
'सब खत्म हो गया', पाकिस्तानी सेना ने डिलीट कराया जेन-Z वाला लेख; पड़ोसी देश में मच गया बवाल
पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेस पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के दबाव में यह कदम उठाया गया। लेख हटाए जाने के बाद इसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए।
पाकिस्तान में नेपाल और बांग्लादेश की तरह सड़कों पर बड़े विरोध-प्रदर्शनों के बजाय विचारों के स्तर पर एक खामोश पीढ़ीगत बदलाव देखा जा रहा है। यह बदलाव लंबे समय से चले आ रहे सत्ता ढांचों को चुनौती दे रहा है। इसी पृष्ठभूमि में एक विवादास्पद ओप-एड के हटाए जाने के बाद देश में सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस और तीखी हो गई है।
पाकिस्तान में एक युवा छात्र के ओप-एड लेख ने सनसनी मचा दी है। अमेरिका में पीएचडी कर रहे पाकिस्तानी छात्र जोरैन निजामानी का लेख "इट इज ओवर" (सब खत्म हो गया) 1 जनवरी को अंग्रेजी दैनिक अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में प्रकाशित हुआ था, लेकिन कुछ घंटों बाद ही इसे वेबसाइट से हटा दिया गया। माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेस पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के दबाव में यह कदम उठाया गया। लेख हटाए जाने के बाद इसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। कई पाकिस्तानी नागरिकों, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य ने असहमति की आवाज को दबाने के लिए दबाव डाला। आलोचकों का कहना है कि यह कदम स्वयं उस लेख की दलील को सही ठहराता है, जिसमें सत्ता प्रतिष्ठान की पकड़ कमजोर पड़ने की बात कही गई थी।
लेख क्या कहता है?
जोरैन निजामानी अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ अर्कांसास एट लिटिल रॉक में क्रिमिनोलॉजी में पीएचडी कर रहे हैं। उन्होंने अपने लेख में पाकिस्तान की सत्ताधारी पीढ़ी (बूमर्स) और युवा पीढ़ी (जेन-जी और अल्फा) के बीच बढ़ते फासले पर तीखा प्रहार किया है। वे लिखते हैं कि पुरानी पीढ़ी के नियंत्रण के तरीके अब खत्म हो चुके हैं। जेन-जी जबरन थोपे गए देशप्रेम पर विश्वास नहीं करता।
अपने लेख में निजामानी ने तर्क दिया कि पाकिस्तान का शासक अभिजात वर्ग युवा पीढ़ी को प्रभावित करने की क्षमता खो चुका है। उन्होंने लिखा कि व्याख्यान, सेमिनार और देशभक्ति अभियानों जैसे राज्य-प्रायोजित प्रयास Gen Z और Gen Alpha पर अब असर नहीं डालते।
उन्होंने कहा- सत्ता में बैठे बुज़ुर्ग पुरुषों और महिलाओं के लिए अब यह सब खत्म हो चुका है। युवा पीढ़ी अब वह नहीं खरीद रही जो आप उन्हें बेचने की कोशिश कर रहे हैं। बिना सीधे सेना का नाम लिए उन्होंने जोर दिया कि असली देशभक्ति नारों या भाषणों से नहीं, बल्कि बराबर अवसर, काम करने वाली व्यवस्थाएं, भरोसेमंद बुनियादी ढांचा और सुनिश्चित अधिकार देने से पैदा होती है। इंटरनेट और सूचनाओं तक पहुंच के कारण युवा अब प्रचार को पहचानने में सक्षम हैं।
लेख में कुछ प्रमुख बिंदु:
- देशप्रेम तब खुद-ब-खुद आता है जब समान अवसर, अच्छी इंफ्रास्ट्रक्चर और बुनियादी जरूरतें उपलब्ध हों। स्कूल-कॉलेजों में जाकर छात्रों को देशप्रेम सिखाने की जरूरत नहीं पड़ती।"
- जेन-जी तेज इंटरनेट चाहता है, लेकिन सत्ता में बैठे लोग मजबूत फायरवॉल चाहते हैं।
- युवा सस्ते स्मार्टफोन और फ्रीलांसिंग में आसानी चाहते हैं, लेकिन नीतियां टैक्स और प्रतिबंध बढ़ाती हैं।
- इंटरनेट की वजह से युवा भ्रष्टाचार, असमानता और पाखंड को साफ देख रहे हैं। प्रोपेगैंडा अब काम नहीं कर रहा।
‘खामोश पलायन’ का जिक्र
लेख में युवाओं के बढ़ते पलायन की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई गई। निजामानी के अनुसार, जो लोग बोलने की कोशिश करते हैं, उन्हें चुप करा दिया जाता है, जिससे कई युवा टकराव के बजाय देश छोड़ने का रास्ता चुनते हैं। उन्होंने इसे “खामोश निकास” बताया।
निजामानी जाने-माने पाकिस्तानी कलाकार फाजिला काजी और कैसर खान निजामानी के बेटे हैं। लेख हटाए जाने के बाद कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने उन्हें पीढ़ीगत प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में देखा। उनके लेख को पाकिस्तान की बढ़ती बेरोजगारी (2025 में 31% की वृद्धि) और आर्थिक संकट से जोड़कर देखा जा रहा है।
हटाए जाने पर बवाल
लेख हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश फैला। पाकिस्तानी एक्टिविस्ट मेहलका समदानी ने लिखा- यह लेख पाकिस्तान की सत्ताधारी एलीट को बता रहा है कि जेन जी उनके नियंत्रण से बाहर हो चुका है। और अब लेख ही उपलब्ध नहीं – यही सेंसरशिप की मिसाल है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के कनाडा चैप्टर ने कहा- लेख हटाना ही इसकी सच्चाई साबित करता है। जेन जेड भ्रष्टाचार और असमानता देख रहा है। जबरन देशप्रेम अब नहीं चलता।
ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ते प्रतिबंध का उदाहरण बताया। कई पत्रकारों, वकीलों और एक्टिविस्ट्स ने लेख की तारीफ की और इसे दिल से लिखा गया करार दिया। दूसरी तरफ, ISPR ने कथित तौर पर लेख के जवाब में कुछ काउंटर आर्टिकल्स शेयर किए। कुछ आलोचकों ने निजामानी के विचारों को कन्फ्यूज्ड बताया, लेकिन वायरल होने से वे राष्ट्रीय युवा आइकन बन गए हैं।

लेखक के बारे में
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