चीन हथियार दे तो भी नहीं टिक पाएगा ईरान, एक्सपर्ट्स ने बताया युद्ध लंबा चला तो क्या होगा

Mar 01, 2026 06:11 am ISTNisarg Dixit हिन्दुस्तान टीम
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रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह (सेवानिवृत्त) बताते हैं कि ईरान पर हमले के पीछे अमेरिका के तीन लक्ष्य हैं। एक ईरान में सत्ता परिवर्तन, दूसरा उसके मिसाइल कार्यक्रम को ध्वस्त करना और तीसरा परमाणु कार्यक्रम पर आगे नहीं बढ़ने देना।

चीन हथियार दे तो भी नहीं टिक पाएगा ईरान, एक्सपर्ट्स ने बताया युद्ध लंबा चला तो क्या होगा

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई से उत्पन्न हालात के बाद मध्य-पूर्व देशों में युद्ध के हालात बन चुके हैं। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जिस प्रकार से ईरान ने अमेरिकी बेसों पर जवाबी हमले किए हैं, उसके चलते अमेरिका इस संघर्ष को बहुत लंबे समय तक जारी नहीं रखना चाहेगा।

अमेरिका के हैं तीन लक्ष्य

रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह (सेवानिवृत्त) बताते हैं कि ईरान पर हमले के पीछे अमेरिका के तीन लक्ष्य हैं। एक ईरान में सत्ता परिवर्तन, दूसरा उसके मिसाइल कार्यक्रम को ध्वस्त करना और तीसरा परमाणु कार्यक्रम पर आगे नहीं बढ़ने देना। अमेरिका चाहता है कि ईरान को इतना कमजोर कर दिया जाए कि भविष्य में उससे किसी प्रकार का खतरा नहीं हो। दूसरी तरफ ईरान के हमले जवाबी हैं। यदि अमेरिकी हमले बंद हो जाएंगे तो वह भी बंद कर देगा।

हालांकि, उसके पास इतनी ताकत नहीं है कि वह बहुत लंबे समय तक अमेरिका और इजरायल जैसे देशों का मुकाबला कर सके। उसके पास अच्छी मिसाइलें हैं, लेकिन उनके सहारे वह लंबा युद्ध नहीं लड़ सकता। इसलिए उसे अमेरिका के साथ बातचीत की टेबल पर आना ही पड़ेगा।

सिंह ने कहा कि ईरान ने पिछली बार भी अमेरिकी हमलों का भरपूर जवाब दिया था और इस बार भी दे रहा है। लेकिन वह लगातार कमजोर भी हो रहा है। उसकी अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ी हुई है। रूस और चीन उसके समर्थन में दिखते हैं, लेकिन रूस मौजूदा समय में उसे हथियारों की मदद देने में सक्षम नहीं है। अलबत्ता चीन हथियारों से मदद कर सकता है, लेकिन यह अमेरिका-इजरायल से लड़ने के लिए काफी नहीं होगा।

पूर्व एयर वाइस मार्शल ओपी तिवारी का कहना है कि ईरान के पास एयरफोर्स की ताकत कम है। इसलिए संघर्ष को लंबे समय तक जारी रखना उसके लिए आसान नहीं होगा। उसके समर्थन में हिजबुल्ला और कुछ शिया संगठन सामने आए हैं लेकिन ये संगठन अब पहले की भांति ताकतवर नहीं रहे हैं। युद्ध में ईरान की तबाही तय है।

युद्ध से तेल की कीमतों पर पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि इस युद्ध से तेल की कीमतें बढ़नी शुरू हो गई हैं। इससे दुनियाभर की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। मध्य-पूर्व के इन तमाम देशों से भारत भी तेल खरीदता है। तेल की कीमतों के साथ-साथ आपूर्ति में भी बाधा आ सकती है। हालांकि इसमें अमेरिका का फायदा है। उसके पास अभी वेनेजुएला का भी तेल है। इसलिए बढ़ी हुई कीमतों से अमेरिका को फायदा होगा। जबकि भारत के पास रूस से तेल खरीदने का विकल्प है जिसे वह आगे भी इस्तेमाल कर सकता है।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा चुनौती

लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह (सेवानिवृत्त) के अनुसार ईरान, इजरायल से लेकर कतर, सऊदी, बहरीन, यूएई में लाखों की तादाद में भारतीय नागरिक रह रहे हैं। युद्ध में सभी के लिए खतरा है, उनके लिए भी होगा। चूंकि भारतीय नागरिक बड़ी संख्या में हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है। हालांकि ईरान के हमले इन देशों में सिर्फ अमेरिकी बेसों को लक्ष्य करके किए जा रहे हैं, लेकिन मिसाइलें रास्ता भी भटक सकती हैं।

Nisarg Dixit

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Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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