फिर पलटवार की तैयारी में था ईरान, किसके कहने पर टाला हमला? खुद उप विदेश मंत्री ने बताया, US को नसीहत
पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच उच्च-स्तरीय वार्ता की मेजबानी करने वाला है, जिसका उद्देश्य युद्धविराम को मजबूत करना और पश्चिम एशिया में तनाव को बढ़ने से रोकना है। दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडल के बृहस्पतिवार रात तक इस्लामाबाद पहुंचने की उम्मीद है।

40 दिन के युद्ध के बाद दो हफ्ते का सीजफायर समझौता होने के बाद गुरुवार को पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए और वह विस्फोटक मोड़ पर जा पहुंचा लेकिन मध्यस्थ पाकिस्तान के हस्तक्षेप से एक बार फिर मामला पटरी पर लौट आया है। ईरानी उप विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह ने इसकी पुष्टि करते हुए खुद यह बात कही है कि सीजफायर उल्लंघन के बाद ईरान गुरुवार की रात इजरायल पर पलटवार कर जवाब देने वाला था लेकिन पाक के दखल के बाद ईरान ने अपना इरादा बदल दिया और हमला करने से अपने कदम पीछे खींच लिए।
फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी को दिए एक इंटरव्यू में खतीबज़ादेह ने कहा कि लेबनान पर इजरायली हमलों की वजह से सीजफायर समझौता खतरे में पड़ गया है। उन्होंने दो टूक कहा कि अमेरिका को लेबनान पर इजरायली हमले रोकने चाहिए। ईरानी उप विदेश मंत्री ने आगे कहा कि किसी भी क्षेत्रीय शांति में लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाले घंटे "बहुत अहम" हैं। ईरान के उप विदेश मंत्री ने इजरायल पर लेबनान पर "अचानक" हमला करने का आरोप लगाया और कहा कि यह सीज़फ़ायर का "गंभीर उल्लंघन" है।
सभी वादे पूरे करे अमेरिका
खतीबज़ादेह ने इससे पहले BBC के एक कार्यक्रम में कहा, "यह एक तरह का नरसंहार है।" उन्होंने कहा, "आप जानते हैं, ठीक सीज़फ़ायर स्वीकार किए जाने के तुरंत बाद लेबनान पर इजरायल की सरकार द्वारा हमला किया गया जो सीजफायर का स्पष्ट उल्लंघन है।" उन्होंने साफ शब्दों में और अमेरिका को चेतवानी भरे अंदाज में कहा कि वॉशिंगटन को दो नाव की सवारी करनी छोड़ देनी चाहिए। उसे युद्ध और सीज़फ़ायर के बीच एक का चुनाव करना होगा, एक ही समय पर दोनों चीजें एक साथ नहीं चल सकतीं। उन्होंने कहा कि लेबनान समेत सीजफायर के सभी वादों को अमेरिका माने और उसे पूरा करे।
शांति वार्ता में शामिल होगा ईरान
पाकिस्तान की अगुवाई में इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली शांति वार्ता में शामिल होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि ईरान का प्रतिनिधिमंडल आगामी शांति वार्ता में हिस्सा लेगा। उन्होंने कहा कि यह वार्ता इस्लामाबाद में होगी। दूसरी, तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस वार्ता में अपने प्रतिनिधि के तौर पर अपने दामाद जेरेड कुशनर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और मध्य पूर्व के दूत स्टीव विटकॉफ़ को भेज रहे हैं।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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