जापान ने फिर दोहराई 1986 वाली पुरानी कहानी, भारतीय आमों पर लगा दिया 'ताला'; जानें क्यों

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जापान ने भारत से ताजा आमों के आयात पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम ठीक 20 साल बाद उठाया गया है, जब वर्ष 2006 में जापान ने भारतीय आमों पर लगे पुराने प्रतिबंध को हटा लिया था।

जापान ने फिर दोहराई 1986 वाली पुरानी कहानी, भारतीय आमों पर लगा दिया 'ताला'; जानें क्यों

जापान ने भारत से ताजा आमों के आयात पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम ठीक 20 साल बाद उठाया गया है, जब वर्ष 2006 में जापान ने भारतीय आमों पर लगे पुराने प्रतिबंध को हटा लिया था। प्रतिबंध अप्रैल-जून के चरम निर्यात मौसम के दौरान लगा है, जिससे अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी लोकप्रिय भारतीय आम किस्मों के जापान निर्यात पर सीधा असर पड़ा है। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जापान के संगरोध निरीक्षकों ने भारतीय उपचार सुविधाओं में धूमन (Fumigation) और कीटाणुशोधन की प्रक्रियाओं में गंभीर कमियां पाई हैं। इसके चलते जापान ने भारत से आमों का आयात तुरंत रोक दिया है।

योकोहामा एसोसिएशन ने क्या कहा?

योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने 31 मार्च को जारी बयान में जापान के सरकारी प्लांट प्रोटेक्शन स्टेशन की अधिसूचना का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि 25 मार्च 2026 को या उसके बाद जारी किए गए निरीक्षण प्रमाण-पत्र वाले शिपमेंट स्वीकार नहीं किए जाएंगे। एसोसिएशन ने कहा कि भारतीय सुविधाओं से आयात तब तक निलंबित रहेगा, जब तक जापानी अधिकारी परिचालन मानकों में सुधार से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाते।

क्या मिलीं कमियां?

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च महीने में जापानी संगरोध अधिकारियों की एक टीम उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित वाष्प ताप उपचार (VHT) सुविधाओं का निरीक्षण करने पहुंची थी। VHT एक गैर-रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें आमों को नियंत्रित गर्म और आर्द्र वातावरण में रखकर कीटों को नष्ट किया जाता है। जापान हर साल आम के मौसम से पहले इन सुविधाओं का निरीक्षण कराता है, लेकिन इस बार निरीक्षकों को उपचार प्रक्रिया और संबंधित मानकों में खामियां मिलीं, जिसके बाद टोक्यो ने तुरंत आयात पर रोक लगा दी।

निर्यात पर पड़ेगा असर?

वित्तीय वर्ष 2025-26 में गुजरात के केसर आम ने जापान को भारत के कुल आम निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, जापान को ताजा और प्रसंस्कृत आम उत्पादों का कुल निर्यात 1.54 मिलियन डॉलर का था, जिसमें केसर आम की खेप का हिस्सा करीब 0.2 मिलियन डॉलर था। बता दें कि भारत के प्रमुख आम निर्यात बाजारों में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, नीदरलैंड और सऊदी अरब शामिल हैं।

20 साल पुरानी कहानी दोहराई

बता दें कि जापान ने वर्ष 1986 में फल मक्खी (Fruit Fly) के संभावित संक्रमण के डर से भारतीय आमों पर पहली बार प्रतिबंध लगाया था। यह प्रतिबंध वैज्ञानिक अध्ययनों, कीट सर्वेक्षणों और लंबी कूटनीतिक बातचीत के बावजूद 2006 तक चला। जून 2006 में तत्कालीन वाणिज्य मंत्री कमल नाथ के प्रयासों से जापान ने प्रतिबंध हटा लिया था। भारत ने VHT प्रक्रिया लागू कर साबित किया कि भारतीय आम फल मक्खी से मुक्त हैं, जिसके बाद अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली समेत कई किस्मों को जापानी बाजार में प्रवेश मिला।

अब दो दशक बाद फिर से संगरोध संबंधी चिंताएं उभर आई हैं। भारतीय निर्यातक और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग जापानी अधिकारियों के साथ जल्द से जल्द बातचीत कर समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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