इराक युद्ध में भी था बोलबाला, 7 साल पहले ट्रंप ने लगा मोजतबा खामेनेई पर क्यों लगाए थे प्रतिबंध

Ankit Ojha भाषा
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मोजतबा खामेनेई का ईरान का राजनीतिक गलियारों में पहले से ही काफी दबदबा था। उन्हें अली कामेनेई के कार्यालय का गेटकीपर भी कहा जाता था। बड़े काम उनकी सहमति से होते थे। 2019 में डोनाल्ड ट्रंप ने उनपर प्रतिबंध लगा दिए थे।

इराक युद्ध में भी था बोलबाला, 7 साल पहले ट्रंप ने लगा मोजतबा खामेनेई पर क्यों लगाए थे प्रतिबंध

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की रमजान के महीने में मौत होने के बाद देश की सत्ता की बागडोर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में सबसे प्रमुख नाम उनके बेटे मोजतबा खामेनेई का है, जिन्हें लंबे समय से ईरान की सत्ता व्यवस्था के भीतर प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है। मोजतबा खामेनेई एक धर्मगुरु हैं, जिन्होंने अपने अधिकतर राजनीतिक जीवन में कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन वह सर्वोच्च नेता के कार्यालय के भीतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

इराक-ईरान युद्ध में भी हुए थे शामिल

उन्हें अकसर सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली 'पावर ब्रोकर' और 'गेटकीपर' के रूप में देखा जाता रहा है। बताया जाता है कि 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में संक्षिप्त रूप से हिस्सा लिया था। हालांकि उन्हें व्यापक सार्वजनिक पहचान 1990 के दशक के आखिर में मिली, जब उनके पिता अली खामेनेई की सर्वोच्च नेता के रूप में स्थिति मजबूत हो चुकी थी।

समय के साथ उनकी पहचान दो प्रमुख पहलुओं से जुड़ी रही है। पहला, ईरान की सुरक्षा व्यवस्था, विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और उससे जुड़े कट्टरपंथी नेटवर्क के साथ उनके करीबी संबंध। दूसरा, सुधारवादी राजनीति और पश्चिमी देशों के साथ करीबी संबंधों के प्रति उनका कड़ा विरोध। आलोचक उन्हें 2009 के विवादित राष्ट्रपति चुनाव के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के दमन से भी जोड़ते हैं।

माना जाता है कि उन्होंने ईरान के सरकारी प्रसारण संगठन पर भी प्रभाव बनाए रखा, जिससे उन्हें देश के सूचना तंत्र और सरकारी विमर्श के एक हिस्से पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण मिला। साल 2019 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध लगाए थे और आरोप लगाया था कि वे बिना किसी औपचारिक सरकारी पद के भी सर्वोच्च नेता की ओर से प्रभावी भूमिका निभा रहे थे।

ईरान के संविधान के अनुसार, देश के सर्वोच्च नेता का चयन 88 सदस्यीय धार्मिक निकाय 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' करती है। यह निकाय संभावित उम्मीदवारों की धार्मिक, राजनीतिक और नेतृत्व संबंधी योग्यता का मूल्यांकन करता है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि व्यवहार में यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र नहीं मानी जाती और सत्ता प्रतिष्ठान का इसमें महत्वपूर्ण प्रभाव होता है।

मोजतबा खामेनेई को अपेक्षाकृत मध्य-स्तरीय धर्मगुरु माना जाता है और उन्हें 2022 में ही अयातुल्ला की उपाधि दी गई थी, जो सर्वोच्च नेता बनने के लिए आवश्यक मानी जाती है। इस वजह से कई विश्लेषकों ने इसे उन्हें अली खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में तैयार किए जाने का संकेत माना था। हालांकि 1979 की ईरानी क्रांति का मूल विचार वंशानुगत शासन का विरोध था, इसलिए कई ईरानियों के लिए पिता के बाद बेटे का सर्वोच्च नेता बनना उस सिद्धांत के विपरीत माना जा सकता है। इसके बावजूद संविधान के तहत अंतिम फैसला असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स को ही करना होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई के सर्वोच्च नेता बनने पर ईरान की नीतियों में बड़े बदलाव की संभावना कम है। माना जाता है कि उनके नेतृत्व में देश की राजनीति में सुरक्षा संस्थानों, खासकर आईआरजीसी का प्रभाव और मजबूत हो सकता है। विश्लेषकों के अनुसार ऐसे परिदृश्य में घरेलू स्तर पर विरोध प्रदर्शनों के प्रति सख्त रुख अपनाया जा सकता है, जबकि विदेश नीति में पश्चिमी देशों के साथ बातचीत मुख्य रूप से रणनीतिक जरूरतों के आधार पर ही की जा सकती है। कुल मिलाकर, उनके नेतृत्व में ईरान की नीति रणनीतिक रूप से व्यावहारिक रह सकती है।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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