
ईरान में बिगड़े हालात, हजारों Gen Z सड़कों पर उतरे; लगा रहे खामेनेई मुर्दाबाद के नारे, तीन की मौत
ईरान में नए साल की शुरुआत के साथ ही मुद्रास्फीति और महंगाई के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन तेजी से हिंसक हो गए हैं। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ एक सप्ताह से अधिक समय से चल रहे इन प्रदर्शनों में अब तक कई प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के सदस्यों की मौत हो चुकी है।
ईरान में नए साल (2026) की शुरुआत के साथ ही मुद्रास्फीति और महंगाई के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन तेजी से हिंसक हो गए हैं। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ एक सप्ताह से अधिक समय से चल रहे इन प्रदर्शनों में अब तक कई प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के सदस्यों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शन तेहरान से लेकर ग्रामीण इलाकों तक फैल चुके हैं, जहां लोग गिरती मुद्रा, बढ़ती कीमतें और पश्चिमी प्रतिबंधों से उत्पन्न आर्थिक संकट के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। इस बीच, छात्रों ने पुराने शाह के समर्थन में नारे लगाए हैं, जबकि अमेरिका में निर्वासित रजा पहलवी ने प्रदर्शनकारियों को खुला समर्थन दिया है। सरकार ने एक ओर बातचीत का प्रस्ताव रखा है, तो दूसरी ओर सुरक्षा बलों की सख्ती जारी है। यह अशांति ईरान के धार्मिक नेतृत्व के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है, जहां दिसंबर 2025 में मुद्रास्फीति 42.5% तक पहुंच गई।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, नए साल की शुरुआत के साथ ही विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों की मौत हो चुकी है। एजेंसी ने ईरानी मीडिया और मानवाधिकार समूहों के हवाले से यह जानकारी दी है। वहीं, एपी की रिपोर्ट के अनुसार, नए साल की शुरुआत के साथ विरोध प्रदर्शन देश के ग्रामीण इलाकों में भी फैल गए हैं। प्रदर्शनों की शुरुआत के बाद से हताहतों की पहली रिपोर्टों में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है। बताया गया कि ईरान भर में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं।
इससे पहले, विश्वविद्यालय के छात्र तेहरान की सड़कों पर उतरे और 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे लगाए, साथ ही दिवंगत शाह मोहम्मद रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए, जो अमेरिका के सहयोगी थे और 1979 की इस्लामी क्रांति में सत्ता से हटाए गए थे। तेहरान के कुछ हिस्सों में 'शाह अमर रहें' जैसे नारे गूंजे। इस बीच अमेरिका में निर्वासन में रह रहे रजा पहलवी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि मैं आपके साथ हूं। जीत हमारी होगी क्योंकि हमारा उद्देश्य न्यायपूर्ण है और हम एकजुट हैं। उन्होंने आगे कहा कि जब तक यह शासन सत्ता में रहेगा, देश की आर्थिक स्थिति बदतर होती रहेगी।
बता दें कि देश में पिछले तीन वर्षों में मुद्रास्फीति के खिलाफ सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिससे कई क्षेत्रों में हिंसा भड़क गई है। लोरदेगान, कुहदाश्त और इस्फहान में लोगों की मौत की खबरें आई हैं। वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर से जुड़ी फार्स समाचार एजेंसी और मानवाधिकार समूह हेंगाव ने पश्चिमी शहर लोरदेगान में मौतों की सूचना दी है, जबकि अधिकारियों ने कुहदाश्त और इस्फहान प्रांत में कम से कम एक मौत की पुष्टि की है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें नए क्षेत्रों में फैलने के साथ तनाव बढ़ रहा है।
फार्स अखबार ने बताया कि लोरदेगान में सुरक्षा बलों और सशस्त्र प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में दो लोग मारे गए। हेंगाव ने कहा कि सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कई लोग मारे गए और घायल हुए हैं। वहीं, गार्डों ने घोषणा की कि कुहदाश्त में उनकी संबद्ध बसीज स्वयंसेवी अर्धसैनिक इकाई का एक सदस्य मारा गया और 13 अन्य घायल हो गए। गार्डों ने प्रदर्शनकारियों को दोषी ठहराया और उन पर 'लोगों के विरोध प्रदर्शनों के माहौल का फायदा उठाने' का आरोप लगाया है।

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