इस्लामपुरा होगा कृष्ण नगर, मुस्तफाबाद बनेगा धर्मपुरा; पाकिस्तान में बदलेंगे सड़कों के नाम

Nisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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इनमें क्वींस रोड, जेल रोड, डेविस रोड, लॉरेंस रोड, एम्प्रेस रोड, कृष्ण नगर, संत नगर, धरमपुरा, ब्रैंडरेथ रोड, राम गली, टेम्पबेल स्ट्रीट, लक्ष्मी चौक, जैन मंदिर रोड, कुम्हारपुरा, मोहन लाल बाजार, सुंदर दास रोड, भगवान पुरा, शांति नगर और आउटफॉल रोड शामिल हैं।

इस्लामपुरा होगा कृष्ण नगर, मुस्तफाबाद बनेगा धर्मपुरा; पाकिस्तान में बदलेंगे सड़कों के नाम

पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने लाहौर की कई सड़कों और गलियों के आजादी से पहले के नाम को बहाल करने की योजना को मंजूरी दे दी है। एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि इसका उद्देश्य शहर की विभाजन-पूर्व विरासत को पुनर्जीवित करना है। पिछले कुछ दशकों में लाहौर की कई ऐतिहासिक सड़कों और गलियों के नाम बदल दिए गए। इसके तहत ब्रिटिशकालीन और हिंदू धर्म से जुड़े नामों को बदलकर इस्लामी, पाकिस्तानी या स्थानीय हस्तियों से जुड़े नये नाम रखे गए।

कैबिनेट बैठक में दी गई मंजूरी

पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने पीटीआई-भाषा से कहा, 'कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में लाहौर और उसके आसपास के इलाकों की विभिन्न सड़कों और गलियों के मूल और ऐतिहासिक नामों को बहाल करने की योजना को मंजूरी दी गई थी।' उन्होंने कहा कि यह निर्णय इस ऐतिहासिक शहर की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए लिया गया है।

नवाज शरीफ कर रहे हैं अगुवाई

उन्होंने बताया कि इस पहल का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ कर रहे हैं, जो लाहौर विरासत क्षेत्र पुनरुद्धार परियोजना के प्रमुख भी हैं। उनके प्रस्ताव को पिछले सप्ताह कैबिनेट की मंजूरी मिल गई थी।

इन ऐतिहासिक स्थानों का नाम बदला गया था

लाहौर की ऐतिहासिक गलियों और सड़कों का नाम पिछली सरकारों ने बदल दिया गया था, जिनमें क्वींस रोड, जेल रोड, डेविस रोड, लॉरेंस रोड, एम्प्रेस रोड, कृष्ण नगर, संत नगर, धरमपुरा, ब्रैंडरेथ रोड, राम गली, टेम्पबेल स्ट्रीट, लक्ष्मी चौक, जैन मंदिर रोड, कुम्हारपुरा, मोहन लाल बाजार, सुंदर दास रोड, भगवान पुरा, शांति नगर और आउटफॉल रोड शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पहल के तहत इस्लामपुरा का नाम कृष्ण नगर, बाबरी मस्जिद चौक को जैन मंदिर चौक, मुस्तफाबाद को धर्मपुरा बनाया गया है।

शरीफ ने मिंटो पार्क (ग्रेटर इकबाल पार्क) में तीन क्रिकेट मैदानों और एक पारंपरिक 'अखाड़ा' (कुश्ती अखाड़ा) के जीर्णोद्धार का भी प्रस्ताव रखा है, जिसे व्यापक रूप से नुकसान की भरपाई की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। उनके भाई प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को 2015 में पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान शहरी विकास कार्यक्रम के तहत तीन ऐतिहासिक क्रिकेट मैदानों, क्रिकेट क्लबों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों और एक कुश्ती अखाड़े को ध्वस्त करने के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था।

क्यों ऐतिहासिक है मिंटो पार्क

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक जैसे कई क्रिकेटरों ने मिंटो पार्क के इन क्रिकेट क्लबों में प्रशिक्षण प्राप्त किया था। विभाजन से पहले भारतीय क्रिकेटर लाला अमरनाथ भी इन क्लबों में प्रशिक्षण लेने जाते थे। जब अमरनाथ 1978 में भारतीय क्रिकेट टीम के साथ लाहौर गए, तो वह मिंटो पार्क गए और 'क्रिसेंट क्रिकेट क्लब' के खिलाड़ियों के साथ समय बिताया। वह देश के विभाजन तक इसी क्लब से खेलते थे।

मिंटो पार्क में ध्वस्त हो चुके कुश्ती के अखाड़े में कभी गूंगा पहलवान, इमाम बख्श और गामा पहलवान जैसे दिग्गज पहलवानों के मुकाबले होते थे। विभाजन से पहले हिंदू मिंटो पार्क में दशहरा का त्योहार मनाते थे।

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निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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