नेतन्याहू ने बिना खुफिया अनुभव वाले अफसर को बनाया मोसाद का नया चीफ, क्यों अहम है यह फैसला?
अप्रैल 2024 में गोफमैन प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ गए और उन्हें नेतन्याहू के राष्ट्रवादी विचारों के समर्थक के तौर पर देखा जाता है। उन्हें उनकी कट्टर दक्षिणपंथी विचारधारा के लिए भी जाना जाता है।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को देश की विदेशी खुफिया एजेंसी मोसाद के नए प्रमुख की औपचारिक नियुक्ति कर दी है। नेतन्याहू ने मेजर जनरल रोमन गोफमैन को इस काम की जिम्मेदारी सौंपी है। इजरायल के इस फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि गोफमैन को खुफिया मामलों का कोई अनुभव नहीं है और अब वह दुनिया की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसियों में से एक मोसाद को लीड करेंगे।
जानकारी के मुताबिक नए मोसाद चीफ मौजूदा प्रमुख डेविड बार्निया का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने पर 2 जून 2026 से यह जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे पहले गोफमैन को दिसंबर में ही इस पद के लिए चुन लिया था, जिसे अब औपचारिक मंजूरी मिल गई है।
कौन हैं रोमन गोफमैन?
गोफमैन का जन्म 1976 में बेलारूस में हुआ था लेकिन वह 14 साल की उम्र में इजरायल आ गए थे। 1995 में वह सेना में भर्ती हुए और इसके बाद से उनका एक लंबा सैन्य करियर रहा है। 7 अक्तूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुए गाजा युद्ध के समय गोफमैन नेशनल कैवेलरी प्रशिक्षण केंद्र के कमांडर थे।
जानकारी के मुताबिक 7 अक्टूबर में दक्षिणी इजरायल के स्डेरोट शहर में हमास लड़ाकों के साथ हुई झड़प में वह गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। बाद में अप्रैल 2024 में गोफमैन प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ गए। उन्हें नेतन्याहू के राष्ट्रवादी विचारों के कट्टर समर्थक के तौर पर देखा जाता है।
मोसाद पर उठे थे सवाल
इससे पहले दुनिया की सबसे मजबूत खुफिया एजेंसियों में गिनी जाने वाली मोसाद को 7 अक्तूबर के हमले की पहले से जानकारी न होने के को लेकर आलोचना भी झेलनी पड़ी है। घरेलू और सैन्य खुफिया एजेंसियों, शिन बेट और अमान के प्रमुखों ने इस चूक की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था। हालांकि 7 अक्तूबर के बाद शुरू हुए युद्ध के दौरान मोसाद ने कई बड़े दुश्मन नेताओं को निशाना बनाने में अहम भूमिका निभाई है, जिससे इजरायल और दुनिया भर में उसकी छवि दोबारा मजबूत हुई।
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