ट्रंप की नई चेतावनी से बढ़ा तनाव, ईरान पर फिर बमबारी की आहट; तेहरान कैसे करेगा पलटवार?

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अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया है कि ईरान का नया प्रस्ताव युद्ध समाप्त करने के लिए कोई ठोस सुधार नहीं लाता और पूरी तरह अपर्याप्त है। न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने स्पष्ट संदेश दिया कि हम तेहरान को कोई रियायत देने के लिए तैयार नहीं हैं। 

ट्रंप की नई चेतावनी से बढ़ा तनाव, ईरान पर फिर बमबारी की आहट; तेहरान कैसे करेगा पलटवार?

अमेरिका और ईरान के बीच अस्थिर युद्धविराम एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी सहयोगी देशों के अनुरोध पर ईरान पर नए सैन्य हमले रोक दिए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान के साथ गंभीर बातचीत चल रही है, जिससे एक स्वीकार्य समझौता संभव है। हालांकि, अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया है कि ईरान का नया प्रस्ताव युद्ध समाप्त करने के लिए कोई ठोस सुधार नहीं लाता और पूरी तरह अपर्याप्त है। न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने स्पष्ट संदेश दिया कि हम तेहरान को कोई रियायत देने के लिए तैयार नहीं हैं। इस्लामी शासन अच्छी तरह जानता है कि आगे क्या होने वाला है। उन्होंने कहा कि ईरान पहले से कहीं अधिक समझौते के लिए उत्सुक है क्योंकि उसे अमेरिकी कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा है।

छोटा लेकिन अत्यंत आक्रामक संघर्ष?

जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर्स के ईरानी सुरक्षा विशेषज्ञ हामिदरेजा अजीजी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद ईरान पहले चरण में लंबे संघर्ष की तैयारी में था। इसलिए उसने इजरायल और क्षेत्रीय लक्ष्यों पर ड्रोन-मिसाइल हमले सीमित रखे ताकि गोला-बारूद बचाया जा सके। अजीजी के अनुसार, यदि युद्ध फिर भड़कता है तो तेहरान 'छोटी अवधि लेकिन अत्यधिक तीव्रता' वाले संघर्ष की उम्मीद कर रहा है। इसमें अमेरिका द्वारा ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर भारी हमलों, खार्ग द्वीप जैसी आर्थिक जीवनरेखाओं पर हमले और संभावित जमीनी कार्रवाई की तैयारी शामिल है।

ईरान की संभावित जवाबी रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि नए दौर के युद्ध में ईरान प्रतिदिन दसियों से सैकड़ों मिसाइलें ईरानी और खाड़ी ठिकानों पर दाग सकता है। अरब देशों के तेल क्षेत्रों, रिफाइनरियों और बंदरगाहों को निशाना बनाना वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और ट्रंप प्रशासन पर दबाव बनाने का सबसे कारगर तरीका माना जा रहा है। ईरानी विश्लेषक और सरकार समर्थक मीडिया में UAE के खिलाफ जारी धमकियां इस रणनीति को उजागर करती हैं। ईरान का आरोप है कि UAE और सऊदी अरब ने अमेरिका-इजरायल के हमलों के दौरान गुप्त रूप से उस पर हमले किए थे।

ईरान के सुरक्षा बलों से जुड़े विश्लेषक मेहदी खरातियान ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में कहा कि हमें UAE को ऊंटों की सवारी के युग में वापस भेजना होगा और हम ऐसा कर सकते हैं। जरूरत पड़ी तो अबू धाबी पर कब्जा भी कर लेंगे। अरब गल्फ स्टेट्स इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो अली अलफोनेह ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि ऐसे बयान भले ही अतिरंजित लगें, लेकिन ये ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की मूल विचारधारा को दर्शाते हैं।

तेहरान के पास अन्य विकल्प

ईरान पहले से ही सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण रखता है, जहां से दुनिया की पांचवीं तेल आपूर्ति गुजरती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि युद्ध बढ़ने पर तेहरान बाब अल-मंडेब स्ट्रेट पर भी नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर सकता है। इस मार्ग से विश्व व्यापार का दसवां हिस्सा गुजरता है। यमन में ईरान समर्थित हूती मिलिशिया पहले से ही इस क्षेत्र में सक्रिय है।इसके अलावा, तेहरान की सड़कों पर आम नागरिकों को हथियार चलाने का बुनियादी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो अमेरिकी जमीनी आक्रमण की स्थिति में जन-युद्ध की तैयारी का संकेत है।

विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। आने वाले दिनों में होने वाली घटनाएं न सिर्फ मध्य पूर्व की सुरक्षा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था को भी गहरा प्रभावित कर सकती हैं।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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