तेहरान पर कड़े हमले करो; सऊदी प्रिंस की ट्रंप से अपील, ईरानी विदेश मंत्री ने उठाया सवाल

Mar 17, 2026 12:07 am ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी प्रिंस सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से ईरान पर और तेज हमले करने के लिए कहा है। इस रिपोर्ट को लेकर ईरानी विदेश मंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा है कि ऐसे देशों को अपना पक्ष साफ करना चाहिए।

Iran US Israel war latest update : पश्चिम एशिया में जारी जंग अपने तीसरे हफ्ते में पहुंच गई है। अमेरिका द्वारा लगातार तेहरान पर हमला किया जा रहा है, तो वहीं ईरान लगातार खाड़ी देशों पर हमला बोल रहा है। इस वार-पलटवार के बीच अब एक नया दावा किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कथित तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर और कड़े हमले करने की अपील की है। इस रिपोर्ट पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने क्षेत्र के देशों से अपना पक्ष साफ करने के लिए कहा है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के तीन हफ्तों के दौरान सऊदी क्राउन प्रिंस और डोनाल्ड ट्रंप के बीच कई बार बात हो चुकी है। रिपोर्ट में वाइट हाउस के अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि सऊदी प्रिंस की यह सलाह उनकी लंबी समय से चली आ रही रणनीति का हिस्सा है। उनके पहले सऊदी के दिवंगत राजा अब्दुल्ला भी कई बार अमेरिका से ईरान की शक्ति को पूरी तरह से खत्म करने के लिए कह चुके हैं।

ईरान के विदेश मंत्री ने जताई चिंता

टाइम्स की इस रिपोर्ट को लेकर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का भी बयान सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर ऐसी रिपोर्ट्स पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने लिखा, "अमेरिका और इजरायल की बमबारी में अभी तक सैंकड़ों ईरानी मारे जा चुके हैं, इनमें 200 से ज्यादा बच्चे शामिल हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ पड़ोसी देश, जो कि अमेरिका को अपनी जमीन से हमला करने की इजाजत दे रखें हैं, वह भी इस नरसंहार को बढ़ावा दे रहे हैं। इन्हें अपना पक्ष साफ-साफ रखना चाहिए।"

कैसे हैं सऊदी अरब और ईरान के बीच रिश्ते?

सऊदी अरब और ईरान के बीच की लड़ाई केवल खाड़ी क्षेत्र की नहीं बल्कि दुनिया भर के इस्लाम के लिए वर्चस्व की भी है। सऊदी अरब जहां सुन्नी मुस्लिम समुदाय के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र है, तो वहीं ईरान शिया मुस्लिम समुदाय के लिए एक बड़ा आस्था का केंद्र है। सुप्रीम लीडर खामेनेई शिया धर्म गुरू थे। शिया और सुन्नी के बीच की लड़ाई और तनाव इन दोनों देशों में भी देखने को मिलता है।

ऐसे में अगर इस रिपोर्ट को सच भी मानें, तो एमबीएस का ट्रंप से हमले जारी रखने का कहना एक बड़ा रणनीतिक महत्व रखता है। दोनों देश दशकों से प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। ऐसे में अगर ईरान कमजोर और अस्थिर होता है, तो यह लगभग हर दृष्टि से सऊदी अरब के लिए फायदे का सौदा साबित होगा।

हालांकि, इस युद्ध की वजह से सऊदी अरब और यूएई को भारी नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। ईरान की तरफ से जारी पलटवार में सऊदी और यूएई के कई तेल ढांचों पर हमला हो चुका है। यह घटनाएँ तब हुईं जब इज राइल ने तेहरान के पास तेल भंडारण टैंकों पर हमला किया था, जबकि अमेरिका ने ऐसा न करने की सलाह दी थी। इस तरह जिस युद्ध को रियाद परोक्ष रूप से समर्थन दे रहा है, उसी के टुकड़े अब उसके अपने आंगन में भी गिर रहे हैं।

आपको बता दें, एक ऐसी ही रिपोर्ट पहले भी सामने आई थी, जिसमें कहा गया था कि सऊदी प्रिंस काफी पहले से अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए उकसा रहे हैं। इसके लिए वह इजरायल के पाले में खड़े हुए भी नजर आते हैं। इजरायल की तरफ सऊदी की भी डर है कि कहीं ईरान परमाणु संपन्न देश न बन जाए।

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