डोनाल्ड ट्रंप की बात ईरान को लगी बुरी? जेडी वेंस ने बताया कहां तक पहुंचा समझौता

लाइव हिन्दुस्तान, ओबबुर्गेन (स्विटजरलैंड)
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क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बात ईरान को बुरी लगी है? अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहाकि ईरान के साथ शांति वार्ता ने फरवरी के आखिर में शुरू हुई जंग को खत्म करने के लिए एक सफल अंतिम समझौते की अच्छी नींव तैयार की है।

JD Vance

क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बात ईरान को बुरी लगी है? अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहाकि ईरान के साथ शांति वार्ता ने फरवरी के आखिर में शुरू हुई जंग को खत्म करने के लिए एक सफल अंतिम समझौते की अच्छी नींव तैयार की है। वेंस ने अंतिम समझौते की तुलना एक मकान से करते हुए पत्रकारों से कहाकि हमने नींव रखी है। हमने घर तो नहीं बनाया है, लेकिन अमेरिकी लोगों के लिए एक अच्छी स्थिति तक पहुंचने के लिए हमने एक मजबूत नींव जरूर रखी है। वेंस की ये टिप्पणियां तब आईं जब उन्होंने और ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघिर गालिबाफ ने सोमवार को दोनों देशों के बीच युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के मकसद से शुरुआती बातचीत का एक लंबा दौर पूरा किया।

होर्मुज पर बनी बात
वेंस और अमेरिकी अधिकारियों ने कई मोर्चों पर प्रगति का दावा किया। इनमें ऐसे तरीके बनाना शामिल है जिनसे यह पक्का किया जा सके कि दुनिया भर में ऊर्जा की आपूर्ति के लिए अहम समुद्री रास्ते, होर्मुज को खुला रखा जाए। साथ ही दक्षिणी लेबनान में इजरायल और ईरान-समर्थित हिजबुल्ला लड़ाकों के बीच युद्धविराम बना रहे। बड़े पैमाने पर संघर्ष शुरू होने के कुछ ही समय बाद हिजबुल्ला और इजरायल के बीच युद्ध छिड़ गया। हिजबुल्ला ने उत्तरी इजरायल में आम लोगों की बस्तियों पर रॉकेट और ड्रोन दागे, जबकि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के बड़े इलाकों पर कब्जा कर लिया। ईरान ने लेबनान में लड़ाई खत्म करने की दिशा में बड़ी प्रगति का जिक्र किया और इसे बातचीत की पहली असली परीक्षा बताया।

तेल से प्रतिबंध हटाया
इसके अलावा, युद्ध खत्म करने के अंतरिम समझौते के तहत अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में 60 दिन की छूट देने वाला लाइसेंस जारी किया। खास बात यह है कि इस लाइसेंस से ईरानी तेल का अमेरिका में आयात किया जा सकेगा। अमेरिका ने 1990 के दशक के बाद से ईरानी तेल का बड़े पैमाने पर आयात नहीं किया है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस लाइसेंस की घोषणा करते हुए स्विट्जरलैंड में चल रही सार्थक बातचीत का जिक्र किया। यह लाइसेंस 21 अगस्त तक लागू रहेगा। ट्रंप स्विट्जरलैंड में तो नहीं थे, लेकिन बातचीत पर उनका असर साफ दिख रहा था।

ट्रंप की बात ईरान को लगी बुरी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लेक ल्यूसर्न समिट में शामिल नहीं हुए, लेकिन उनकी छाप को साफ तौर पर महसूस किया गया। ट्रंप के बयानों से बातचीत पर बुरा असर पड़ा। उन्होंने हजारों मील दूर से ऐसी बातें कहीं जिनसे ईरानियों को बुरा लगा। ईरान की सरकारी मीडिया ने कहाकि अमेरिकी राष्ट्रपति के अपमानजनक संदेश के प्रकाशन के बाद बातचीत रुक गई थी। बाद में बातचीत फिर से शुरू हुई। वेंस ने इस बात का खंडन किया कि ट्रंप की धमकियों से बातचीत मुश्किल हो गई थी। वेंस ने कहाकि नहीं, उन्होंने सिस्टम में कोई रुकावट नहीं डाली। उन्होंने आगे कहा, ‘हां, उन्होंने बाहर जाने की धमकी जरूर दी थी, या कम से कम सोशल मीडिया पर ऐसी धमकियां आई थीं कि वे बाहर चले जाएंगे। लेकिन हम कल रात एक बजे के बाद तक बातचीत कर रहे थे, इसलिए वे बाहर नहीं गए।’

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान की जब्त की हुई विदेशी संपत्तियों को आंशिक रूप से उसे देने पर विचार कर सकता है। बशर्ते इस धनराशि का उपयोग ईरानी जनता के हित में हो और उसका इस्तेमाल आतंकवाद के वित्तपोषण में न हो। वेंस ने अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद संवाददाताओं से कहा कि बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षकों को दोबारा प्रवेश देने पर सहमत हो गया है। उन्होंने इसे अमेरिकी पक्ष के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को स्थायी रूप से समाप्त करने की दिशा में पहला कदम है।

Deepak Mishra

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Deepak Mishra

मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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