तेहरान टस से मस नहीं, शर्तों पर फंसा अमेरिका का पेच; ईरान के नए प्रस्ताव में क्या खास?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति फिलहाल गतिरोध का शिकार नजर आ रही है। कड़े बयानों, सैन्य धमकियों और हमलों के बावजूद ईरान अपने रुख पर अडिग है। दोनों पक्षों के लगातार बदलते संकेतों और दावों के बीच स्थिति भ्रमपूर्ण बनी हुई है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति फिलहाल गतिरोध का शिकार नजर आ रही है। कड़े बयानों, सैन्य धमकियों और हमलों के बावजूद ईरान अपने रुख पर अडिग है। दोनों पक्षों के लगातार बदलते संकेतों और दावों के बीच स्थिति भ्रमपूर्ण बनी हुई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के सामने एक व्यापक नया शांति प्रस्ताव रखा है, जो परमाणु वार्ता से कहीं आगे जाता है। इसमें अमेरिकी प्रतिबंधों में पूर्ण राहत, विदेशों में जमे ईरानी धन की रिहाई, ईरान के आसपास अमेरिकी सैन्य तैनाती हटाने और होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी समाप्त करने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी ने सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए को बताया कि प्रस्ताव में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर शत्रुता समाप्त करने, अमेरिकी प्रतिबंध हटाने और फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिकी-इजरायली अभियान में हुई तबाही के लिए मुआवजे की मांग की गई है। प्रस्ताव में ईरान के पड़ोसी क्षेत्रों से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की भी मांग शामिल है। ये शर्तें लगभग उन्हीं पुरानी मांगों जैसी हैं, जिन्हें ट्रंप ने पिछले सप्ताह 'बकवास' करार दिया था।
ट्रंप ने सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि ऐसा लगता है कि हम कोई समझौता कर लेंगे। अगर बमबारी किए बिना ऐसा हो जाए तो मुझे बहुत खुशी होगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं ने नए हमलों में देरी करने का आग्रह किया है क्योंकि समझौते की अच्छी संभावना है। बता दें कि पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पिछले महीने इस्लामाबाद में हुई प्रत्यक्ष शांति वार्ता के बाद पाकिस्तानी सूत्रों ने बताया कि ईरान का नवीनतम प्रस्ताव वाशिंगटन को भेज दिया गया है। सूत्र ने चेतावनी देते हुए कहा कि हमारे पास ज्यादा समय नहीं है।
दूसरी ओर ईरानी पक्ष का दावा है कि हालिया बातचीत में अमेरिका ने कुछ लचीलापन दिखाया है, जिसमें जमे हुए ईरानी परिसंपत्तियों की आंशिक रिहाई और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में सीमित परमाणु गतिविधि की अनुमति शामिल है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने तेल प्रतिबंधों में अस्थायी छूट की खबरों का खंडन किया है। नाम न बताने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने ईरान की तसनीम न्यूज एजेंसी द्वारा प्रकाशित उन रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि वाशिंगटन ने बातचीत के दौरान तेल प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से छूट देने पर सहमति जताई है।
बता दें कि महीनों चले अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैला दी है। युद्धविराम के बावजूद खाड़ी देशों में तनाव बरकरार है। हाल ही में इराक से सऊदी अरब और कुवैत की ओर हुए ड्रोन हमलों का संदेह ईरान समर्थित समूहों पर है। ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि सैन्य अभियान का मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना, मिसाइल क्षमता कमजोर करना और क्षेत्रीय प्रॉक्सी मिलिशिया पर अंकुश लगाना था।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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