बर्फीले पानी से झांकते 'भूतिया' पेड़ और डूबा जंगल, 115 साल पहले क्या हुआ था?
कजाकिस्तान के तियान शान पर्वतों में बसी कैंडी झील इन दिनों अपनी अनोखी संरचना और रहस्यमयी नजारे की वजह से दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर खींच रही है। झील के नीले-हरे पानी से बाहर निकले पेड़ों के तने किसी भूतिया जंगल का भ्रम पैदा करते हैं।

पेड़ तो आपने कई देखे होंगे, लेकिन आज हम आपको ऐसे पेड़ के बारे में बताएंगे, जिसे देख आपको पहली नजर में विश्वास ही नहीं होगा कि ऐसा भी हो सकता है। बर्फीले पानी से झांकते इन पेड़ों को देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं और कैमरे में कैद कर अपने साथ ले जाते हैं। दरअसल, कजाकिस्तान के तियान शान पर्वतों में बसी कैंडी झील इन दिनों अपनी अनोखी संरचना और रहस्यमयी नजारे की वजह से दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर खींच रही है। झील के नीले-हरे पानी से बाहर निकले पेड़ों के तने किसी भूतिया जंगल का भ्रम पैदा करते हैं। देखने से ऐसा लगता है जैसे समय यहां एक सदी पहले ही थम गया हो।
विनाशकारी भूकंप के बाद जन्मी झील
रिपोर्ट्स के अनुसार, 1911 में तियान शान क्षेत्र में 8 तीव्रता वाला भीषण भूकंप आया था। कहा जाता है कि इस भूकंप ने इस इलाके की भौगोलिक संरचना को पूरी तरह बदल दिया। रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप के बाद भारी भूस्खलन हुआ, चट्टानें एक घाटी को बंद कर दी और एक प्राकृतिक बांध बन गया। कहा जाता है कि धीरे-धीरे बारिश और पिघलते ग्लेशियरों का पानी इस घाटी में भरने लगा। इसका नतीजा यह हुआ कि एक झील का जन्म हुआ, जिसने वहां मौजूद सैकड़ों साल पुराने स्प्रूस (चीड़) के पेड़ों को अपने अंदर समा लिया।
बर्फीले पानी में सुरक्षित बने रहे पेड़
विशेषज्ञों के मुताबिक, झील का पानी सालों भर 6 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्म नहीं होता। इसका मतलब ये है कि इसका तापमान लगभग एक सामान रहता है, इसी वजह से पानी में डूबे पेड़ों की शाखाएं और तने आज भी हैरतअंगेज तरीके से सुरक्षित हैं। झील की सतह से बाहर निकले पेड़ों के तने कंकाल जैसे दिखते हैं। वहीं, पानी के अंदर पूरा जंगल लगभग वैसा ही बरकरार है। साफ और पारदर्शी पानी की वजह से नीचे तक फैले पेड़ों के तने साफ-साफ नजर आते हैं।
पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र
काइंडी झील अपनी रहस्यमयी सुंदरता के कारण रोमांच प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच बहुत लोकप्रिय है। कई पर्यटक यहां बर्फीले पानी में तैराकी और गोताखोरी करने के लिए आते हैं। झील के हरे-नीले पानी में मौजूद चूना पत्थर सूरज की रोशनी को परिवर्तित करके एक अनोखी चमक पैदा करता है, जिससे पूरा इलाका जादुई सा लगता है।
प्रकृति का अनोखा ‘अंडरवॉटर टाइम कैप्सूल’
एक्सपर्ट इसे प्रकृति का ‘जलमग्न समय कैप्सूल’ कहते हैं। यहां का नजारा देखकर हर कोई सोचने पर मजबूर हो जाता है कि प्रकृति कितनी नाजुक और कितनी मजबूत हो सकती है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर के नजदीक होने के बावजूद यह झील आज भी शांत, एकांत और लगभग अछूती बनी हुई है। यहां की पगडंडियों पर चलते हुए स्थानीय गाइड पर्यटकों को 1911 के भूकंप की कहानियां सुनाते हैं और बताते हैं कि यह कैसे अन्य जगहों से अलग है।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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