनके उस कथित "बेहद प्रभावी कूटनीतिक भूमिका" का ज़िक्र किया गया, जो उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष-विराम को बढ़ावा देने और तनावपूर्ण अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच शांति स्थापित करने में निभाई।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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