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औरतों को वस्तु और भोग की चीज समझते हैं पश्चिमी देश, इस्लाम देता है आजादी- खामेनेई

औरतों को वस्तु और भोग की चीज समझते हैं पश्चिमी देश, इस्लाम देता है आजादी- खामेनेई

संक्षेप:

खामेनेई ने कहा है कि पश्चिमी पूंजीवादी व्यवस्था महिलाओं को वस्तु में बदल देती हैं और उनकी मौलिक गरिमा को नष्ट कर देती हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम में महिलाओं का उपयोग भौतिक शोषण के लिए किया जाता है।

Dec 04, 2025 08:03 am ISTJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने देश महिलाओं के लिए लागू सख्त ड्रेस कोड का पुरजोर समर्थन करते हुए इसे जायज ठहराया है। इस दौरान खामेनेई ने पश्चिमी देशों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पश्चिमी संस्कृति को महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने का जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा है कि इस्लाम महिलाओं को आजादी के साथ जीने का अवसर देता है, वहीं पश्चिमी देशों में औरतों को महज भोग की वस्तु समझा जाता है।

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इससे पहले हाल ही में ईरान की संसद के आधे से अधिक सदस्यों ने न्यायपालिका पर हिजाब कानून को लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। एक दिन बाद अयातुल्लाह अली खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स इससे जुड़े कई पोस्ट किए। खामेनेई ने यह बताने की कोशिश की है कि अनिवार्य हिजाब कानून और ड्रेस-कोड नैतिक रूप से पश्चिम से बेहतर है।

पश्चिमी संस्कृति पर हमला

खामेनेई ने हिजाब कानून के समर्थन में तर्क देते हुए कहा कि किसी भी समाज का पहला दायित्व है कि वह सामाजिक व्यवहार और परिवार के भीतर न्याय सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि इसीलिए सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे एक महिला की सुरक्षा, गरिमा और सम्मान की रक्षा करें। खामेनेई ने दावा किया कि पश्चिमी पूंजीवादी व्यवस्था महिलाओं को वस्तु में बदल देती हैं और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं। उन्होंने लिखा, “पूंजीवादी तर्क महिलाओं की गरिमा को रौंद डालता है और नष्ट कर देता है।”

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अयातुल्लाह खामेनेई ने आगे कहा कि पश्चिम में, महिलाओं का उपयोग भौतिक शोषण के लिए किया जाता है और उन्हें अक्सर समान काम के लिए पुरुषों की तुलना में कम भुगतान किया जाता है। खामेनेई के मुताबिक इस्लाम में महिलाओं के पास आजादी, आगे बढ़ने और प्रगति करने की क्षमता और एक पहचान बनाने का मौका है, जो पूंजीवादी समाजों में नहीं है।

महिलाएं फूलों की तरह…

खामेनेई ने इस्लामी ग्रंथों और हदीसों का हवाला देते हुए कहा कि महिलाएं घर में एक फूल की तरह हैं, जिन्हें घरेलू मजदूरी की तरह माने जाने के बजाय देखभाल और सम्मान की जरूरत है उन्होंने लिखा, "एक महिला सेविका नहीं है। उनकी फूल की देखभाल और रक्षा की जानी चाहिए और वह अपने रंग, खुशबू और गुणों से आपको समृद्ध करेगी।"

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari
जागृति ने 2024 में हिंदुस्तान टाइम्स डिजिटल सर्विसेज के साथ अपने करियर की शुरुआत की है। संत जेवियर कॉलेज रांची से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन करने बाद, 2023-24 में उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा हासिल किया। खबरें लिखने के साथ साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और अर्थव्यवस्था की खबरों को पढ़ना पसंद है। मूल रूप से रांची, झारखंड की जागृति को खाली समय में सिनेमा देखना और सिनेमा के बारे में पढ़ना पसंद है। और पढ़ें

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