स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कई जहाजों को निकाल लाया ईरान, अमेरिकी नाकेबंदी को कैसे दे रहा चकमा?

Jagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान से जुड़े जहाज लगातार इस नाकाबंदी को चकमा दे रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ये जहाज खुद को ट्रैक होने से बचाने के लिए कई तरह के तरीके अपना रहे हैं और अमेरिका इन्हें ट्रैक नहीं कर पा रहा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कई जहाजों को निकाल लाया ईरान, अमेरिकी नाकेबंदी को कैसे दे रहा चकमा?

अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी कर ईरानी जहाजों को इस रास्ते से ना गुजरने देने की धमकी दी है। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक ईरान इस नाकेबंदी को आसानी से चकमा दे रहा है और इस रास्ते से कई जहाजों को बाहर निकाल लाया है। नाकाबंदी लागू होने के बाद से ईरान से जुड़े कई टैंकर रास्ते से गुजर चुके हैं।

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अब अमेरिका का नियंत्रण होगा। इसका मकसद इस नाकाबंदी के जरिए ईरान के तेल और गैस निर्यात को रोकना और इस अहम समुद्री रास्ते पर उसका नियंत्रण कमजोर करना था। 12 अप्रैल को नाकाबंदी की घोषणा हुई और 13 अप्रैल से अमेरिकी नौसेना ने इसे लागू करना शुरू कर दिया।

अमेरिका ने उतारे कई युद्धपोत

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार इस ऑपरेशन में 10 हजार से ज्यादा सैनिक, मरीन, एयरमैन, एक दर्जन से ज्यादा युद्धपोत और कई विमान तैनात किए गए हैं। पहले 24 घंटे में अमेरिका ने दावा किया था कि कोई जहाज नाकाबंदी पार नहीं कर पाया और छह व्यापारिक जहाजों को वापस लौटा दिया गया। इसके बावजूद ईरान से जुड़े जहाज लगातार यहां से गुजर रहे हैं।

ईरान के कई जहाज गुजरे

रिपोर्ट के अनुसार, कोमोरोस झंडे वाला ‘एलपिस’ नाम का टैंकर, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में है, ईरान के बुशेहर पोर्ट से निकलकर बिना रोके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर गया। इसी तरह मेडागास्कर झंडे वाला ‘मुरलीकिशन’ टैंकर, जो पहले रूसी और ईरानी तेल ढो चुका है, वह भी इस रास्ते से गुजर गया।

कैसे अमेरिका को दे रहे चकमा?

विशेषज्ञों के मुताबिक ये जहाज खुद को ट्रैक होने से बचाने के लिए कई तरह के तरीके अपना रहे हैं। उदाहरण के तौर पर कुछ जहाज अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रांसपोंडर को बंद कर देते हैं, जिससे उनकी लोकेशन और पहचान छिप जाती है और वे डार्क हो जाते हैं। वहीं कुछ जहाज “स्पूफिंग” तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें वे गलत लोकेशन और गंतव्य की जानकारी भेजते हैं। इसके अलावा कुछ जहाज पूरी तरह किसी दूसरे जहाज की पहचान अपनाकर चलते हैं।

समुद्री खुफिया विशेषज्ञों का कहना है कि नाकाबंदी लागू होने के बाद इस तरह की गतिविधियों में तेजी आई है। ईरान से जुड़े जहाज अपनी पहचान छिपाने के लिए अपने 9 अंकों वाले यूनिक पहचान नंबर (डिजिटल फिंगरप्रिंट) तक बदल रहे हैं। कुछ जहाज जॉम्बी आईडी या फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर रहे हैं, जैसा तरीका रूस पहले इस्तेमाल करता रहा है। वहीं कुछ जहाज खुद को स्टेटलेस यानी बिना किसी देश के रजिस्ट्रेशन वाला भी दिखा रहे हैं।

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लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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