एक दिन में बस इतने जहाज; ईरान के सामने बेबस दुनिया, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर सुना दिया बड़ा फरमान
पश्चिम एशिया की जंग में अमेरिका और इजरायल के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए सीजफायर पर ईरान लगातार अपना प्रभुत्व जमाने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच तेहरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी नया फरमान बता दिया है।

Hormuz: पश्चिम एशिया में जारी जंग अमेरिका और उसके सहयोगियों समेत पूरी दुनिया के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। 28 फरवरी के पहले, जो होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से खुला हुआ था, उस पर अब ईरान लगातार प्रतिबंध लगाए हुए है। सीजफायर के बाद तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अभी इस रास्ते से केवल 15 जहाज प्रतिदिन गुजरेंगे। IRGC के सूत्रों की तरफ से साफ कर दिया गया है कि स्ट्रेट में युद्ध पूर्व स्थिति में लौटने के लिए लंबा समय लगेगा।
रूसी समाचार एजेंसी तास के मुताबिक एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने बताया कि सीजफायर के बाद भी तेहरान की तरफ से होर्मुज को युद्ध पूर्व की स्थिति में चलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सूत्र के मुताबिक, ईरान होर्मुज पर अपनी स्थिति को कमजोर नहीं पड़ने देगा। किसी भी जहाज को स्ट्रेट से गुजरने के लिए ईरान के विशिष्ट प्रोटोकॉल और मंजूरी का पालन करना ही होगा। इसके बाद भी तेहरान एक दिन में 15 से ज्यादा जहाजों को निकलने की अनुमति नहीं देगा। सूत्र ने बताया, “अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर में भी एक दिन में पंद्रह जहाजों के आवागमन को स्वीकार किया गया है। इन 15 जहाजों को भी ईरान से अनुमति लेनी होगी। इस क्षेत्र का पूरा सुरक्षा ढांचा IRGC संचालित करेगी। इस समझौते के आधार पर युद्ध पूर्व की स्थिति पर वापस आना अभी दूर की बात है।”
होर्मुज से पिछले 24 घंटे में निकले केवल 7 जहाज
सीजफायर पर सहमति बनने के बाद पश्चिम एशिया में भले ही धमाकों की आवाज थम गई हों, लेकिन इस युद्ध का असर अभी भी नजर आ रहा है। युद्ध के पहले प्रतिदिन करीब 60 जहाजों को सुरक्षित रूप से रास्ता देने वाले होर्मुज में पिछले 24 घंटों में केवल 7 जहाज निकल सके हैं। इनमें से भी ज्यादातर जहाज चीन के हैं। पाकिस्तान की तरफ से लगातार यह दावा किया जाता रहा है कि ईरान के साथ समझौते के तहत वह हर दिन दो जहाज होर्मुज से निकालने की क्षमता रखता है, लेकिन अभी तक इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका पर अपनी शर्तें थोपने की स्थिति में ईरान
28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया था, तब उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि वह ईरान के साथ इस स्थिति में समझौता करना होगा। समझौते के बाद भी होर्मुज पर ईरान का ही नियंत्रण है। इसके अलावा तेहरान मांग कर रहा है कि दो सीजफायर की दो हफ्ते की अवधि खत्म होने के पहले उसकी विदेशी संपत्तियों को भी अनफ्रीज किया जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की तरफ से की गई मांगों में सबसे महत्वपूर्ण मांग विदेशों में मौजूद उसकी संपत्तियों को अनफ्रीज करना शामिल है।
खुलकर अमेरिका और इजरायल को धमकी दे रहा ईरान
पाकिस्तान की मध्यस्थता में किए गए इस सीजफायर को अमेरिका और ईरान दोनों ही अपनी जीत साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। तेहरान ने इस बात पर जोर दिया है कि युद्ध को खत्म करने को संयुक्त राष्ट्र की औपचारिक मान्यता दी जाए। तेहरान की तरफ से साफ किया गया है कि अगर ऐसा नहीं होता है, तो अमेरिका और ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
सूत्र ने बताया कि ईरान की तरफ से कहा गया है, "अगर युद्ध को खत्म करने को लेकर ईरान की शर्तों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में शामिल नहीं किया जाता है। तो अमेरिका और जायोनी शासन को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। हम इनके खिलाफ लड़ाई को फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।"
बता दें, इस युद्ध के सीजफायर को लेकर पहले से ही दोनों पक्षों के बीच में तनातनी का माहौल बना हुआ है। इजरायल लगातार लेबनान के ऊपर हमला कर रहा है, अमेरिका की तरफ से भी स्पष्ट किया गया है कि ईरान सीजफायर में लेबनान शामिल नहीं है। लेकिन ईरान की तरफ से साफ किया गया है कि जब तक लेबनान में हमले नहीं रोके जाते, तब तक ईरान सीजफायर की शर्तों को नहीं मानेगा। इतना ही नहीं ईरान ने तेल अवीव पर हमला करने की धमकी भी दे डाली है। इसके अलावा उसने होर्मुज को भी फिर से बंद करने की बात कही है।
लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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