ट्रंप की जान को खतरा, इजरायल बार-बार दे रहा चेतावनी, US को क्यों नहीं हो रहा भरोसा?

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हाल ही में ट्रंप की तुर्की यात्रा से पहले इजरायल ने ट्रंप पर हमले की चेतावनी दी थी। हालांकि तुर्की की खुफिया एजेंसियां भी इसकी पुष्टि नहीं कर पाईं। तुर्की के अधिकारियों के मुताबिक एजेंसियों को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला

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ट्रंप की जान को खतरा (AI GENERATED IMAGE)

ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने की साजिश रच रहा है। यह बात इजरायल अमेरिका को बीसों बार दोहरा चुका है। कभी मिसाइल तो कभी स्नाइपर हमले की वार्निंग दे देकर इजरायल ने कई बार वाइट हाउस को ईरान के प्रति आगाह किया है। हाल ही में इससे जुड़ा एक वाकया भी सामने आया है कि कैसे तुर्की में ट्रंप को खतरे की चेतावनी के बाद उन्हें विमान बदलवाकर अमेरिका ले जाया गया था। हालांकि इजरायल की हर बात पर अमेरिका को पूरा भरोसा नहीं है।

इससे पहले इजरायल ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ईरान डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के लिए अलग अलग तरह की साजिश रच रहा है। इजरायल के मुताबिक ईरान ट्रंप पर स्नाइपर, चाकू या मिसाइल से भी हमला करवा सकता है। हालांकि, इजरायल के इन दावों और गंभीर चेतावनियों पर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को पूरा भरोसा नहीं हो पा रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खुलासा हुआ है कि अमेरिका इन चेतावनियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पा रहा है और इसीलिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का इजरायली इनपुट पर लो कॉन्फिडेंस है।

तुर्की से छिपकर निकले थे ट्रंप

इजरायल ने सबसे विस्फोटक और खौफनाक चेतावनी जुलाई में तुर्की में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान दी थी। इजरायली खुफिया एजेंसी ने सीधे वाइट हाउस को अलर्ट भेजा था कि जब ट्रंप अपने विमान एयर फोर्स वन से उड़ान भरेंगे, तो ईरान शोल्डर मिसाइल से उन्हें निशाना बना सकता है।

हालांकि अमेरिकी एजेंसियों को इस इंटेलिजेंस पर पूरा भरोसा नहीं था, फिर भी सुरक्षा के लिहाज से वाइट हाउस और सीक्रेट सर्विस ने जोखिम नहीं लिया। ट्रंप को एक सीक्रेट ऑपरेशन के तहत एयरफोर्स वन से निकालकर दूसरे विमान में शिफ्ट कर दिया गया। इजरायल के इन दावों को तुर्की की खुफिया एजेंसियों ने नकार दिया। तुर्की की एजेंसियों ने इजरायल के इस दावे की जांच की थी, लेकिन उन्हें ट्रंप पर हमला करने की साजिश का कोई सबूत नहीं मिला।

इजरायली दावों पर CIA को क्यों है शक?

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका इस बात को मानता है कि 2020 में ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद से ईरान ट्रंप से बदला लेना चाहता है। लेकिन इसके बावजूद इजरायल के दावों पर अमेरिकी इंटेलिजेंस को भरोसा नहीं हो रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, "CIA को इजरायली खुफिया जानकारी पर कम विश्वास है।" परमाणु हथियारों को लेकर भी अमेरिका की राय अलग है। इस साल की शुरुआत में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना था कि ईरान सक्रिय रूप से परमाणु बम नहीं बना रहा है, जबकि इजरायल का दावा था कि ईरान लगातार परमाणु हथियार बना रहा है।

दरअसल इजरायल पर आरोप लगाते रहे हैं कि वह ईरान के साथ अमेरिका की बातचीत को पटरी से उतारने के लिए इस तरह की हरकत करता रहा है। ऐसे में अब अमेरिकी एजेंसियां भी फूंक फूंक कर कदम रखना चाहती है। आलोचकों का कहना है कि इजरायल ऐसी सनसनीखेज खुफिया जानकारी साझा करके अमेरिका को ईरान के खिलाफ और कड़े सैन्य कदम उठाने के लिए प्रभावित कर रहा है।

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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