ईरान के सम्मान में दोस्त तुर्की मैदान में, अमेरिका के हमले की धमकी के बाद एर्दोगन एक्टिव
तुर्की जिसकी सीमा ईरान से लगती है, ने कहा है कि वह अपने पड़ोसी देश में किसी भी विदेशी दखल का विरोध करता है और उसने वॉशिंगटन से ईरान के साथ अपने मुद्दों को एक-एक करके सुलझाने का आग्रह किया है।

US Iran Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले की धमकी दी है। इस बीच, ईरान का दोस्त और नाटो सदस्य तुर्की उसके पक्ष में खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति एर्दोगन सक्रिय हो गए हैं, जिसके बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची शुक्रवार को तुर्की का दौरा करने वाले हैं। इस दौरान वह तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान के साथ ईरान में हाल के घटनाक्रम और अमेरिका के साथ तनाव पर बातचीत करेंगे। ट्रंप ने बुधवार को ईरान से बातचीत की मेज पर आने और परमाणु हथियारों पर डील करने को कहा है, वरना धमकी दी कि अगला अमेरिकी हमला कहीं ज्यादा बुरा होगा। ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में एक जंगी बेड़ा भेजा है और तेहरान को सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को मारने या अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू करने के खिलाफ चेतावनी दी है।
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने अपने अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर एक त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है। तुर्की के सरकार समर्थक अखबार हुर्रियत ने यह रिपोर्ट दी है। अखबार के अनुसार, एर्दोगन ने 27 जनवरी को ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत के दौरान यह पहल की। तुर्की के नेता ने अमेरिका, ईरान और तुर्की को शामिल करते हुए एक शिखर सम्मेलन आयोजित करने का आह्वान किया, संभवतः वीडियो लिंक के माध्यम से। इसके जरिए से तुर्की ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करना चाहता है।
तेहरान, जिसने इस महीने बड़े विरोध प्रदर्शनों पर बेरहमी से कार्रवाई की और हजारों लोगों को मार डाला या गिरफ्तार किया, उसने अमेरिका, इजरायल और उनका समर्थन करने वालों के खिलाफ जवाबी हमला करने की धमकी दी है। ईरानी अधिकारियों ने 1979 की क्रांति के बाद के सबसे बड़े इस अशांति के लिए ईरान के दुश्मनों, इज़राइल और अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है।
ईरान की सुरक्षा, शांति तुर्की के लिए अहम
तुर्की जिसकी सीमा ईरान से लगती है, ने कहा है कि वह अपने पड़ोसी देश में किसी भी विदेशी दखल का विरोध करता है और उसने वॉशिंगटन से ईरान के साथ अपने मुद्दों को एक-एक करके सुलझाने का आग्रह किया है। उसने दोनों पक्षों से संपर्क किया है, और चेतावनी दी है कि ईरान में अस्थिरता इस समय क्षेत्र की संभालने की क्षमता से बाहर हो जाएगी। सूत्र ने कहा कि फिदान अराकची से कहेंगे कि तुर्की ईरान में हो रहे घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहा है, और ईरान की सुरक्षा, शांति और स्थिरता अंकारा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
अगर ईरान पर होता है अमेरिकी हमला तो...
वहीं, अमेरिका के संभावित हमले से पहले तुर्की ने रणनीति भी बनाई है। अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो तुर्की बॉर्डर सिक्योरिटी को मजबूत करने की योजना बना रहा है। एक सीनियर अधिकारी ने गुरुवार को न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि अगर अमेरिका पड़ोसी ईरान पर हमला करता है तो तुर्की अपने बॉर्डर पर इमरजेंसी प्लान पर विचार कर रहा है। अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “अगर यूनाइटेड स्टेट्स ईरान पर हमला करता है और सरकार गिर जाती है, तो तुर्की बॉर्डर सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए और कदम उठाने की योजना बना रहा है।”
अमेरिकी युद्धपोत ने मिडिल ईस्ट में ली पोजिशन
इससे पहले, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोमवार को कहा कि एक एयरक्राफ्ट कैरियर के नेतृत्व में एक अमेरिकी नेवी फोर्स ने मिडिल ईस्ट के पानी में पोजीशन ले ली है। हालांकि, उन्होंने इसकी सटीक जानकारी नहीं दी। नाटो सदस्य तुर्की ईरान के साथ लगभग 530 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। उसने ईरान को निशाना बनाने वाले अमेरिका के मिलिट्री ऑपरेशन का विरोध किया है। एक अधिकारी ने बताया कि उनकी साझा सीमा का कुछ हिस्सा 380 किलोमीटर लंबी दीवार से सुरक्षित है, लेकिन यह नाकाफी साबित हुई है। इस स्टेज पर, तुर्की के अधिकारी बफर जोन शब्द का इस्तेमाल करने से बच रहे हैं।

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Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी को मीडिया में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।
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