युद्ध के बीच पाकिस्तान की खुराफात? होर्मुज पर अमेरिकी नाकेबंदी के बाद कराची जाएंगे ईरानी जहाज

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी नाकेबंदी के बाद अब ईरान के तेल जहाज पाकिस्तान की तरफ मुड़ गए हैं। पहले यह दोनों जहाज कहीं और के लिए निकले थे लेकिन अब इन्होंने अपनी लोकेशन कराची पोर्ट के लिए सेट कर दी है।

shehbaz sharif and asim munir

Iran US war update: पश्चिम एशिया में जारी ईरान-अमेरिका यु्द्ध के बीच एक ऐसी खबर आई है, जिसने पाकिस्तान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान से करीब दस लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहे दो जहाजों ने अपनी लोकेशन को कराची की तरफ कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान आधिकारिक रूप से करीब एक दशक से ईरान से कोई तेल नहीं खरीदता है। हालांकि, जमीनी बॉर्डर के रास्ते बड़ी मात्रा में ईरानी तेल पाकिस्तान आता है। इन दो जहाजों के कराची की तरफ मुड़ने के बाद विशेषज्ञ इस बात पर नजर गड़ाए बैठे हैं कि क्या ईरान अपने तेल को पाकिस्तान में उतारेगा या फिर इसे किसी दूसरे जहाज पर लोड किया जाएगा। ब्लूमबर्ग द्वारा सामने लाए गए डाटा के मुताबिक इस तेल के पाकिस्तान में उतरने की संभावना कम है। क्योंकि अगर पाकिस्तान इस तेल को उतारता है, तो उस पर सेंक्शन्स लगने का खतरा बढ़ जाएगा। ऐसे में ऐसा हो सकता है कि यह जहाज अमेरिकी नाकाबंदी से सुरक्षित रहने के लिए पाकिस्तान के जल क्षेत्र में प्रवेश करना चाहते हों।

रिपोर्ट के मुताबिक 'रानी' और 'आमिल' नामक यह दो टैंकर जहाज करीब दस लाख बैरल कच्चा तेल लेकर ईरान से निकले हैं। इन दोनों जहाजों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया हुआ है। ऐसे में जब दोबारा अमेरिकी नाकेबंदी शुरू हुई, तो यह होर्मुज के पास फंस गए। ईरान इनको निकालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अमेरिका ने रोक दिया है। इसके बाद इन जहाजों ने कराची को अपनी लोकेशन बताया है। केप्लर की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से हाल के दशक में ईरानी तेल का आयात नहीं किया है। ऐसे में यह संभावना नहीं है कि यह टैंकर कराची पोर्ट पर खाली होगा। यह दोनों जहाज युद्ध के दौरान की उस नीति का पालन कर रहे हैं, जिसमें कई ईरानी टैंकर जहाज बच गए थे। मार्च और अप्रैल के बीच में जब अमेरिका ने होर्मुज नाकेबंदी शुरू की थी, तो उस वक्त भी कुछ जहाज कराची पोर्ट के पास और फारस की खाड़ी में स्टैंडबाय पर खड़े रहे थे। जैसे ही इन्हें निकलने का क्लीयरेंस मिला। यह चुपचाप अपने गंतव्य की और निकल गए थे।

पनामा और मलेशिया के मालिकाना हक वाले हैं जहाज

इन जहाजों का इस्तेमाल भले ही ईरान अपने फायदे के लिए करता हो, लेकिन यह मुख्यतः पनामा और मलेशिया के मालिकाना हक वाले जहाज हैं। मैरीटाइम इक्वासिस की रिपोर्ट के मुताबिक पनामा स्थित 'स्टारबोर्ड शिपिंग इंक-पैन' टैंकर जहाज 'रानी' का मालिक और मैनेजर है। वहीं 'अमिल' का मालिकाना हक मलेशिया स्थित 'अमेली लिमिटेड' के पास है, जबकि हांगकांग स्थित 'एस्पोइर शिपिंग लिमिटेड'इस जहाज का प्रबंधन करती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इन जहाजों का उपयोग करके ईरान अपने कच्चे तेल को चीन भेजता है। इन जहाजों पर प्रतिबंध होने की वजह से इन्हें सीधे तौर पर न भेजकर मलेशिया के पास इनके तेल को दूसरे जहाजों में अनलोड कर दिया जाता है। और व्यापार पूरा हो जाता है। कई बार यह जहाज अपनी लोकेशन को सार्वजनिक होने से बचाने के लिए ट्रांसपोंडर्स को भी बंद कर देते हैं। ऐसे में यह गुमनाम अवस्था में संचालित होते हैं और दूसरे देश के जहाजों में तेल उतार देते हैं।

पाकिस्तान जमीनी रास्ते से लाता है ईरान का तेल

भले ही यह दोनों जहाज इस वक्त पाकिस्तान की तरफ बढ़ रहे हों, लेकिन इस्लामाबाद को इससे फायदा होने की उम्मीद नहीं है। क्योंकि आधिकारिक रूप से उसने दशकों से ईरान का तेल नहीं खरीदा है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। पाकिस्तानी उर्जा मार्केट का एक बड़ा हिस्सा ईरान से ब्लैक में आए तेल पर ही निर्भर करता है। ईरान का तेल बलोचिस्तान के रास्ते गाड़ियों, ट्रकों मोटरसाइकिलों से पाकिस्तान पहुंचता है। फिर पाकिस्तान के बाकी राज्यों में यह पहुंचता है। इस बात को लेकर कई बार पाकिस्तान की आलोचना भी हो चुकी है। चूंकि यह ईरान और पाकिस्तान दोनों के लिए फायदे का सौदा है। इसलिए दोनों ही देश इस पर कोई ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं देते हैं।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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