कब तक सस्ती होगी गैस और तेल, US और ईरान युद्ध खत्म होने के बाद कितने दिन लगेंगे
ईरान और अमेरिका युद्ध खत्म करने को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर 19 जून को साइन किए जाएंगे। इसके साथ ही उम्मीद जागी है कि दुनिया में एक बार फिर तेल और गैस की कीमतें सामान्य हो सकती हैं। जानते हैं कि इसमें कितना समय लगने वाला है।

अमेरिका और ईरान युद्ध अंतिम दौर में है। दोनों मुल्कों के बीच शांति स्थापित हो चुकी है, लेकिन अभी आधिकारिक रूप से समझौता करना बाकी है। 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में पाकिस्तान की मध्यस्थता में ये देश साइन करने वाले हैं। अब जब युद्ध खत्म होने की कगार पर है, तो चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है कि तेल और गैस की कीमतें कब तक घटेंगी।
कब मिलेगी राहत
अमेरिका और ईरान में समझौता होने के बाद भी दुनिया भर में तेल और गैस की आसमान छूती कीमतों और आपूर्ति की किल्लत से तुरंत राहत नहीं मिलेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट रातों-रात खत्म नहीं होगा और बाजार को पूरी तरह पटरी पर लौटने में अभी कई महीनों लग सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की पोत से ढुलाई, साफ करने की प्रक्रिया की धीमी रफ्तार और समुद्री रास्ते की सुरक्षा को लेकर बना अविश्वास ही इसकी मुख्य वजहें हैं। युद्ध के कारण पिछले तीन महीनों से कच्चे तेल से लदे दर्जनों पोत फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। पहले इन फंसे हुए पोत को बाहर निकाला जाएगा, जिसके बाद ही नए पोत को अनुमति मिल सकेगी।
ये हैं प्रमुख वजहें
सुरक्षा और बीमा का डर: एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के रिसर्च हेड डैनियल इवांस के अनुसार, कंपनियों और बीमा एजेंटों को यह भरोसा दिलाने में समय लगेगा कि अब यह रास्ता पूरी तरह सुरक्षित है।
जहाजों की धीमी रफ्तार: समुद्री टैंकर बहुत धीमी गति से चलते हैं। होर्मुज से दूसरे देशों तक पहुंचने, वहां रिफाइनरी में तेल साफ होने और फिर पेट्रोल पंपों तक पहुंचने की इस पूरी प्रक्रिया में महीनों का समय लगता है।
कुओं से तेल निकालने का काम ठप: जब जंग के दौरान तेल रखने की जगह खत्म हो गई, तो मध्य पूर्व के कई देशों ने जमीन से तेल निकालना पूरी तरह बंद कर दिया था। इस बंद पड़े काम को दोबारा शुरू करना एक बेहद धीमी और तकनीकी प्रक्रिया है।
भारत में क्या है स्थिति
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की पर्याप्त आपूर्ति है और नागरिकों तथा उद्योगों से ऊर्जा का जिम्मेदारी से उपयोग करने की अपील की है।
संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक ग्राहकों से आग्रह किया कि वे फुटकर ईंधन पंपों पर दबाव कम करने के लिए ‘उपभोक्ता पंपों’ से डीजल खरीदें। शर्मा ने बताया कि पेट्रोल, डीजल और LPG की सप्लाई स्थिर है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं, साथ ही कच्चे तेल का स्टॉक भी बनाए रखा गया है। दबाव इसलिए बढ़ा, क्योंकि डीजल की खपत का तरीका बदल गया है।
लेखक के बारे में
Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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