अपने बच्चों की फौज खड़ी करना चाहता था जेफ्री एपस्टीन, बेहद खतरनाक थे इरादे
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जेफ्री एपस्टीन एक ऐसा सेंटर बनाना चाहता था जहां उसके स्पर्म से महिलाओं को प्रेग्नेंट किया जाता। एक साथ 20 महिलाओं को प्रेग्नेंट करना का प्लान था। हालांकि इसे जमीन पर नहीं लाया जा सका था।
अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की मौत के 6 साल बाद उससे संबंधित दस्तावेजों ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है। दुनियाभर के बड़े रसूखदार लोगों के नाम उसके साथ जुड़ रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक एपस्टीन के मनसूबे बेहद खतरनाक और हैरान करने वाले थे। वह चाहता था कि अपने बच्चों की 'खेती' करे। मतलब यह है कि वह एक ऐसा सेंटर तैयार करना चाहता था जहां महिलाओं में उसके स्पर्म से गर्भधारण करवाया जाए। हालांकि इस तरह की योजना को लेकर उसने कोई कदम उठाया था या नहीं, इसको लेकर कोई पुख्ता सबूत नहीं है।
हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि एपस्टीन ने किस तरह की फंतासी वाली दुनिया बसा रखी थी। वहीं कई देशों की सत्ता के गलियारे तक उसकी आसान पहुंच थी। 2019 में गिरफ्तार होने के बाद एपस्टीन ने अपने ऊपर सभी आरोपों से इनकार किया था। हालांकि वह अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह से खारिज करने में सक्षम नहीं था।
जेफ्री एपस्टीन खुद को एक एलीट बुद्धिमान व्यक्ति साबित करने में लगा रहता था। इसके लिए वह डोनेशन, स्पॉन्सरशिप, पार्टियों का आयोजन करता था। उसकी पार्टियों में दुनियाभर के नामी-गिरामी लोग शामिल होते थे। वैज्ञानिक स्टीफन्स हॉकिन्स और साइकोलॉजिस्ट स्टीवन पिंकर तक भी उसकी पहुंच थी। वह कॉन्फ्रेंस, प्राइवेट डिनर, रिसर्च प्रोग्राम की फंडिंग करता था। वह खुद को वैज्ञानिक प्रगति का सहयोगी साबित करना चाहता था। अब बहुत सारे शोधकर्ताओं का कहना है कि एपस्टीन ने उनकी मदद जरूर की लेकिन उसके कारनामों के आगे यह मदद बहुत छोटी है।
पीड़िताओं ने बताई हैरान करने वाली बातें
नासा में वैज्ञानिक के तौर पर काम कर चुकी एक महिला ने कहा कि एपस्टीन चाहता है कि एक साथ 20 महिलाओं को प्रेग्नेंट किया जाए। उसने एक नोबेल विजेता के बंद हो चुके स्पर्म बैंक जैसा अपना बैंक बनाने का प्रयास किया था। उसका कहना था कि उसके जीन्स से पैदा होने वाले बच्चे प्रतिभाशाली होंगे और इससे मानवता को आगे ले जाने में मदद मिलेगी।
खुद के शव को सुरक्षित रखवाना चाहता था एपस्टीन
एपस्टीन कई बार कह चुका था कि मौत के बाद उसका शरीर सुरक्षित रखा जाए। इसके लिए वह क्रायोनिक्स का सहारा लेना चाहता था। इस प्रक्रिया में किसी के शव को कम तापमान पर जमा तिया जाता है। वह चाहता था कि उसके शरीर के हिस्से भविष्य के लिए सुरक्षित रहें। एपस्टीन दुनियाभर की बच्चियों को किसी ना किसी बहाने से अपने ठिकाने पर बुलवाता था और फिर उनका यौन शोषण किया जाता था।
अब तक उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में से कई को बड़े पैमाने पर संपादित किया गया है जिनमें नाम, पते, ई-मेल और तस्वीरों को काली पट्टियों से ढक दिया गया है। कुछ मामलों में, यह स्पष्ट है कि ऐसा क्यों हुआ है। अन्य मामलों में, संपादन के पीछे कोई कारण न होने से विवाद और बढ़ गया है, और लोग स्वयं ही अधूरी जानकारी को पूरा करने में जुट गए हैं।
अमेरिका को लंबे समय से पृथ्वी पर सबसे स्वतंत्र समाजों में से एक होने पर गर्व रहा है। वाटरगेट कांड ने सरकार की ईमानदारी पर जनता के भरोसे को गंभीर रूप से ठेस पहुंचाई थी, जिसके बाद सरकारी फाइल को जनता के लिए उपलब्ध कराने के लिये कई महत्वपूर्ण कानून पारित किये गये। इनमें 1966 का सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम (एफओआईए), 1996 का इलेक्ट्रॉनिक एफओआईए संशोधन और 2016 का एफओआईए सुधार अधिनियम शामिल हैं।
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Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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