Explainer: ईरान युद्ध रोकने का फैसला आसान नहीं, डोनाल्ड ट्रंप क्यों नहीं कर पा रहे घोषणा? टीम में ही मतभेद

Mar 14, 2026 07:38 am ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान युद्ध शुरू होने के बाद इससे निकलना आसान नहीं है। ईरान के पास 60% तक समृद्ध यूरेनियम का भंडार भी है, जो परमाणु हथियार बनाने के करीब माना जाता है। खाड़ी के कई देशों को डर है कि हमला रुकने वाला नहीं है।

Iran-America War: ईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम के अंदर अलग-अलग राय सामने आ रही है। वाइट हाउस में खींचतान चल रही है कि युद्ध में जीत कब और कैसे घोषित की जाए। जबकि संघर्ष मध्यपूर्व के कई हिस्सों तक फैल चुका है। कुछ अधिकारी ट्रंप को चेतावनी दे रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल के हमलों की वजह से पेट्रोल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे अमेरिका में राजनीतिक नुकसान हो सकता है। वहीं कुछ सख्त रुख वाले नेता चाहते हैं कि ईरान पर सैन्य दबाव जारी रखा जाए।

ट्रेजरी विभाग और राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के अधिकारी ट्रंप को चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तेल की कीमतों में बड़ा झटका लगा और पेट्रोल महंगा हुआ तो युद्ध के लिए घरेलू समर्थन जल्दी घट सकता है। दूसरी ओर कुछ रिपब्लिकन नेता और टिप्पणीकार का कहना है कि अमेरिका को ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना होगा और अमेरिकी सैनिकों तथा पोतों पर हमलों का कड़ा जवाब देना होगा।

ट्रंप के कुछ प्रमुख समर्थक और रणनीतिकार चाहते हैं कि अमेरिका लंबे समय तक मध्यपूर्व के युद्ध में न फंसे। वे इस तरह दबाव दे रहे हैं कि मौजूदा संघर्ष को सीमित रखा जाए।

ईरान की सरकार गिरने की संभावना कम

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान की मौजूदा सरकार जल्द गिरने वाली नहीं है। इसलिए ट्रंप ने हाल में तेहरान की सरकार को हटाने की बात करना भी कम कर दिया है।

युद्ध से निकलने की कोशिश

ट्रंप अब इस युद्ध से निकलने का रास्ता खोजने की कोशिश कर रहे हैं। युद्ध शुरू करते समय प्रशासन ने अलग-अलग लक्ष्य बताए थे। जैसे ईरान के हमले को रोकना, उसके परमाणु कार्यक्रम को नुकसान पहुंचाना या उसकी सरकार को कमजोर करना।

युद्ध रोकने का फैसला आसान नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संकेत दे रहे हैं कि वह ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध को जल्दी खत्म करना चाहते हैं। लेकिन लड़ाई रोकने का फैसला भी अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए बड़े खतरे पैदा कर सकता है, भले ही ईरान इसकी अनुमति दे दे। अगर ट्रंप जीत का ऐलान कर बमबारी रोकते हैं साथ ही आर्मी को वापस बुलाना शुरू कर देते हैं, तो इससे कुछ समय के लिए वैश्विक बाजार शांत हो सकते हैं। लेकिन अगर ईरान की धार्मिक सरकार सत्ता में बनी रहती है और उसके पास परमाणु सामग्री, मिसाइलें और ड्रोन मौजूद रहते हैं, तो इससे ऊर्जा बाजारों पर ईरान का असर बढ़ सकता है। इससे अमेरिका के सहयोगी देशों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है और भविष्य में एक बड़ा क्षेत्रीय युद्ध होने की संभावना भी बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद इससे निकलना आसान नहीं है। ईरान के पास 60% तक समृद्ध यूरेनियम का भंडार भी है, जो परमाणु हथियार बनाने के करीब माना जाता है। खाड़ी के कई देशों को डर है कि हमला रुकने वाला नहीं है।

तेल आपूर्ति पर असर

ईरान के पास अभी भी कम दूरी की कई मिसाइलें, ड्रोन और समुद्री बारूदी सुरंगें हैं। इनके जरिए वह तेल और गैस के निर्यात को प्रभावित कर सकता है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए। अगर ईरान की सरकार बनी रहती है तो वह ऊर्जा ढांचों को प्रभावित कर सकता है।

जलडमरूमध्य खोलना मुश्किल

सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अगर होर्मुज को पूरी तरह खोलना हो तो ईरान के तटीय इलाकों पर जमीनी सैन्य कार्रवाई करनी पड़ सकती है। इससे युद्ध और बढ़ सकता है और अमेरिकी सैनिकों की मौत का खतरा भी बढ़ जाएगा।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


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