जिसे समझा तारणहार, उसी के हथियारों से हो गया बंटाधार; PAK के लिए 2025 कैसे रहा खूनी साल?
PICSS की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल यानी 2025 में 667 पाक सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई, जो 2011 के बाद सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसके अलावा 580 नागरिक मारे गए, जो 2015 के बाद सबसे ज़्यादा है।

पड़ोसी देश पाकिस्तान ने साल 2025 में बीते एक दशक का सबसे ज़्यादा खून-खराबा देखा। आंतरिक खूनी संघर्ष और आतंकवाद से जुड़ी मौतों के मामले पिछले एक साल की तुलना में 74 फीसदी ज्यादा दर्ज किए गए। इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) की रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह आत्मघाती हमले, अफगान आतंकियों द्वारा अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल और पाकिस्तानी सेना के कड़े आतंकवाद विरोधी अभियान रहे। यानी अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल कर आतंकियों ने पाक का ही बंटाधार कर दिया, जबकि पाकिस्तान अमेरिका को तारणहार समझ रहा था।
बड़ी संख्या में मौतों का कारण आत्मघाती हमले और अफगान आतंकवादियों द्वारा अमेरिकी सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल, साथ ही पाकिस्तानी तालिबान और बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे संगठनों के खिलाफ इस्लामाबाद के अपने आतंकवाद विरोधी अभियान थे। PICSS की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में आतंकवादी घटनाओं में 3,413 लोगों की मौत हुई, जबकि 2024 में यह संख्या 1,950 थी।
ISI का दांव पड़ गया उलटा
दरअसल, 1947 से लेकर अब तक पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी ISI पर भारत के खिलाफ आतंकवाद को रणनीति के तौर पर इस्तेमाल करने के आरोप लगते रहे हैं लेकिन अब उसे खुद इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। 1990 के दशक में पाकिस्तान तालिबान का खुला समर्थक रहा और उन गिने-चुने देशों में शामिल था, जिन्होंने तालिबान शासन को मान्यता दी थी लेकिन 2025 में हालात पलट गए। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर आरोप लगाया कि वह पाकिस्तानी तालिबान (TTP) द्वारा किए जा रहे सीमा पार हमलों को नजरअंदाज कर रहा है। अफगान तालिबान सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। अक्टूबर से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है और सीमा पर झड़पों में दर्जनों लोग मारे गए हैं।
आत्मघाती हमले और अमेरिकी हथियार
PICSS की रिपोर्ट बताती है कि मारे गए 3,413 लोगों में से 2,138 आतंकवादी थे। आतंकियों की मौत में 124 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो TTP के खिलाफ तेज़ सैन्य अभियानों को दिखाती है। PICSS के मैनेजिंग डायरेक्टर अब्दुल्ला खान के मुताबिक, 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद छोड़े गए अमेरिकी हथियार आतंकियों के हाथ लगे, जिससे उनकी हमले करने की क्षमता बढ़ गई। साथ ही आत्मघाती हमलों की संख्या में भी तेज इजाफा हुआ।
सुरक्षाबलों और आम लोगों को भारी नुकसान
PICSS की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल यानी 2025 में 667 पाक सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई, जो 2011 के बाद सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसके अलावा 580 नागरिक मारे गए, जो 2015 के बाद सबसे ज़्यादा है। सरकार समर्थक शांति समितियों के 28 सदस्यों की भी जान गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में कुल 1,066 आतंकी हमले दर्ज किए गए। इनमें आत्मघाती हमलों में 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। 2025 में सुरक्षा बलों ने करीब 500 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सभी सीमा चौकियां अक्टूबर से बंद हैं, जिससे व्यापार और लोगों की आवाजाही ठप हो गई है। पाकिस्तान का कहना है कि सीमा तभी खोली जाएगी जब अफगानिस्तान लिखित आश्वासन देगा कि उसकी ज़मीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होगा। पाकिस्तान ने यह भी आरोप लगाया कि अफगानिस्तान मानवीय सहायता लेने में भी सहयोग नहीं कर रहा, हालांकि काबुल की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सेना प्रमुख की सख्त चेतावनी
बता दें कि दिसंबर में पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अफगान तालिबान सरकार से कहा कि वह या तो पाकिस्तान के साथ रिश्ते बनाए रखे या फिर पाकिस्तानी तालिबान का समर्थन छोड़ दे। कुल मिलाकर, 2025 पाकिस्तान के लिए आतंकवाद, हिंसा और अस्थिरता का सबसे खतरनाक साल साबित हुआ।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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