जब तुम गुफाओं में थे, तब हम...'पाषाण युग' वाली धमकी पर ईरान ने ट्रंप को रगड़ दिया

Apr 03, 2026 02:12 pm ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान
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अमेरिका और ईरान के बीच महायुद्ध के साथ 'मीम वॉर' भी तेज हो गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की 'पाषाण युग' में भेजने की धमकी पर ईरान ने साइरस सिलेंडर का जिक्र कर ट्रंप का मजाक उड़ाया है। जानिए पूरा विवाद।

जब तुम गुफाओं में थे, तब हम...'पाषाण युग' वाली धमकी पर ईरान ने ट्रंप को रगड़ दिया

28 फरवरी से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी भीषण जंग अब केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल और कूटनीतिक मोर्चे पर भी यह लड़ाई उतनी ही आक्रामक हो गई है। एक तरफ जहां भारी बमबारी जारी है, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीका स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी नेतृत्व पर तीखा पलटवार किया है। दूतावास ने इस डिजिटल जंग के लिए प्राचीन इतिहास और व्यंग्यात्मक मीम्स का सहारा लिया है।

विवाद की शुरुआत: 'पाषाण युग' में भेजने की धमकी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी सेना ईरान में जल्द ही 'काम खत्म कर देगी क्योंकि मुख्य रणनीतिक उद्देश्य पूरे होने वाले हैं।' इस दौरान उन्होंने खुलेआम धमकी देते हुए कहा था कि 'अगले दो से तीन सप्ताह में हम उन पर बेहद कड़ा प्रहार करेंगे। हम उन्हें पाषाण युग में भेज देंगे, जहां उन्हें वास्तव में होना चाहिए।' इस आग में घी डालने का काम किया अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने। हेगसेथ ने 2 अप्रैल को एक्स पर ट्रंप के बयान का समर्थन करते हुए लिखा, 'पाषाण युग में वापसी।'

ईरानी दूतावास का ऐतिहासिक और व्यंग्यात्मक पलटवार

पीट हेगसेथ और डोनाल्ड ट्रंप की इस टिप्पणी के जवाब में, दक्षिण अफ्रीका में ईरानी दूतावास (@IraninSA) ने इतिहास का हवाला देते हुए एक जोरदार डिजिटल अभियान छेड़ दिया। दूतावास ने 2 अप्रैल 2026 की शाम को सिलसिलेवार तरीके से कई पोस्ट किए।

इतिहास का पाठ

पहला ट्वीट- यह सबसे आकर्षक और सबसे ज्यादा चर्चित रहा। इसमें एक रंगीन कार्टून है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप को ठीक फ्लिंटस्टोन्स कार्टून के फ्रेड फ्लिंटस्टोन की तरह दिखाया गया है- चट्टानों के बने कपड़े, नीला टाई, मुंह खुला हुआ और गुस्से में चीखते हुए। उनके बगल में खड़ा है एक प्राचीन फारसी राजा जो साइरस द ग्रेट जैसा लगता रहा है। उसने लाल चोगा, सोने का मुकुट पहना और मुस्कुरा रहा है। राजा नीला कपड़ा हटाकर एक प्राचीन मिट्टी का बेलन (सिलेंडर) दिखा रहा है, जिस पर पुरानी फारसी लिपि और शेर की नक्काशी है। पीछे आग जल रही है, एक फारसी सैनिक भाला लेकर खड़ा है और दूर पुरानी ईरानी इमारतें व गगनचुंबी दीवारें दिख रही हैं। कैप्शन में लिखा: फ्लिंटस्टोन्स और फारसी साम्राज्य। कला के जरिए सच्चाई।

दूसरा ट्वीट- दूतावास ने पीट हेगसेथ के ट्वीट को कोट करते हुए करारा जवाब दिया। उन्होंने लिखा, 'पाषाण युग? ऐसे समय में जब आप अभी भी गुफाओं में आग की तलाश कर रहे थे, हम साइरस सिलेंडर पर मानवाधिकारों को उकेर रहे थे। हमने सिकंदर और मंगोल आक्रमणों का तूफान झेला है और बचे रहे; क्योंकि ईरान सिर्फ एक देश नहीं है, यह एक सभ्यता है।'

तीसरा ट्वीट- इसमें सीधा और व्यक्तिगत हमला बोला। अपनी भड़ास निकालते हुए दूतावास ने अपनी पोस्ट में सीधे ट्रंप की समझ पर सवाल उठाया और लिखा- ट्रंप के इतिहास के टीचर को ढूंढो। उनके बेवकूफ छात्र ने कुछ भी नहीं सीखा है।

क्या है 'साइरस सिलेंडर' जिसका ईरान ने किया जिक्र?

इस कूटनीतिक बहस में ईरान द्वारा 'साइरस सिलेंडर' का उल्लेख बेहद अहम है। यह मिट्टी का एक प्राचीन बेलन है जिसे ईसा पूर्व 6वीं शताब्दी में फारस के राजा साइरस महान के आदेश पर बनाया गया था। ईसा पूर्व 539 में फारसी सम्राट साइरस महान ने बेबीलोन पर विजय प्राप्त की थी। इस सिलेंडर पर अक्‍कादी भाषा में लिखा है कि साइरस ने गुलामों को आजाद किया, मंदिरों का सम्मान किया, लोगों को उनकी धार्मिक आजादी दी और जबरन विस्थापित लोगों को घर वापस भेजा। ब्रिटिश म्यूजियम में रखा यह सिलेंडर आज भी संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानवाधिकारों का प्रतीक माना जाता है।

इसे अक्सर दुनिया का पहला मानवाधिकार घोषणापत्र माना जाता है, जिसमें धार्मिक सहिष्णुता, गुलामी के उन्मूलन और लोगों को उनके वतन लौटने की स्वतंत्रता का जिक्र है। ईरान इस ऐतिहासिक धरोहर का इस्तेमाल यह साबित करने के लिए कर रहा है कि जब पश्चिमी दुनिया का एक बड़ा हिस्सा असभ्य था, तब फारसी साम्राज्य (आज का ईरान) मानवाधिकारों और एक उन्नत सभ्यता की नींव रख रहा था।

पाषाण युग की बात करें तो यह वह प्रागैतिहासिक काल था जब मनुष्य मुख्य रूप से पत्थर से बने औजारों का प्रयोग करते थे और लोहे या अन्य धातुओं का इस्तेमाल अभी शुरू नहीं हुआ था। यह युग लगभग 30 लाख वर्ष पहले शुरू होकर करीब 5000 वर्ष पहले चला।

Amit Kumar

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